भूखा भारत: अनाज के भारी भंडार के बावजूद भंडारण में पीछे

by GoNews Desk Edited by M. Nuruddin 5 months ago Views 1642

Hungry India: Despite World's Largest Foodgrain St
एक साल लंबे आंदोलन के बाद केन्द्र ने कृषि क़ानूनों को वापस ले लिया लेकिन कृषि से जुड़े अन्य मुद्दों पर बहस छिड़ी हुई है।  इनमें एक देश की उत्पादन और भंडारण क्षमता भी है। बहस चल रही है कि क्या किसान जितना उपजाते हैं उसके लिए देश में भंडारण की व्यवस्था कैसी है।

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि साल 2015 और 2020 के बीच पांच वर्षों के दरमियान देश का खाद्यान्न उत्पादन 2,515.41 लाख टन से बढ़कर 2,975.04 लाख टन पर पहुंच गया है जो 18 फीसदी की बढ़ोत्तरी है। लेकिन इस हिसाब से देश की भंडारण क्षमता बेहद कम रही। 


उन पांच वर्षों के दरमियान देश की भंडारण क्षमता 2015 में 709.22 लाख मिट्रिक टन से 2020 में 755.94 लाख मिट्रिक टन रहा जो सिर्फ 6.58 फीसदी की बढ़ोत्तरी है।

साल 2018-19 और 2019-20  के बीच खाद्यान्न उत्पादन में 4.3 फीसदी की बढ़त देखी गई जब खाद्यान्न उत्पादन 2852.09 लाख टन से बढ़कर 2974.04 लाख टन हो गया। लेकिन इस अवधि में भंडारण क्षमता 11.65 फीसदी गिर गई।

मसलन इस दरमियान देश की भंडारण क्षमता 2019 में 855.65 लाख मिट्रिक टन के मुक़ाबले गिरकर 2020 में 755.94 लाख मिट्रिक टन पर आ गई।

फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) ने अपने मौजूद भंडारण स्थान का 2018 में 88 फीसदी के मुक़ाबले साल 2019 में 85 फीसदी का इस्तेमाल किया। FCI के मुताबिक़ भंडारण स्थानों का 2,683 क्विंटल रबी फसलों और 3,726.76 क्विंटल खरीफ फसलों के लिए इस्तेमाल किया गया। अक्टूबर 2021 तक FCI को 1.25 लाख करोड़ से ज्यादा सब्सिडी के तौर पर प्राप्त हुए।

वर्तमान में, 755.94 लाख मीट्रिक टन की भंडारण क्षमता भारत की 2975.04 लाख मीट्रिक टन (LMT) खाद्यान्न की कुल उत्पादन क्षमता का 25 फीसदी है।

भारत दुनिया में सबसे ज़्यादा खाद्यान्न उत्पादन वाला देश, फिर भी भूखी सोती आबादी

इस साल अगस्त में, दुनिया में State of Food Security and Nutrition (SOFI) की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018-20 के बीच, भारत में खाद्य असुरक्षा में 6.8 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। इसके साथ ही आपको यह भी बता दें कि जुलाई 2021 तक भारत के पास सबसे ज़्यादा खाद्य भंडार था।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 116 देशों की लिस्ट में 101वें स्थान पर रहा जो किसी बड़े खाद्य उत्पादक देश के लिए हैरत की बात है। अनाज का उचित भंडारण नहीं होने की वजह से भारत को बड़ा नुक़सान भी होता है। 

नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (एनएएएस) की एक रिपोर्ट में बताया गया कि भारत को औसतन अनाज में लगभग 4.6 से 6 फीसदी तक का नुक़सान उठाना पड़ता है। जबकि कुल उत्पादन में 4.6-15.9 फीसदी फलों का नुक़सान होता है।

भंडारण समस्या के समाधान के रूप में प्रस्तावित साइलो

भंडारण क्षमता को बेहतर करने के लिए सरकार इसपर 2019 से काम कर रही है। तब तत्कालीन खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री ने अपनी एक प्रेस रिलीज में कहा था कि शांता कुमार कमेटी द्वारा सुझाए गए कदमों पर काम किया जा रहा है। इसके तहत 2019 में मंत्री ने पांच सालों में देश में 100 लाख टन साइलो भंडारण क्षमता तैयार करने का लक्ष्य रखा था। 

साइलो के निर्माण के लिए मुख्य समस्याओं में से एक भूमि अधिग्रहण थी क्योंकि साइलो के नज़दीक कम से कम 1.5 किलोमीटर रेलवे लाइनों की ज़रूरत होती है। 100 लाख टन साइलो भंडारण क्षमता को पूरा करने का लक्ष्य 2021 रखा गया।

2015 में शांता कुमार कमेटी ने सुझाव दिया था कि साइलो भंडारण क्षमता बनाना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत जैसे विकासशील देश में अनाज के भारी नुकसान और बर्बादी को कम कर सकता है जो लगातार दुनिया के हंगर स्केल में उच्च स्थान पर है।

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