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घाटे में चल रहे बिहार में बीजेपी कैसे देगी 19 लाख नौकरियाँ ?

by Rahul Gautam 1 month ago Views 928

How will BJP give 19 lakh jobs in loss-making Biha
बिहार चुनाव में बेरोज़गारी सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। बड़ी बड़ी जनसभाएं कर रहे आरजेडी के तेजस्वी यादव पहले ही ऐलान कर चुके है की जिस दिन उनकी सरकार आएगी, उसी दिन 10 लाख लोगो को नौकरी मिलने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस पर नीतीश कुमार ने तेजस्वी पर हमला भी किया था की इतनी सारी नौकरियाँ देने के लिए आखिर पैसा कहा आएगा। उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने बाक़ायदा हिसाब देकर पूछा की 10 लाख नौकरियों के लिए अतिरिक्त 58 हज़ार करोड़ रुपए कहा से लाएंगे तेजस्वी यादव।

लेकिन बीजेपी को अंदेशा हो गया था की नौकरियों का वादा लोगो को पसंद आ रहा है और शायद इसलिए तेजस्वी यादव की रैलियो में भीड़ जुट रही है। ऐसे में अब बिहार बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में ये ऐलान किया है की अगर बीजेपी की सरकार राज्य में बनती है, तो वे 19 लाख नौकरियाँ राज्य के लोगो को देंगे। लेकिन अब सवाल पूछना तो लाज़मी है की आखिर जब 10 लाख नौकरियों के लिए पैसा नहीं है, तो 19 लाख नौकरियों के लिए पैसा कहा से आएगा ?

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बता दे, साल 2020-21 में पूरे बिहार का ही बजट 2 लाख 11 हज़ार 761 करोड़ रुपए है। इसमें सरकारी नौकरो और उनकी पेंशन के लिए 58 हज़ार 380 करोड़ रुपए का प्रावधान है। इसके अलावा 39 हज़ार 351 करोड़ रुपए शिक्षा, 26 हज़ार 058 करोड़ रुपए ग्रामीण विकास पर, 24 हज़ार 008 पीने के पानी और शहरी विकास पर और 13 हज़ार 506 करोड़ रुपए समाज कल्याण पर खर्च करने का प्रावधान है।

अब अगर बीजेपी की 19 नौकरियों के वादे को जोड़ दिया जाये तो सवाल पूछा जा सकता है की अतिरिक्त 1 लाख करोड़ रुपए कहा से आएगा। ध्यान रहे, घोषणा पत्र में किये गए वादे को पूरा करने के लिए पार्टी बाध्य होती है।  ऐसे में अगर 19 लाख नौकरियों के वादे को अमली जामा पहनना है तो आखिर सरकार क्या शिक्षा, ग्रामीण विकास और समाज कल्याण जैसे क्षेत्रों में कटौती करेगी ? ऐसा होता है तो क्या राज्य में सड़क, बिजली और अन्य परियोजनाए खटाई में पड़ जाएगी।

खैर, बीजेपी के इस वादे से एक बाद तो साफ़ हो गयी है की बिहार में या नौकरियाँ विपक्ष के तेजस्वी के पास है या मौजूदा सरकार में जूनियर पार्टनर के पास और सूबे के मुखिया नीतीश कुमार के पास कुछ नहीं। इस मामले में एक सच्चाई ये भी है की बिहार का इस वर्ष का बजट पिछले साल से भी कम है।