'विकलांगता उत्पादों पर जीएसटी विकलांगता क़ानून के नियमों का उल्लंघन', सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

by M. Nuruddin 1 year ago Views 3169

'GST on Disability Products Violates Disability La
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक याचिका पर सुनवाई की जिसमें विकलांग लोगों की सहायता के लिए बने उत्पादों पर जीएसटी लगाने को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने सवाल उठाते हुए अपनी याचिका में कहा , 'सामान्य लोगों से चलने के लिए कोई टैक्स नहीं लिया जाता लेकिन विकलांग लोगों से चलने के लिए पांच फीसदी टैक्स वसूला जा रहा है।'

इस मामले में जस्टिस डीवाई चंद्रचुडं, जस्टि इंदु मल्होत्रा और जस्टि इंदिरा बनर्जी की बेंच सुनवाई कर रही हैं। बेंच के सामने अपनी दलील पेश करते हुए याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि विकलांग लोगों के इस्तेमाल के लिए बनाए गए ज़्यादतर उपकरणों पर पांच फीसदी जीएसटी लगाया गया है।


इसके बाद अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल नी कोर्ट को बताया कि इस मामले में उन्होंने वित्त मंत्रालय से बात की है। उन्हें बताया गया है कि इस मामले में याचिका स्वीकार करना ही मुश्किल है। अटॉर्नी जनरल ने अपनी दलील दी है, 'मानवीय स्तर पर याचिकाकर्ता की मांग सराहनीय है।  टैक्स लगाने मात्र को मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं माना जा सकता, ताकि इसमें कोई न्यायिक हस्तक्षेप हो।'

इसके जवाब में याचिकाकर्ता के वकील  पिनाकी मिश्रा ने कहा कि टैक्स लगाने से विकलांग लोगों को अन्य लोगों के लिए मौजूद संसाधनों का इस्तेमाल करने से वंचित होना पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि विकलांग सहायता पर जीएसटी विकलांग अधिनियम-2016 के समान अधिकार के नियमों का उल्लंघन है। मामले में सुनवाई कर रहे जस्टिस डीवाई चंद्रचुड़ ने कहा कि अदालत को संदेह है कि वो इस मामले में हस्तक्षेप कर सकता है या नहीं। क्योंकि टैक्स संबंधी मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप का दायरा बहुत कम है।

इसपर याचिकाकर्ता के वकील ने अपने जवाब में कहा कि जीएसटी लागू करने का फैसला जीएसटी काउंसिल द्वारा लिया गया है और वित्त मंत्रालय सिर्फ काउंसिल के फैसलों पर ही अमल करता है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सामने विकलांगता उत्पादों पर शून्य जीएसटी के लिए एक रिप्रज़ेंटेशन की इजाज़त मांगी। उन्होंने मांग की है कि विकलांग लोगों के इस्तेमाल के लिए बने सभी उत्पादों पर जीएसटी नहीं लगाया जाना चाहिए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मांग स्वीकारते हुए उन्हें इस मामले पर जीएसटी काउंसिल के साथ रिप्रज़ेंटेशन की इजाज़त दे दी है। कोर्ट इस मामले में  तीन महीने बाद जीएसटी काउंसिल का फैसला आने के बाद फिर सुनवाई करेगा।

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