महामारी की एक और लहर से तबाह हो जाएगी होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री !

by GoNews Desk Edited by M. Nuruddin 4 months ago Views 1671

Hotel and restaurant industry will be destroyed by
राजधानी दिल्ली में कोरोना संक्रमण से बिगड़ते हालात को देखते हुए होटल, रेस्टोरेंट और दफ्तरों के फिज़िकल संचालन पर रोक लगा दी गई है। संक्रमण की वजह से हॉस्पिटैलिटी सेक्टर गंभीर रूप से प्रभावित होता है। हालांकि टेकअवे की सुविधा जारी रहेगी लेकिन बैठकर खाने की सुविधा पर रोक रहेगी।

इस सेक्टर पर प्रतिबंध लगाने वालों में सिर्फ दिल्ली ही नहीं है। संक्रमण की गाज इसी सेक्टर पर सबसे पहले गिरती है जिसका असर देश और दुनिया दोनों पर पड़ता है।


राजधानी दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और हर रोज़ औसतन 20 हज़ार संक्रमण के मामले दर्ज किए जा रहे हैं। हालांकि सरकारी दावों के मुताबिक़ तीसरी लहर दूसरी लहर जितनी घातक साबित नहीं होगी। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने एक टीवी चैनल के साथ बातचीत में बताया कि संक्रमण की पीक एक से दो दिन में आ सकती है। उन्होंने फिलहाल लॉकडाउन की वक़ालत नहीं की है।

कोरोना संक्रमण की पहली और दूसरी लहर के दौरान हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की दुर्गति को लेकर Gonewsindia ने आपको बताया था कि बंदिशों की वजह से दो लाख से ज़्यादा रेस्टोरेंट पर ताला लग गया था। इससे 30-35 लाख लोगों का रोजगार भी प्रभावित हुआ। यह जानकारी नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने दी थी।

ग़ौरतलब है कि महामारी से पहले रेस्टोरेंट इंडस्ट्री का साला टर्नओवर सवा चार लाख करोड़ रूपये था जो संक्रमण की दो लहरों के दौरान गिरकर सवा लाख करोड़ पर आ गया। कोविड संक्रमण को क़ाबू करने के लिए लगाई गई बंदिशों की वजह से पहली लहर के दौरान पांच लाख में 30 फीसदी रेस्टोरेंट बंद हो गए, जबकि दूसरी लहर के दौरान दस फीसदी रेस्टोरेंट को बंद करना पड़ा।

इस हिसाब से महामारी की दो लहरों के दौरान लगभग दो लाख रेस्टोरेंट बंद हो गए। प्रत्यक्ष रूप से 73 लाख लोग इस इंडस्ट्री में काम कर रहे थे जिनमें 30-35 लाख लोगों की नौकरी चली गई।

इससे ज़ाहिर है कि अगर इस तीसरी लहर के दौरान भी कड़ी बंदिशें लगाई जाती है तो इसका बुरा प्रभाव एक बार फिर हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर पड़ना तय है।

महामारी की दो लहरों के दौरान बड़ी संख्या में बेरोजगार हुए लोग भी पूरी तरह से वर्कफोर्स में शामिल नहीं हो पाए हैं और हालात और ज़्यादा गंभीर हुए। बेरोजगारी की रिपोर्ट जारी करने वाली संस्था सीएमआइई के आंकड़े बताते हैं कि महामारी से पहले साल 2019 के दौरान देश में बेरोजगारी दर 5.27 फीसदी थी।

यह महामारी की पहली लहर के दौरान बढ़कर 7.11 फीसदी पर पहुंच गई और यह दर बढ़कर दिसंबर 2021 में 8 फीसदी हो गई थी। इसका मतलब है कि देश में संभावित बंदिशें ओवरऑल वर्कफोर्स के लिए भी घातक साबित हो सकती है।

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