'20 लाख करोड़' जैसी बड़ी घोषणाओं के बावजूद केन्द्र ने ख़र्च कम किया : रिपोर्ट

by M. Nuruddin 8 months ago Views 1273

Government Cuts Down Expenditure During Lockdown B
'20 लाख करोड़' जैसी बड़ी घोषणाओं के बावदूद केन्द्र सरकार ने पिछले वित्त वर्ष और इस चालू वित्त वर्ष में ख़र्च कम किया है।। पिछले वित्त वर्ष के दौरान देश में महामारी फैली थी और इस वजह से लॉकडाउन लगाया गया था, लेकिन चालू वित्त वर्ष में आर्थिक स्थिति में सुधार के बावजूद सरकार अपने ख़र्च के उस स्तर पर नहीं पहुंच सकी है जहां वो महामारी से पहले थी।

मसलन वित्त वर्ष 2021-22 के अप्रैल-जून तिमाही के लिए स्टेटिस्टिक्स मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले वित्त वर्ष के अप्रैल-जून तिमाही में केन्द्र सरकार ने वित्त वर्ष 2019-20 में किए गए ख़र्च की तुलना में 10 फीसदी से ज़्यादा कम ख़र्च किया है।


देश में महामारी के लगभग ख़त्म होने के बावजूद पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, रक्षा और अन्य सेवाओं जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन और व्यक्तिगत सेवाओं पर खर्च 2021-22 में भी मौन रहा है। यह ग्रॉस वैल्यू एडिशन या जीवीए के संदर्भ में केन्द्र द्वारा किए गए ख़र्च से लगभग 5 फीसदी कम है।

मंत्रालय ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि 2019-20 की जून तिमाही में जीवीए 399,148 करोड़ रुपये था जो 2020-21 में घटकर 358,373 करोड़ रुपये रह गया। जबकि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह बढ़कर 3,79,205 करोड़ रुपये हो गया जो कि पूर्व-महामारी की तुलना में 4.99 फीसदी फीसदी कम है।

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) ने अपनी नई डेटा रिलीज में यह पुष्टि की है कि सरकार द्वारा मौजूदा खर्च 10 साल या 5 साल के औसत से कम है। सीएमआईई आगे कहता है कि वित्त वर्ष 2021-22 के जुलाई महीने में सरकार का कम ख़र्च करना जारी रहा।

यह आश्चर्य की बात है कि सरकार अपने बड़े-बड़े दावों के बावजूद कम ख़र्च कर रही है। केन्द्र की सरकार यह कहती रही है कि अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ने की जरूरत है और सरकार के पास अर्थव्यवस्था का समर्थन करने के लिए पर्याप्त धन है। पिछले 17 महीनों के दौरान यह देखा जा सकता है कि कई मंत्रियों ने हज़ारों करोड़ रूपये के मदद का दावा किया।

यह भी दावे किए गए कि सरकार ने बिज़नेस और ग़रीबों की मदद की लेकिन देश में पैदा हुए और निरंतर जारी हालात इन दावों की पोल खोलता है। आंकड़ों पर ग़ौर करें तो पता चलता है कि माहमारी की वजह से देश की अर्थव्यवस्था की कमर टूट गई है।

आपको बता दें कि पिछले वित्त वर्ष के दौरान देश की जीडीपी में 7.5 फीसदी की गिरावट देखी गई थी। इससे साफ है कि स्टेटिस्टिक्स मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों ने केन्द्र और मंत्रियों के सभी दावों को ख़ारिज कर दिया है।

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