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जुर्म नहीं किया तो जेलों में क्यों बंद हैं 1600 से ज़्यादा बच्चे?

by Rahul Gautam 1 year ago Views 2192

If not committed crime why are in jails over 1600
देश की अलग-अलग जेलों में क़ैद महिलाओं के साथ उनके नाबालिग़ बच्चे भी साथ रहने के लिए मजबूर हैं. लोकसभा के नए आंकड़ों के मुताबिक 1681 बच्चे अपनी माओं के साथ देशभर की जेलों में बंद हैं.

क़ानून कहता है कि अगर मां किसी जुर्म में जेल गई तो वो अपने बच्चे को भी छह साल की उम्र तक जेल में साथ रख सकती है. इसी क़ानून के चलते देश की अलग-अलग जेलों में 1681 बच्चे अपनी क़ैदी माओं के साथ रहने को मजबूर हैं.


गृह मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक 31 दिसंबर 2017 तक देशभर की जेलों में 12,684 विचाराधीन महिलाएं अपने मुक़दमे के फैसले का इंतेज़ार कर रही हैं। इनमें सबसे ज्यादा 2637 माएं अपने 416 बच्चों के साथ यूपी की जेलों में बंद हैं. वहीं पश्चिम बंगाल में 911 माओं के साथ 192 बच्चे, बिहार में 1249 माओं के साथ 166 बच्चे, मध्य प्रदेश में 731 माओं के साथ 159 बच्चे, झारखण्ड में 614 माओं के साथ 109 बच्चे, महाराष्ट्र में 1085 माओं के साथ 101 बच्चे, पंजाब में 722 माओं के साथ 52 और राजस्थान में 402 माओं के साथ 52 बच्चे जेलों में रहने के लिए अभिशप्त हैं.

अगर केंद्र शाषित प्रदेशों और पूर्वोत्तर के राज्यों को देखें तो दिल्ली में 447 माओं के साथ 35 बच्चे, असम में 226 माओं के साथ 28 बच्चे, मिजोरम में 71 माओं के साथ 7 बच्चे, मेघालय में 17 माओं के साथ 6 बच्चे, त्रिपुरा में 14 माओं के साथ 4 बच्चे, चंडीगढ़ में 20 माओं के साथ 3 बच्चे जेल की सलाखों के पीछे दिन काट रहे हैं।

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वहीं अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर और पुडुचेरी में एक भी बच्चा अपनी मां के साथ जेल में नहीं है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स के बाजवूद कम बजट और ढीले रवैये के चलते क्या जेलों में बच्चों को उनकी ज़रूरत की चीज़ें मसलन ख़ुराक़, साफ़ सफाई, और दवाइयां कितनी मिल पाती होंगी.

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