क्या कर्नाटक सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग पर पाबंदी लगा दी है ?

by M. Nuruddin 9 months ago Views 1449

Has the Karnataka government banned online gaming?
कर्नाटक विधानसभआ ने मंगलवार को व्वाइस वोट के साथ एक विधेयक पारित किया है जिसके तहत ऑनलाइन गेमिंग जिसमें पैसों का लेनदेन होता है, को प्रतिबंधित किया है। आसान भाषा में कहें तो कर्नाटक सरकार ऑनलाइन सट्टेबाज़ी पर पाबंदी लगाने के लिए यह विधेयक लेकर आई है। इस विधेयक के तहत कर्नाटक पुलिस अधिनियम, 1963 में एक संशोधन किया गया है जिसके तहत ऑनलाइन सट्टेबाज़ी पर पाबंदी का प्रावधान जोड़ा गया है।

मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि प्रस्तावित क़ानून "कौशल के खेल" सुविधाओं का सख्ती से पालन करने वाले ऑनलाइन गेम को प्रतिबंधित नहीं करता है। यहां तक ​​​​कि उन कौशल खेलों पर पाबंदी लगाता है जिनमें खिलाड़ी के पैसे खोने का जोखिम हो। ऐसा करने वालों पर प्रस्तावित क़ानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑनलाइन गेम्बलिंग के स्थानीय संचालक पकड़े और दंडित किए जाते हैं तो ऑनलाइन सट्टेबाज़ी के विदेशी संचालकों को खुली छूट नहीं मिल सकती है। प्रतिबंधित किए गए खेलों में स्पोर्ट्स, ऑनलाइन गेमिंग और पोकर पर ऑनलाइन सट्टेबाजी शामिल है। विघेयक में ऑनलाइन गेम को विस्तार से परिभाषित किया गया है।

विधेयक में लेटेस्ट अडवांस टेक्नोलॉजी के तहत आने वाले ऑनलाइन गेम, मोबाइल फोन, कंप्युटर और टैबलेट सभी सट्टेबाज़ी के माध्यम को शामिल किया गया है। विधेयक में प्रतिबंधों को “किसी भी काम या पैसे खोने की जोखिम या कौशल के खेल सहित किसी घटना के अज्ञात परिणाम” को परिभाषित किया गया है।

इस तरह के गेम के संचालन, इस तरह के संचालन को आश्रय देना, और इस तरह के गेम में हिस्सा लेना भी संज्ञेय और ग़ैर-ज़मानती अपराध घोषित किया गया है। विधेयक में ऐसे अपराधियों के लिए तीन साल तक की जेल और एक लाख रूपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

हालांकि राज्य के भीतर या बाहर किसी भी रेसकोर्स पर चलने वाले हॉर्स रेसिंग या लॉटरी को प्रतिबंधित नहीं किया गया है। जबकि उद्योग संघों का कहना है कौशल के खेल पर आधारित खेल ही इस विधेयक के दायरे में आते हैं जिससे नौकरियों और आजिविका का नुक़सान होगा। ऑल इंडियन गेमिंग फेडरेशन ने कहा कि बेंगलुरु देश की स्टार्ट-अप राजधानी है और ऐसे क़दमों से उसकी छवि खराब हो सकती है।

ग़ौरतलब है कि राज्य सरकार यह विधेयक तब लेकर आई है जब कर्नाटक हाई कोर्ट से ऑनलाइन सट्टेबाज़ी पर पाबंदी लगाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने साफ किया था कि गेम्स ऑफ चांस या कहें कि अवसर के खेलों को ही प्रतिबंधित किया जाएगा न कि गेम्स ऑफ स्किल्स या कौशल के खेलों को।”

ऑल इंडिया गेमिंग फेडरेशन के मुताबिक़ कौशल-आधारित गेमिंग एक बढ़ता हुआ कल है और इससे देश में विशेष रूप से यूनिकॉर्न की संख्या बढ़ रही है। फेडरेशन के मुताबिक़ इस सेक्टर का मंदी के दौरान अर्थव्यवस्था में योगदान रहा और 2025 तक इस सेक्टर के राजस्व के 3 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। फेडरेशन ने कहा कि इस विधेयक को तकनीक हब और स्टार्ट-अप के लिए एक झटके के रूप में देखा जा सकता है।

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