ग्रीन एनर्जी बनाने में भारत 10वें नंबर पर, संयुक्त राष्ट्र में पीएम मोदी के दावे से अभी बहुत दूर

by GoNews Desk 6 months ago Views 7177

India likely to miss 2022 renewable energy target
दुनिया में ग्रीन एनर्जी के ज़रिए बिजली उत्पादन के मामले में भारत 10वें नंबर पर है, जबकि बिजली खपत में इसका तीसरा स्थान है। इतना ही नहीं इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की 2021 की 'इंडिया एनर्जी आउटलुक रिपोर्ट' में कहा गया है कि अभी भारत की ऊर्जा मांग 2040 तक तेज़ी से बढ़ती रहेगी। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के मुताबिक, 'इसकी बड़ी वजह यहां तेज़ी से बढ़ने वाला औद्योगीकरण होगा।'

वैसे आपको बता दें कि ग्रीन पावर के मामले में भारत अप्रैल, 2015 में नरेंद्र मोदी सरकार के तय किए लक्ष्यों से बहुत पीछे चल रहा है। सरकार ने साल 2022 तक भारत की ग्रीन पावर क्षमता को 175 गीगावाट तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा था। तब भारत सिर्फ 40 गीगावाट ग्रीन पावर का उत्पादन करता था और 175 गीगावाट उत्पादन के लिए उसे अपनी क्षमता में चार गुना से ज़्यादा की बढ़ोतरी करनी थी।


आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र में प्रधानमंत्री मोदी के दावे के बावजूद ग्रीन पावर के लक्ष्यों से भारत अभी बहुत दूर है। ग्रीन पावर क्षमता से जुड़ी इस योजना की डेडलाइन आने में सिर्फ एक साल का समय बचा है और भारत अभी सिर्फ 93 गीगावाट ग्रीन पावर के लक्ष्य तक ही पहुंच सका है, यानी सिर्फ 53% लक्ष्य ही अब तक पाया जा सका है। ऐसे में माना जा रहा है कि भारत अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पाने से चूक जाएगा।

ऐसा तब हो रहा है, जब प्रधानमंत्री मोदी सितंबर 2019 में संयुक्त राष्ट्र में दिए एक भाषण में घोषणा कर चुके हैं कि भारत डेडलाइन से पहले 175 गीगावाट ग्रीन पावर उत्पादन के लक्ष्य को हासिल कर लेगा और इसके बाद उसका लक्ष्य 450 गीगावाट ग्रीन पावर के उत्पादन का होगा।

जब इस योजना की घोषणा की गई थी तो माना गया था कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ऊर्जा इंडस्ट्री को बदल देगा, लेकिन तब से अब तक भारत हर साल औसतन 12 गीगावाट क्षमता ही बढ़ा सका। जबकि भारत को लक्ष्य तक पहुंचने के लिए हर साल करीब 20 गीगावाट क्षमता बढ़ानी थी। पिछले साल तो कोरोना के चलते भारत अपनी क्षमता में सिर्फ 7 गीगावाट की बढ़ोतरी ही कर सका।

ग्रीन पावर में सौर ऊर्जा को हमेशा प्रमुख माना गया है। 175 गीगावाट के कुल लक्ष्य में सिर्फ सौर ऊर्जा के जरिए 100 गीगावाट क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा गया था। बता दें कि 2015 में जब यह लक्ष्य रखा गया था, तब देश सौर ऊर्जा के जरिए सिर्फ 3 गीगावाट ऊर्जा का उत्पादन करता था। तब से जनवरी 2021 तक देश की सौर ऊर्जा क्षमता बढ़कर 48 गीगावाट हो चुकी है, लेकिन अभी यह अपने लक्ष्य की आधी भी नहीं है।

भले ही भारत लक्ष्य से अभी बहुत पीछे हो, लेकिन पिछले कुछ सालों में इसने ग्रीन पावर में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी भी की है। भारत की ग्रीन पावर में हवा और सौर ऊर्जा का हिस्सा सबसे बड़ा है। हालांकि चिंता की बात यह है कि जहां 2017-18 के मुकाबले सौर ऊर्जा का हिस्सा 25% से बढ़कर 39% हुआ है, वहीं वायु ऊर्जा का हिस्सा 52% से गिरकर 44% हो गया है।

वर्तमान में केवल कुछ ही राज्य और केंद्रशासित प्रदेश 2022 के लिए तय लक्ष्यों को पूरा कर पाने की राह पर हैं। इनमें से जो तीन अपने लक्ष्यों से आगे भी निकल सकते हैं, वो हैं- तेलंगाना, कर्नाटक और अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह।

वहीं देश में 8 राज्य ऐसे हैं, जिनका 2022 का ग्रीन पावर की क्षमता का लक्ष्य 10 गीगावाट से ज़्यादा है, लेकिन उनमें से सिर्फ दो- कर्नाटक और गुजरात ही अपने लक्ष्य का 70% पूरा कर सके हैं। तमिलनाडु और राजस्थान 69% क्षमता के साथ इनसे पीछे हैं। बाकी चार राज्य आंध्र प्रदेश (47%), महाराष्ट्र (47%), मध्य प्रदेश (43%) और उत्तर प्रदेश (27%) अब तक 50% का आंकड़ा भी नहीं छू सके हैं।

फिलहाल इन ग्रीन एनर्जी सोर्सेज की क्षमता, भारत की कुल बिजली उत्पादन क्षमता का सिर्फ 25% है और इनका वास्तविक बिजली उत्पादन सिर्फ 9% है। हालांकि ध्यान देने वाली बात यह है कि यह वैश्विक औसत 10% के आस-पास ही होगी।

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