ads

तब्लीग़ी जमात: एफ़आईआर ख़ारिज करते हुए हाई कोर्ट ने कहा- महामारी में बलि का बकरा बनाए गए जमाती

by M. Nuruddin 8 months ago Views 1611

Govt made Tablighi Jamaat scapegoat: Bombay HC qua
शनिवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में तब्लिग़ी जमात से जुड़े 29 विदेशी नागरिकों के ख़िलाफ विभिन्न धाराओं में दायर एफआईआर को ख़ारिज कर दिया है। ये सभी लोग दिल्ली के निज़ामुद्दीन मरकज़ में थे जब मरकज़ में कुछ लोग कोरोना संक्रमित हो गए थे। इसके बाद ही मीडिया के एक हिस्से ने इसे धार्मिक रंग देना शुरु कर दिया, जिससे विवाद बढ़ गया। इसको लेकर सोशल मीडिया पर जमातियों और अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार शुरू हो गया था।

तब विदेशी नागिरकों के ख़िलाफ़ आईपीसी की विभिन्न धाराओं, एपिडेमिक डिज़ीज़ एक्ट, महाराष्ट्र पुलिस एक्ट, डिज़ास्टर मैनेजमेंट एक्ट और फॉरेनर्स एक्ट के तहत टूरिस्ट वीज़ा के उल्लंघन के आरोप में मामले दर्ज किए गए थे। इनके अलावा इन विदेशी नागरिकों को शरण देने के आरोप में छ: भारतीय नागिरक और निज़ामुद्दीन स्थित मरकज़ के ट्रस्टियों पर भी मुक़दमें दर्ज किए गए थे, जिसे बॉम्बे हाई कोर्ट ने ख़त्म कर दिया है।


मामले का निपटारा करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि तब्लीगी जमात के विदेशियों को 'बलि का बकरा' बनाया गया। हाई कोर्ट ने उनके ख़िलाफ़ एफआईआर और मीडिया में दुष्प्रचार की भी आलोचना की है। कोर्ट ने कहा, ‘प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दिल्ली के मर्कज़ में आए विदेशी नागरिकों के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार किया गया। और एक तस्वीर बनाने की कोशिश की गई थी कि ये विदेशी ही भारत में कोरोना फैलाने के ज़िम्मेदारी थे। कोर्ट ने माना कि इन विदेशियों के ख़िलाफ़ ‘वस्तुत: उत्पीड़न’ किया गया।

अपने फैसले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा, ‘जब कोई महामारी या विपदा आती है तो राजनीति से प्रेरित सरकार उस समय एक बलि का बकरा ढूंढने की कोशिश करती है। हालात को देखें तो संभावना है कि विदेशियों को बलि का बकरा बनाने के लिए चुना गया था। सभी परिस्थितियों और देश में कोरोना संक्रमण के नए आंकड़े बताते हैं कि याचिकाकर्ताओं के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए थी।’

साथ ही कोर्ट ने कहा, ‘समय आ गया है कि विदेशियों के ख़िलाफ़ की गई कार्रवाई पर पछतावा किया जाए और इस तरह की कार्रवाई से हुए नुकसान की मरम्मत के लिए सकारात्मक क़दम उठाए जाएं।’

बॉम्बे हाई कोर्ट में औरंगाबाद बेंच के जस्टिस टीवी नलवड़े और जस्टिस एमजी सेवलिकर की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई की। ये याचिकाकर्ता आइवरी कोस्ट, घाना, तंज़ानिया, जिबूती, बेनिन और इंडोनेशिया के नागरिक हैं।

बता दें कि निज़ामुद्दीन पुलिस ने दावा किया था कि उसे अलग-अलग जगहों से मस्जिद में जमातियों के आने की ख़बर मिली थी। पुलिस ने यह भी दावा किया था ये कोरोना लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन कर वे मस्जिद में नमाज पढ़ रहे हैं। इसके बाद ही कई लोगों के ख़िलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया था। जबकि याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि वे मान्य वीज़ा के साथ भारत आए थे, जिसे सरकार ने ही जारी किया था। उन्होंने बताया कि वो भारत की संस्कृति, परंपरा, आतिथ्य और भारतीय भोजन का अनुभव करने के लिए यहां आए थे।

ताज़ा वीडियो