अपनी पूरी आबादी को वैक्सीनेट कर 1.8 लाख करोड़ बचा सकता है भारत: SBI Research

by M. Nuruddin 1 year ago Views 2572

दूसरी लहर का प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है लेकिन बड़े बैंकों द्वारा की गई कैलकुलेशन बहुत उत्साहजनक नहीं है...

India Can Save Rs 1.8 Lakh crore by Vaccinating Al
देश कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर से निपटने में कितना कामयाब हुआ, इसकी तस्वीरें हम सब ने सोशल मीडिया पर खुब देखी है। हमने सोशल मीडिया पर जो तस्वीरें देखी वो सरकार की नाकामियों का एक पहलू है। दूसरा पहलू यह है कि संक्रमण की दूसरी लहर ने देश की अर्थव्यवस्था को और भी चौपट कर दिया है।

संक्रमण की पहली लहर के दौरान तो प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केन्द्र ने कमान संभाली जिसका नतीज़ा हमने प्रवासी मज़दूरों के पलायन और बकौल केन्द्र 'दुनिया के सबसे सख़्त लॉकडाउन' की वजह से राष्ट्रीय जीडीपी के 9 फीसदी तक सिकुड़ने के रूप में देखा। दूसरी लहर का प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है लेकिन बड़े बैंकों द्वारा की गई कैलकुलेशन बहुत उत्साहजनक नहीं है। 


देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने बताया है कि देश का बिज़नेस एक्टिविटी इंडेक्स गिरकर 62 पर आ गया है जो पिछले साल के दौरान समान अवधि से भी बदतर है।

हालांकि इसबार केन्द्र ने राज्य सरकारों को ही अपने स्तर पर पाबंदियां लगाने की इजाज़त दे रखी है, इसके बावजूद बिज़नेस एक्टिविटी का गिरना अच्छा संकेत नहीं है। इससे साफ है कि भारत में दूसरी लहर अर्थव्यवस्था के लिए पहली लहर से भी ज्यादा विनाशकारी साबित हो सकती है। लेकिन मध्य प्रदेश और कुछ उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए, देश के ज़्यादातर हिस्से में मौजूदा समय में बिज़नेस और सर्विसेज़ के लिए आवाजाही पर प्रतिबंध है।

कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए देश के पास एकमात्र विकल्प वैक्सीनेशन ही है ताकि हर्ड इम्यनिटी सेट हो और संक्रमण का प्रसार रुके। दुनिया में कोरोना से सबसे ज़्यादा प्रभावित देश अमेरिका है जिसने अपनी 50 फीसदी अडल्ट आबादी को वैक्सीनेट कर लिया है। इससे संक्रमण की रफ़्तार कम हुई है। मसलन इसी साल जनवरी महीने में अमेरिका में हर रोज़ जहां तीन लाख से ज़्यादा मरीज़ मिल रहे थे वो अब 25,000 से नीचे आ गए हैं।

दूसरी तरफ, दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत में वैक्सीनेशन के रफ़्तार वैक्सीन शॉर्टेज की वजह से धीमी पड़ गई है जहां अब भी हर रोज़ संक्रमण के दो लाख से ज़्यादा नए मरीज़ मिल रहे हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी एक रिसर्च रिपोर्ट में बताया है कि अगर भारत अपनी पूरी अडल्ट आबादी को वैक्सीनेट कर लेता है तो यह लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से राजस्व के नुकसान से बचकर 1.8 लाख करोड़ रुपये बचा सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक़ लॉकडाउन की वजह से भारत को कुल 551,510 करोड़ का राजस्व नुक़सान हो सकता है। कैलकुलेशन के हिसाब से बताया गया है कि अगर भारत 40 डॉलर प्रति डोज़ के हिसाब से ही अडल्ट आबादी को वैक्सीन देता है तो इसपर सिर्फ 369,710 करोड़ रूपये ख़र्च होंगे। 

रिपोर्ट के मुताबिक़ सबसे ज़्यादा प्रभावित राज्य हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्यों में वैक्सीनेशन की लागत कुल राजस्व घाटे के आधे से भी कम है।

दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों को कुल राजस्व घाटे से भी ज़्यादा वैक्सीनेशन पर ख़र्च करना पड़ा सकता है। इससे पहले भी गोन्यूज़ ने आपको बताया था कि देश के आठ ग़रीब राज्यों को अपने स्वास्थ्य बजट का 30 फीसदी हिस्सा वैक्सीनेशन पर ख़र्च करना पड़ सकता है जिसमें उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे ग़रीब राज्य भी शामिल हैं।

हालांकि आधिकारिक तौर पर देश में दूसरी लहर कम हो रही है लेकिन हमें यह ध्यान रखनी चाहिए कि भारत में हर रोज़ रिपोर्ट किए जा रहे संक्रमण के मामले इस साल जनवरी के दौरान अमेरिका में महामारी के चरम से भी ज़्यादा है।

संक्रमण की वजह से हर रोज़ मारे जा रहे हज़ारों लोगों की जान बचाने के लिए कोई भी कीमत ज़्यादा नहीं है। एसबीआई ने वैक्सीनेशन की लागत 508 मिलियन डॉलर बताई है। गोन्यूज़ ने आपको यह भी बताया था कि महामारी के दौरान भारत को सबसे ज़्यादा विदेशी धन मिले थे।

इस दौरान भारत को 83 अरब डॉलर की विदेशी मदद मिली जिसके सामने भारत और भारतीय के लिए वैक्सीनेशन की लागत बेहद कम है

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