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बिहार और उत्तर प्रदेश की सरकार छिपा रही कोविड से मरने वालों के आंकड़े ?

by GoNews Desk 1 month ago Views 2207

उस शंका को और बल मिलता है कि कहीं सरकार कोविड संक्रमण से होने वाले मौत के आंकड़े छिपा तो नहीं रही...

Government of Bihar and Uttar Pradesh hiding stati
देश में कोरोना की दूसरी लहर कहर बनकर टूट रही है। पिछले दस दिनों में दस लाख से ज़्यादा नए मरीज़ सामने आए हैं। संक्रमण से मरने वालों की संख्या भी तेज़ी से बढ़ रही है। संक्रमण की वजह से जान गंवाने वालों के अंतिम संस्कार में भी दिक्कतें आ रही हैं। शवदाह गृहों पर लोगों की लंबी क़तारें लग रही हैं। इसके साथ ही एक बार फिर सरकार पर कोविड से मरने वालों के आंकड़े छिपाने के आरोप लग रहे हैं।

बिहार की राजधानी पटना और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के शवदाह गृह में प्रति दिन लाशों की संख्या बढ़ गई है। शवदाह गृह में जितनी भी लाशें आती हैं, उनका नाम, उम्र, बीमारी और अन्य जानकारियां रजिस्टर में दर्ज की जाती है जिन्हें पटना के नगर निगम को भेजा जाता है। बाद में नगर निगम इसी के आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करता है। मीडिया आउटलेट डाउन टू अर्थ ने अपनी एक पड़ताल में बताया है कि बिहार और यूपी सरकार कोविड से मरने वालों की संख्या छिपा रही है।


रिपोर्ट के मुताबिक़ इसी महीने 6 से 8 अप्रैल तक पटना के सिर्फ बांसघाट शवदाह गृह में कोविड संक्रमण से मारे गए 26 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया। हालांकि बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि राजधानी पटना में 5 से 8 अप्रैल तक कोविड संक्रमण से सिर्फ एक ही शख़्स क मौत हुई।

बांसघाट शवदाह गृह से मिले आंकड़े बताते हैं कि 6 अप्रैल को यहां कुल 23 लाशें आई थीं, जिनमें से कोविड से संबंधित लाशों की संख्या 10 थी। 7 अप्रैल को कुल 17 लाशें यहां जलाई गई, जिनमें से 5 की मौत कोविड-19 संक्रमण से हुई थी। इसी तरह 8 अप्रैल को कुल 19 लाशों को यहां जलाया गया था, जिनमें 11 लोगों की मौत कोविड संक्रमण से हुई थी। 9 अप्रैल यानी शुक्रवार को दोपहर दो बजे तक शवदाह गृह में 19 लाशें आईं, जिनमें 10 मौतें कोविड-19 के संक्रमण से हुई थी।

यानी चार दिनों में इस शवदाह गृह में कुल 36 लोगों की लाशें आई हैं, जिनकी मौत कोविड संक्रमण की वजह से हुई। लेकिन, बिहार के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े और पटना के बांसघाट शवदाह गृह के रजिस्टर में दर्ज आंकड़े मेल नहीं खाते। रिपोर्ट में बताया गया कि इससे उस शंका को और बल मिलता है कि कहीं सरकार कोविड संक्रमण से होने वाले मौत के आंकड़े छिपा तो नहीं रही।

यही हाल उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बैकुण्ठ धाम का है जहां आंकड़ों के आधार पर औसतन करीब 20 लाशें रोज़ जलाई जाती है। जबकि यूपी सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़े काफी पीछे छूट जाते हैं। मसलन लखनऊ के सिर्फ बैकुण्ठ धाम में 6 से 8 अप्रैल तक 58 लाशें जलाई गईं जिनकी मौत कोविड की वजह से हुई थी।

इनमें 6 अप्रैल को 18, 7 अप्रैल को 22 और 8 अप्रैल को 18 कोविड संक्रमण से मारे गए लोगों का अंतिम संस्कार किया गया। जबकि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ सिर्फ राजधानी लखनऊ में 6 अप्रैल को सात, 7 अप्रैल को 6 और 8 अप्रैल को 11 मौतें ही संक्रमण की वजह से हुई। राजधानी के शवदाह गृह में बिजली से अंतिम संस्कार किए जा रहे हैं। बिजली से सिर्फ कोविड संक्रमण की वजह से मारे गए लोगों की लाशें जलाने के ही आदेश हैं।

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