सरकार असहमति की आवाज़ दबाना बंद करे, इंटरनेट सेवा हो बहाल: संयुक्त किसान मोर्चा

by GoNews Desk 1 year ago Views 2348

सयुंक्त किसान मोर्चा ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि अब तक की जानकारी के मुताबिक़ 125 किसानों पर एफआईआर दर्ज है और 21 किसान लापता हैं।

Government should stop suppressing the voice of di
दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर किसान आंदोलन को 71 दिन पूरे हो चुके हैं। इस बीच सरकार ने कार्रवाई करते हुए ‘बिजली, पानी, इंटरनेट की सुविधा से किसानों को वंचित कर दिया है। गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस में संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार से इंटरनेट सेवा बहाल करने की मांग की। किसान नेताओं ने कहा कि असहमति की आवाज़ को दबाने की सरकारी कोशिशें लगातार जारी है। किसान नेताओं का कहना है धरनास्थल पर बैठे किसानों के साथ-साथ मीडिया और स्थानीय लोगों को भी परेशानी हो रही है। ख़ासकर छात्रों को ज़्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि उनकी परिक्षाएं नज़दीक हैं। 

संयुक्त किसान मोर्चा ने अपने बयान में कहा, ‘एक ओर सरकार डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं का प्रचार कर रही है, लेकिन दूसरी ओर देश के ही लोगों का इंटरनेट बंद कर रही है। आंदोलन को लगातार देश और दुनिया से समर्थन मिल रहा है। यह शर्मनाक है कि सरकार इसे अंदरूनी मामला बताकर आंदोलन को दबाना चाहती है। निंदनीय है कि जो लोग किसानों के साथ एकजुटता दिखा रहे हैं, उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है।’ सयुंक्त किसान मोर्चा ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि अब तक की जानकारी के मुताबिक़ 125 किसानों पर एफआईआर दर्ज है और 21 किसान लापता हैं।


संयुक्त किसान मोर्चा ने एक बार फिर दोहराया है कि, ‘यह आंदोलन पूरी तौर से किसानों का आंदोलन है और किसानों पर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं। इस आंदोलन को शुरु से ही राजनीति से दूर रखा गया है और आगे भी ऐसा ही रहेगा। किसी भी राजनीतिक दल के नेता को संयुक्त किसान मोर्चा का मंच नहीं दिया जाएगा। राजनीतिक दलों के नेताओं का स्वागत है लेकिन किसी के साथ भी संयुक्त किसान मोर्चा का मंच साझा नहीं किया जाएगा।’

सीमाओं पर राजनीतिक दलों का दौरा

ग़ौरतलब है कि गुरुवार को कई राजनीकि दलों के सांसद ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पहुंचे थे जिसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने अपने प्रेस कांफ्रेंस में यह बातें कही है। अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता लगातार सिंघू, ग़ाज़ीपुर और टिकरी बॉर्डर का दौरा कर कर रहे हैं। राजनीतिक दल किसान आंदोलन को खुला समर्थन पेश कर रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने खुलेतौर पर कहा है कि वो किसानों के साथ हैं। किसानों को कोई तोड़ नहीं सकता।

गुरुवार को ग़ाज़ीपुर बॉर्डर गए राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने अंदर एंट्री नहीं दी थी। इन नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को चिट्ठी भी लिखी और कहा कि सीमाओं पर किसानों की स्थिति जेल के कैदियों के जैसी है। विपक्षी पार्टियों के प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस अकाली दल, डीएमके, टीएमसी, नेश्नल कॉन्फ्रेंस, आरएसपी और आईयूएमएल शामिल थी।

दिल्ली पुलिस का बयान

दिल्ली पुलिस ने भी किसान आंदोलन को मिल रहे समर्थन को लेकर कुछ ‘खुलासे’ किए हैं। दिल्ली पुलिस ने बयान जारी कर कहा, 'सोशल मीडिया की निगरानी के दौरान एक ‘टूलकिट’ नाम की दस्तावेज़ पुलिस की नज़र में आई है। यह दस्तावेज़ किसी विशेष सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपलोड किया गया था। इस दस्तावेज़ को लेकर शुरुआती जांच में पता चला है कि यह ‘टूलकिट’ नाम की दस्तावेज़ प्रो खालिस्तानी संस्था ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ द्वारा बनाया गया था।’

दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया है कि, ‘टूलकिट बनाने की मंशा विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक समूहों के बीच असहमित पैदा करने और सरकार के ख़िलाफ़ असहमित पैदा करने की कोशिश है। इसको बनाने वालों का उद्देश्य भारत के खिलाफ सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक युद्ध शुरु करना है।'

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