1990 के दशक के बाद पहली बार गिरी मिडल क्लास की आबादी, 'भारत' में सबसे ज़्यादा बढ़ी गरीबी

by Siddharth Chaturvedi 7 months ago Views 2682

In the pandemic, India’s middle class shrinks and
कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को बुरी तरह प्रभावित किया है। साल 1990 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि मिडल क्लास की आबादी में गिरावट दर्ज की गयी है।

वहीं कोरोना महामारी का असर भारत में भी साफ़ देखने को मिल रहा है। देश में उत्पन्न हुए वित्तीय संकट के कारण करीब तीन करोड़ 20 लाख लोग मिडल क्लास की श्रेणी से बाहर हो गये हैं। अमेरिका के प्यू रिसर्च सेंटर ने कहा है कि कोरोना संकट ने भारत के 32 मिलियन लोगों को मिडल क्लास की श्रेणी से नीचे धकेल दिया है।


प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक, कोरोना संकट काल में मिडल क्लास में 10 डॉलर से 20 डॉलर प्रतिदिन कमानेवालों की संख्या में करीब तीन करोड़ 20 लाख की गिरावट दर्ज की गयी है। कोरोना संकट के पहले देश में मिडल क्लास की श्रेणी में करीब नौ करोड़ 90 लाख लोग थे। जबकि, कोरोना महामारी के कारण इनकी संख्या घट कर करीब छह करोड़ 60 लाख हो गयी है।

वहीं, स्टडी के मुताबिक कोरोना महामारी के कारण देश में उच्च आय की श्रेणी के 6.2 करोड़ लोग मिडल क्लास की श्रेणी में आ गये हैं। उच्च आय की श्रेणी में ऐसे लोग आते हैं, जिनकी प्रतिदिन की आय 50 डॉलर या उससे अधिक होती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना के चलते लगाए गए लॉकडाउन से भारत में आर्थिक गतिविधियां थम गई। इससे भारत 40 साल में सबसे बड़ी आर्थिक मंदी में डूब गया क्योंकि महामारी ने बड़े पैमाने पर नौकरियां छिनी जबकि चीन इसे रोकने में सक्षम था। प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक, कोरोना काल की मंदी में चीन की तुलना में भारत में मिडल क्लास में अधिक कमी और गरीबी में अधिक वृद्धि होगी। मालूम हो कि साल 2011 से 2019 के बीच करीब पांच करोड़ 70 लाख लोग मिडल क्लास की श्रेणी में शामिल हुए थे।

प्यू रिसर्च सेंटर का अनुमान है कि प्रतिदिन दो डॉलर या उससे कम कमानेवाले गरीब लोगों की संख्या सात करोड़ 50 लाख हो गयी है। कोरोना वायरस के कारण आयी मंदी ने प्रगति को वर्षों पीछे धकेल दिया है।

पिछले साल जनवरी माह में विश्व बैंक ने भारत और चीन के आर्थिक विकास की दर का स्तर समान रहने का अनुमान जताया था। साल 2020 में भारत का 5.8 फीसदी और चीन का 5.9 फीसदी आर्थिक विकास की दर का अनुमान जताया गया था। लेकिन, एक साल बाद विश्व बैंक ने पूर्वानुमान को संशोधित करते हुए भारत के लिए 9.6 फीसदी संकुचन और चीन के लिए दो फीसदी वृद्धि की बात कही है।

इस साल घरेलू ईंधन की कीमतों में वृद्धि, नौकरी की हानि, वेतन में कटौती ने लाखों घरों को नुकसान पहुंचाया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि हालात कब बेहतर होंगे और कोरोना का कहर कब ख़त्म होगा।

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