हाथी, बाघ और सांँप का शिकार बनकर हर साल सैकड़ों भारतीय गँवा रहे हैं जान

by Rahul Gautam 1 year ago Views 1967

Hundreds of Indians are losing their lives every y
जंगलों में बढ़ता इंसानी दखल अब उनकी मौत की वजह बन रहा है। पर्यावरण मंत्रालय के ताज़ा आँकड़े बताते हैं कि पिछले पाँच सालों में सिर्फ हाथियों के हमले में 2529 लोग जान गँवा जा चुके हैं। इसके अलावा साल 2015 से  2019 के बीच तक़रीबन 200 लोगों की जान बाघ ले चुके हैं।

पर्यावरण मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक साल 2015-16 में हाथियों ने 469 लोगो की जान ली। वहीं 2017-18 में 506 और 2019-20 में 586 लोग हाथियों के हमलों में मारे गये। सबसे ज़्यादा 430 मौतें पश्चिम बंगाल में दर्ज हुईं जबकि असम में 353 लोग मारे गये और ओडिशा में 349 लोगो की जान गई। आसान भाषा में कहें तो देश में हर रोज़ एक से ज्यादा इंसान की जान हाथियों से हो रही मुठभेड़ में जा रही है।


इसी तरह साल 2016 से 2020 के बीच 200 लोग बाघों के हमले में मारे गये। सबसे ज्यादा 54 लोगों की जान अकेले महाराष्ट्र में गयी, वहीं उत्तर प्रदेश में 51 लोग मारे गये और पश्चिम बंगाल में 44 लोग बाघ का शिकार हुए। जानकारों के मुताबिक जंगलों के नज़दीक बढ़ती इंसानी आबादी और खाने-पानी की कमी जैसे कारणों के चलते हाथी-बाघ जैसे जंगली जानवर इंसानी बस्तियों की तरफ रुख कर रहे हैं। नतीजा, इंसान और जानवर दोनों को जान गँवानी पड़ रही है।

ऐसा भी कई बार देखने को मिला है कि जंगली जानवर जब इंसानी बस्तियों में घुसे तो डर और भय के चलते इंसान ने उस जानवर की जान लेने में बिलकुल हिचक नहीं दिखायी।

संसद में पिछली बार पेश हुए स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश भर में साँप के काटने के मामलों में ज़बरदस्त उछाल आया है। साल 2018 में 1 लाख 64 हज़ार 31 लोगों को सांप ने काटा था जबकि साल 2019 में यह आंकड़ा 2 लाख 20 हज़ार को पार कर गया। साल 2018 में सांप के काटने की वजह से 885 लोगों की मौत हुई। इसी तरह 2017 में 1 लाख 58 हज़ार 650 लोगों को साँप ने काटा और मरने वालों की संख्या 1060 दर्ज की गई। 2016 में साँप काटने के 1 लाख 78 हज़ार 433 मामलों में 1068 लोगों की जान चली गयी।

साँप काटने से सबसे ज़्यादा 609 मौतें 2016 से 2018 के बीच पश्चिम बंगाल में हुईं। इसी अवधि में ओडिशा में 365, उत्तर प्रदेश में 319, मध्य प्रदेश में 249 और आंध्र प्रदेश में 230 लोगों की मौत हुई। राजधानी दिल्ली में भी 7 लोगों को सांप के काटने के बाद बचाया नहीं जा सका। सरकारी आंकड़े से इतर American Society of Tropical Medicine and Hygiene की रिपोर्ट दूसरी कहानी बयाँ करती है। इसके मुताबिक दुनिया में सबसे ज्यादा लोग साँप के काटने की वजह से भारत में मरते हैं और दुनिया में हर साल इससे मरने वाले 1 लाख लोगों में से 46 हज़ार भारतीय होते हैं।

यह मौतें इसलिए होती हैं क्योंकि साँप के काटने के बाद लोगों को मेडिकल की सुविधा नहीं मिल पाती। बड़े पैमाने पर लोग इलाज की बजाय अघोरी और तांत्रिकों से झाड़-फूँक करवाते हैं. भारत की तुलना अगर अमेरिका से करें तो वहाँ हर साल ज़हरीले साँप के काटने के तक़रीबन आठ हज़ार मामले आते हैं लेकिन मेडिकल सुविधा मिलने की वजह से एक भी मौत नहीं होती।

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