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मोदी राज में मानवाधिकार उल्लंघन और कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न बढ़ा - ह्यूमन राइट्स वाच

by GoNews Desk 1 month ago Views 2690

vaHuman rights violations and harassment of worker
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच की ताज़ा रिपोर्ट का कहना है की देश में बीजेपी राज में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, दलितों, मुसलमानो और सरकार की आलोचना करने वालों को तेज़ी से परेशान, उत्पीड़ित और गिरफ्तार किया जा रहा है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020 में मोदी सरकार ने जम्मू और कश्मीर के मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों पर कठोर और भेदभावपूर्ण प्रतिबंध लगाना जारी रखा। ध्यान रहे, केंद्र सरकार ने अगस्त 2019 में जम्मू कश्मीर की संवैधानिक स्थिति को रद्द करके इसे दो केंद्र शासित क्षेत्रों में बाँट दिया था। जम्मू और कश्मीर में सैकड़ों लोगों को बिना किसी दोष के लोक सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में रखा गया, जो दो साल तक सुनवाई के बिना हिरासत में रखने की अनुमति देता है। इसी तरह सुरक्षा के नाम पर इंटरनेट पर पाबंदी अगस्त 2019 से ही जारी रही जिससे घाटी में लोगों को ख़ासा नुक्सान हुआ।


ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि मोदी राज में अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों के खिलाफ हमले जारी हैं जबकि उन भाजपा नेताओं और समर्थको के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है जिन्होंने मुसलमानो की छवि ख़राब की या उनके खिलाफ हिंसा की। रिपोर्ट में दिल्ली दंगो का जिक्र करते हुए कहा गया है की ज्यादातर पीड़ित मुस्लिम परिवार से थे जबकि कपिल मिश्रा जैसे भड़काऊ भाषण देेने वाले बीजेपी नेता पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

दलित उत्पीड़न के मामलों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि बीजेपी राज में दलितों के खिलाफ अत्याचार 7 फीसदी तक बढ़ गया है।  लॉकडाउन में भी हाशिये पर रहने वाले समुदायों को ही सबसे ज्यादा नुक्सान हुआ जिन्हें उस दौरान रोज़गार, खाना-रहना जैसे ज़रूरतों से वंचित होना पड़ा। कई पत्रकारों को कोविड -19 पर रिपोर्टिंग के लिए आपराधिक मामलों, गिरफ्तारी, धमकी या यहां तक कि बीजेपी समर्थकों और पुलिस द्वारा हमले का सामना करना पड़ा। कई मामलों में, वे ग्रामीण भारत में काम करने वाले स्वतंत्र पत्रकार थे, जो सरकार की महामारी से निपटने की आलोचना के लिए निशाने पर आये।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कैसे पुलिस हिरासत में अत्याचार और हत्याओं के मामले में बढ़ोतरी ने पुलिस के दुरुपयोग की जवाबदेही और पुलिस सुधार लागू करने में विफलता को उजागर किया। अक्टूबर 2020 तक यानी पहले 10 महीनों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पुलिस हिरासत में 77 मौतें, न्यायिक हिरासत में 1,338 मौतें, और 62 कथित रूप से एक्स्ट्रा जुडिशल किलिंग्स दर्ज कीं।

कई अंतर्राष्टीय समूह जैसे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन, अमेरिकी कांग्रेस, यूरोपियन यूनियन, आर्गेनाईजेशन ऑफ़ इस्लामिक कन्ट्रीज भारत में मानवाधिकार और बोलने की आज़ादी को लेकर चिंता व्यक्त कर चुके है। संयुक्त राष्ट्र ने जम्मू और कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर चिंता व्यक्त की थी, वही नागरिकता कानून के विरोध में गिरफ्तार मानवाधिकार रक्षकों को तुरंत रिहा करने का आग्रह किया था।

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