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हाथरस में केरल के पत्रकार की गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में हेबियस कॉर्पस

by GoNews Desk 7 months ago Views 824

Hebius Corpus in Supreme Court against the arrest
हाथरस गैंगरेप और हत्या के मामले में पत्रकार को संदिग्ध बताकर गिरफ़्तार करना यूपी  की योगी सरकार को भारी पड़ सकता है। केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (KUWJ) ने हाथरस की घटना को कवर करने गये पत्रकार सिद्धीक कप्पन की गिरफ्तारी पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते  हुए सुप्रीम कोर्ट में हेबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका) दायर की है। संगठन ने माँग की है कि सिद्दीक़ को अवैध हिरासत से तत्काल मुक्त किया जाये। यूपी पुलिस ने पीएफआई से जुड़े होने  के संदेह में उन्हें गिरफ्तार किया था।

कप्पन KUWJ के महासचिव हैं और ऑनलाइन मलयालम समाचार पोर्टल एझिकुमम से जुड़े हैं। संगठन ने कहा है कि उनकी गिरफ्तारी के बाद उनके परिजनों और सहयोगियों को पुलिस ने कोई सूचना नहीं दी है सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले जारी किये गये दिशा निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है। यह गिरफ्तारी एक पत्रकार के कामकाज में बाधा डालने के लिए की गयी है।


दरअसल, यूपी  पुलिस ने 5 अक्टूबर को हाथरस टोल प्लाजा पर कप्पन के अलावा अतीक-उर-रहमान, मसूद अहमद और आलम को पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI)से संबंधित होने का आरोप लगाते हुए गिरफ्तार किया था। यूपी सरकार इस संगठन पर प्रतिबंध लगाना चाहती है। उनके मोबाइल और लैपटॉप भी ज़ब्त कर लिये गये थे। सरकार ने इसे हाथरस में एक बड़ी साज़िश के सबूत बतौर पेश किया था।

वैसे, यूपी पुलिस ने जिस तरह के सबूत पेश किये थे, वे शुरू से ही हास्यास्पद लग रहे थे। लैपटॉप में अमेरिका के 'ब्लैक लाइव्स मैटर' समेत दुनिया भर के आंदोलनों के बारे में जानकारी थी 'जिसे यूपी में शांति व्यवस्था बिगाड़ने' के इरादे के रूप में पेश किया गया। जबकि ऐसी चीज़ें पत्रकार ही नहीं, किसी भी राजनीतिक-सामाजिक रूप से जागरूक व्यक्ति के मोबाइल और लैपटॉप में होना आम है।

दरअसल, हाथरस केस में बुरी तरह उलझी यूपी सरकार अब मसले को साज़िश का नतीजा बताने में जुट गयी है। सरकार की छवि चमकाने के लिए बाकायदा पीआर एजेंसी हायर की गयी है जो सीधे पत्रकारों के इनबाक्स में ऐसी चीजें भेज रही है जिससे की बलात्कार और हत्या का वीभत्स हाथरस कांड तमाम गैरज़रूरी मुद्दों में उलझ जाये। यही वजह है कि ताबड़तोड़ मुकदमे दर्ज किये जा रहे हैं और इस सिलसिले में हो रहे धरना-प्रदर्शन को सीएए-एनआरसी विरोधी आंदोलन से जोड़ने की कोशिश हो रही है ताकि कहा जा सके की योगी सरकार को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है।

बहरहाल, केरल के पत्रकारों की गिरफ्तारी बताती है कि यूपी सरकार के साजिश का किस्सा गढ़ने के लिए किस तरह बेताब है। सिद्दीक कप्पन ने ज़रूर बताया होगा कि वे पत्रकार हैं, लेकिन उनकी भाषा, लहजा और मुसलमान होना ही शायद गिरफ्तारी के लिए काफ़ी था। देखना है कि इस मामले में यूपी सरकार सुप्रीम कोर्ट में क्या सफाई पेश करती है।

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