GoReports: कोरोना के ऑरिजिन पर सभी रिपोर्ट्स चीन के ख़िलाफ़ क्यों है ?

by M. Nuruddin 11 months ago Views 1677

भारत भी कोरोना संक्रमण के ऑरिजिन का पता लगाने को लेकर विश्व स्वास्थ्य की जांच को अहम बताया है...

GoReports: Why are all the reports on the origin o
कोरोना संक्रमण के ऑरिजिन को लेकर सभी मीडिया की रिपोर्ट्स चीन के ख़िलाफ है। रिपोर्ट में दावे किए जा रहे हैं कि कोरोना वायरस ने चीन के लैब से लीक होकर दुनिया में तबाही मचाई है। इसको लेकर कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने रिपोर्ट प्रकाशित की है।

सोमवार को अमेरिकी अख़बार दि वॉल स्ट्रीट जर्नल ने एक और रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें अमेरिकी सरकार की राष्ट्रीय प्रयोगशला के एक डॉक्यूमेंट्स के हवाले से कहा गया है कि चीन के वुहान में प्रयोगशाला से वायरस लीक का दावा प्रशंसनीय है और इस सिलसिले में आगे की जांच होनी चाहिए।


अमेरिकी राष्ट्रीय प्रयोगशाला की रिपोर्ट पर जर्नल ने बताया, 'राष्ट्रपति बाइडन ने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को एक हफ्ते के भीतर रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।' जर्नल की रिपोर्ट में बताया गया है कि राष्ट्रपति बाइडन ने दो मुख्य सेनेरियो पर ध्यान कैन्द्रित किया है जिसमें यह पता लगाने को कहा गया है कि वायरस ह्युमन कॉन्टेक्ट से फैला या प्रयोगशाला से लीक हुआ। वैज्ञानिक अभी इस मामले में किसी नतीज़े तक नहीं पहुंचे हैं। इसपर अमेरिकी खुफिया एजेंसियां अगले हफ्ते तक अपना रिपोर्ट पेश करेगी। 

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया है कि वायरस को लेकर नया अध्ययन अमेरिकी सरकार की राष्ट्रीय प्रयोगशाला लॉरेंस लिवरमोर के 'जेड डिवीजन' द्वारा तैयार किया गया है, जो इसकी खुफिया एजेंसी है। जर्नल ने बताया है कि लॉरेंस लिवरमोर को जैविक मुद्दों पर काफी विशेषज्ञता हासिल है।

लॉरेंस लिवरमोर के डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक़ वायरस का मूल्यांकन SARS-COV-2 वायरस के जीनोमिक विश्लेषण पर आधारित है, जो कोविड -19 का कारण बनता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि वैज्ञानिकों ने इसके लिए वायरस के अनुवांशिक मेकअप का विश्लेषण किया है कि वायरस कैसे बना और कैसे लोगों में फैला। 

हालांकि इन रिपोर्ट्स पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधिकारी भी दबी जुबान में ही टिप्पणी कर रहे हैं। इसी साल मार्च महीने की आख़िरी में विश्व स्वास्थ्य संगठन और चीन ने एक रिपोर्ट प्रकाशित कर वायरस के लैब से लीक होने के दावे को 'बेहद असंभव' बताया था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक शीर्ष अधिकारी माइक रयान ने सोमवार को कहा कि डब्ल्यूएचओ, चीन को कोविड की उत्पत्ती पर और डेटा सार्वजनिक करने के लिए मज़बूर नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि जबकि यह पता लगाया जाना चाहिए कि वायरस 'अगले स्तर' पर कहां उभरा।

दूसरी तरफ कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने रिपोर्ट प्रकाशित किए हैं, जिसमें कोरोना के चीन की लैब से लीक होने के दावे किए गए। गोन्यूज़ ने पिछले हफ्ते ही वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के हवाले से बताया था कि कोरोना की उत्पत्ती से पहले ही वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के तीन शोधकर्ता बीमार हो गए थे। 

इस रिपोर्ट में बताया गया था कि 2019 के नवंबर महीने में चीन के वुहान स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के तीन शोधकर्ताओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके एक महीने बाद चीन ने कोरोना के पहले मामले की जानकारी सार्वजनिक की थी। जर्नल ने अमेरिकी खूफिया एजेंसी के ही हवाले से यह रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

अख़बार ने बताया था कि इस अघोषित रिपोर्ट से (कोविड से) प्रभावित शोधकर्ताओं की संख्या, उनके बीमार पड़ने का समय और उनको अस्पताल में भर्ती कराना, इन सबसे यह झलकता है कि कोविड चीन के लैब से ही बाहर निकला।

कोविड वायरस लीक को लेकर हाल ही में ब्रिटिश खुफिया एजेंसी के हवाले से ब्रिटिश अख़बार दि संडे टाइम्स ने भी एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। अख़बार ने बताया था कि ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों का अब मानना​है कि यह "संभव" है कि COVID-19 महामारी की शुरुआत एक चीनी प्रयोगशाला से कोरोना वायरस लीक के साथ हुई है। 

वायरस लीक को लेकर अपने ठोस दावे के साथ ऑस्ट्रेलियाई मीडिया आउटलेट दि ऑस्ट्रेलियन ने मई महीने में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें दावा किया गया था कि 'कोरोना की उत्पत्ती के पांच साल पहले चीनी सेना ने कोविड-19 को एक बायोलॉजिकल हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के बारे में चर्चा कर रहे थे।' दि वीकेंड ऑस्ट्रेलियन का चीनी लीक डॉक्यूमेंट के हवाले से दावा था कि, 'चीनी वैज्ञानिकों ने अपने रिसर्च पेपर में सार्स कोरोना वायरस की चर्चा 'जेनेटिक हथियार के नए युग' के तौर पर की थी।

ऑस्ट्रेलियन ने चीनी रिसर्च पेपर के हवाले से बताया था कि 'इस जैविक हमले से दुश्मन की स्वास्थ्य व्यवस्था और अर्थव्यवस्था को ध्वस्त किया जा सकता है। चीनी सैन्य वैज्ञानिकों ने इस बात पर भी चर्चा की थी कि सार्स वायरस में हेरफेर करके इसे महामारी के रूप में कैसे बदला जा सकता है।'

ग़ौरतलब है कि भारत भी कोरोना संक्रमण की ऑरिजिन का पता लगाने को लेकर विश्व स्वास्थ्य के जांच को अहम बताया है। विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता अरिन्दम बागची ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर एक प्रेस रिलीज जारी कर कहा था, 'विश्व स्वास्थ्य संगठन की कोविड-19 की उत्पति से जुड़ी जाँच का अध्ययन एक अहम क़दम है। इस मामले में अगले चरण की जाँच की ज़रूरत है ताकि किसी निष्कर्ष पर पहुँचा जा सके। इस जाँच और अध्ययन के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन को सभी से मदद मिलनी चाहिए।'

 

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