यहां जानिए- उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी ज़िले का इतिहास

by M. Nuruddin 8 months ago Views 1934

History of Lakhimpur Kheri District of Uttar Prade
उत्तर प्रदेश का लखीमपुर खिरी ज़िला राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। ज़िले में रविवार शाम किसानों और भाजपा कार्यर्ताओं के बीच हिंसक झड़प में आठ लोग मारे गए हैं जिनमें कथित तौर पर चार किसान और चार भाजपा कार्यकर्ता शामिल हैं। ज़िले में सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स की चार कंपनियां तैनात की गई है। इसके बाद ज़िला मानो छावनी में तब्दील हो गया है।

ज़िले के पलिया, पूरनपुर, भीरा, बिजुआ और खजुरिया सहित आसपास के गांवों में पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है। साथ ही हिंसा स्थल से कम से कम 60-70 किलोमीटर दूर वाहनों को रोका जा रहा है, जो दुधवा नेश्नल पार्क से लगभग 40-45 किमी दूर है।


आईए इस रिपोर्ट में ज़िले के इतिहास और 1857 के देश की आज़ादी की लड़ाई में ज़िले के योगदान पर एक नज़र डालते हैं। राज्य का लखीमपुर ज़िला उन चुनिंदा जगहों में भी शामिल है जहां महाभारत के भी कुछ छाप मिलने के दावे किए जाते हैं।

स्वतंत्रता की पहली लड़ाई में लखीमपुर खीरी ज़िले का योगदान

17वीं शताब्दी में मुग़ल साम्राज्य के दौरान, अकबर के शासनकाल में ज़िला अवध के सूबे में खैराबाद की सरकार के अधीन था। इसके बाद के इतिहास में अवध के नवाबों के अधीन, 17वीं शताब्दी में ज़िले में कई शासकों के उत्थान और पतन देखने को मिलते हैं। 1856 तक इस ज़िले के दो हिस्से थे- एक मोहम्मदी जो ज़िले के पश्चिम में स्थित था और दूसरा मल्लनपुर जो ज़िले के पूर्वी हिस्से में स्थित था और इसमें सीतापुर (वर्तमान) ज़िले का कुछ हिस्सा भी शामिल था।

साल 1856 में जब अंग्रेज़ों ने अवध साम्राज्य को ख़त्म कर दिया, तब खीड़ी के लोगों ने अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ विद्रोह शुरु कर दिया था। इसी दौरान अंग्रेज़ों ने मोहम्मदी को खीरी ज़िला मुख्यालय के रूप में स्थापित किया और जेम्स थॉमसन को ज़िला कलेक्टर के रूप में नियुक्त किया।

1857 में स्वतंत्रता की पहली लड़ाई में वर्तामान का लखीमपुर खीरी उत्तरी अवध में अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ विद्रोह का केन्द्र बना। कम ही लोग जानते हैं कि लखीमपुर खीरी के लोगों ने न सिर्फ ब्रिटिश शासन के ख़िलाफ़ विद्रोह किया, बल्कि स्वतंत्रता की लड़ाई में ब्रिटिश को खदेड़ा और 1858 तक अपनी स्वतंत्रता बनाए रखा। इसके बाद अंग्रेज़ों ने पूरे बल के साथ अक्टूबर 1858 में हमला किया और वर्तमान के लखीमपुर खीरी ज़िलेको अपने क़ब्ज़े में लिया।

राज्य में महाभारत के छाप के दावे

लखीमपुर ज़िले की आधिकारिक वेबसाइट पर बताया गया है कि ज़िले के कई गांवों में प्राचीन टीले मिले हैं जिनमें मूर्तिकला के टुकड़े पाए गए हैं, बालमियार-बरखर और खैरलगढ़ जैसे गांवों में इसके छापे मिले हैं।

दावा किया गया है कि खैराबाद के पास एक पत्थर का घोड़ा पाया गया और उस पर समुद्रगुप्त का शिलालेख है, जो चौथी शताब्दी के हैं।

मगध के राजा समुद्र गुप्त ने अश्वमेध यज्ञ किया जिसमें एक घोड़े को पूरे देश में स्वतंत्र रूप खुला छोड़ दिया जाता है जो राजा के शक्ति का प्रदर्शन माना जाता है। आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक़ घोड़े की पत्थर की प्रतिकृति अब लखनऊ संग्रहालय में मौजूद है।

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