FCRA से Electoral Bonds कितना अलग है ?

by M. Nuruddin 3 months ago Views 2480

How is FCRA different from Electoral Bonds?
केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने हाल ही में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित ईसाई संत मदर टेरेसा के मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी को विदेशी फंडिंग हासिल करने पर रोक लगा दी है। जबकि भारत में एनजीओ, राजनीतिक दल या कोई भी शख़्स नियमों के साथ विदेश से एफसीआरए के तहत फंड हासिल कर सकता है।

एफसीआरए भी इलेक्टोरल बॉन्ड की तरह ही है लेकिन इसमें थोड़ी पार्दर्शिता दी गई है। हालांकि इलेक्टोरल बॉन्ड पूरी तरह से एक गुप्त फंड है जिसमें फंड करने वाली कंपनी या शख़्स की कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती। जबकि विदेशी फंड हासिल करने के लिए एफसीआरए के तहत रजिस्ट्रेशन कराना होता है जिसमें कई जानकारी मांगी जाती है।


विदेशी फंडिंग हासिल करने के लिए एफसीआरए रजिस्ट्रेशन में चार दस्तावेज़ अनिवार्य रूप से मांगी जाती है जिसमें एसोसिएशन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, ट्रस्ट या एसोसिएशन का मेमोरेंडम, पिछले तीन सालों में एसोसिएशन की एक्टिविटी रिपोर्ट, और बैंक अकाउंट की एक ऑडिट रिपोर्ट मांगी जाती है। एफसीआरए गृह मंत्रालय के अधीन आता है और इसके लिए रजिस्ट्रेशन भी गृह मंत्रालय की वेबसाइट से ऑनलाइन की जा सकती है।

इनके अलावा नई स्थापित ऑर्गेनाइज़ेशन के लिए भी अलग रजिस्ट्रेशन होता है जिसमें एसोसिएशन या ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, एसिसोशन का एक मेमोरेंडम, डोनर ऑर्गेनाइज़ेशन का एक कमिटमेंट लेटर और एग्रिमेंट और साथ ही उस प्रोजेक्ट की जानकारी जिसके लिए फंड चाहिए, गृह मंत्रालय को देना होता है। ऐसे में यह एक पार्दर्शी प्रक्रिया है।

इन दस्तावेज़ों के अलावा रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरने के दौरान आधार और पैन कार्ड के साथ शख़्स की पूरी जानकारी मांगी जाती है।

इनके अलावा एफसीआरए रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को रीन्यू कराने के लिए एसोसिएशन का सर्टिफिकेट, मेमोरेंडम और गृह मंत्रालय द्वारा जारी एफसीआरए रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट देना होता है।

ख़ास बात यह है कि एफसीआरए आरटीआई के दायरे में आती है और ऐसे में किसी एसोसिएशन, राजनीतिक दल या ट्रस्ट को मिली फंड की जानकारी आरटीआई के माध्यम से हासिल की जा सकती है। जबकि इलेक्टोरल बॉन्ड आरटीआई के दायरे से कथित रूप से बाहर है और इसके तहत फंड देने वाली कंपनी और शख़्स की जानकारी गुप्त रखी जाती है।

गोन्यूज़ ने आपको पहले भी बताया है कि इलेक्टोरल बॉन्ड से सबसे ज़्यादा फंडिंग बीजेपी को मिलती है और पार्टी का यह एक बड़ा इनकन सोर्स है। इलेक्टोरल बॉन्ड के तहत बीजेपी को तीन सालों (2017, 2018 और 2019) में चार हज़ार करोड़ रूपये से ज़्यादा की फंडिंग मिली थी। इसके मुक़ाबले कांग्रेस को उन तीन सालों की अवधि में सिर्फ 706 करोड़ रूपये मिले थे।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक़ प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट के माध्यम से बीजेपी को कुल प्राप्त फंड का 85 फीसदी हासिल हुआ जबकि कांग्रेस को सिर्फ 0.8 फीसदी ही डोनेशन मिल सका। इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी को भी गुप्त रखने के नियम नरेंद्र मोदी की सरकार ने ही बनाई है जिसका लगातार विरोध भी हो रहा है।

ग़ौरतलब है कि एफसीआरए के तहत कोई भी राजनीतिक दल विदेशों से फंड हासिल नहीं कर सकती थी लेकिन साल 2016 में केन्द्र सरकार ने क़ानून में संशोधन कर इस नियम को ख़त्म कर दिया। फाइनेंस बिल 2016 के तहत कोई भी राजनीतिक दल अब विदेशी फंड हासिल कर सकती है।

इसके बाद साल 2018 में एक और संशोधन के तहत विदेशी फंड हासिल करने वाली राजनीतिक दलों को जांच के दायरे से भी बाहर कर दिया गया। लोकसभा और राज्यसभा में भारी हंगामे के बीच बिना चर्चा के इन विधेयकों को पारित कराया गया था।

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