GoReport: महामारी में सार्वजनिक प्रशासन पर केन्द्र ने कम ख़र्च किया

by M. Nuruddin 8 months ago Views 1700

गोन्यूज़ ने आपको पहले भी बताया था कि केन्द्र सरकार ने महामारी प्रबंधन पर कम ख़र्च किया है...

GoReport: Center spent less on services including
केन्द्र की मोदी सरकार ने महामारी के दौरान पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत सेवाओं पर अपने ख़र्च में लगातार कटौती की है। नेश्नल स्टेटिस्टिकल ऑफिस द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में वित्त वर्ष 2020-21 के चौथी तिमाही के मुक़ाबले सार्वजनिक प्रशासन समेत अन्य सेवाओं पर अपने ख़र्च में 19.3 फीसदी की कटौती की।

ग़ौरतलब है कि यह वो दौर था जब देश महामारी की दूसरी लहर से त्रस्त था। यानि ऐसे दौर में केन्द्र ने अपना ख़र्च बढ़ाने की बजाय कम किया है। मसलन सरकार ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 379,205 करोड़ रूपये ख़र्च किए। जबकि वित्त वर्ष 2021 की चौथी तिमाही में सरकार का सार्वजनिक प्रशासन समेत अन्य सेवाओं पर ख़र्च 469,945 करोड़ रूपये रहा था।


हालांकि यह पहली बार नहीं है जब महामारी में सरकार ने ज़रूरी सेवाओं पर अपना ख़र्च कम किया है। वित्त वर्ष 2020-21 यानि महामारी के दौरान सार्वजनिक प्रशासन समेत अन्य सेवाओं पर अपने ख़र्च में 10.2 फीसदी की कटौती की थी। जबकि यह वो दौर था जब सरकार को अपना ख़र्च बढ़ाने की ज़रूरत थी।

नेश्नल स्टेटिस्टिकल ऑफिस (NSO) द्वारा 31 मई 2021 को जारी आंकड़ों में बताया गया है कि इस दौरान सार्वजनिक प्रशासन समेत अन्य सेवाओं पर केन्द्र का ख़र्च 358,373 करोड़ रूपये रहा था जो वित्त वर्ष 2019-20 की समान अवधि में 399,148 करोड़ के मुक़ाबले 10 फीसदी से ज़्यादा कम है। आंकड़ों पर ग़ौर करें तो पता चलता है कि पूरी महामारी के दौरान केन्द्र ने पहले के मुक़ाबले कम ख़र्च किया है।

मसलन वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही में केन्द्र ने 9.2 फीसदी की कटौती के साथ 402,697 करोड़ और तीसरी तिमाही में 2.2 फीसदी की कटौती के साथ 446,771 करोड़ रूपये ख़र्च किए। इनके अलावा चौथी तिमाही में जब महामारी लगभग क़ाबू में थी तब केन्द्र का ख़र्च 2.3 फीसदी बढ़कर 469,945 करोड़ रूपये रहा था।

अब अगर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में एग्रिकल्चर, माइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रीसिटी और कंस्ट्रक्शन समेत अन्य सेवाओं और वस्तुओं पर केन्द्र के ख़र्च की बात करें, तो इसमें भी चौथी तिमाही के मुक़ाबले भारी गिरावट देखी गई। मसलन जहां चौथी तिमाही में इन सेवाओं ख़र्च 35,15,963 करोड़ रूपये का था वो चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में गिरकर 30,47,516 करोड़ रूपये पर आ गया।

हालांकि केन्द्र ने पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के मुक़ाबले इस अप्रैल-जून 2022 में 18 फीसदी से ज़्यादा का ग्रोथ दिखाया था। 

गोन्यूज़ ने आपको पहले भी बताया था कि केन्द्र सरकार ने महामारी प्रबंधन पर कम ख़र्च किया है। ग़ौरतलब है कि इस साल मार्च-जून के दौरान भारत में कुल 237,382 लोगों की या तो कोरोना संक्रमण से या स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में मौत हो गई। जबकि सार्वजनिक खर्च में पिछली तिमाही की तुलना में 19 फीसदी से ज़्यादा की कटौती देखी गई थी।

हालांकि सरकार ने अभी तक स्वास्थ्य सेवाओं पर कितना ख़र्च किया गया है इसका लेखा-जोखा जारी नहीं किया है लेकिन वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में सरकार ने स्वास्थ्य पर ज़्यादा ख़र्च करने की बात कही थी। पिछले साल वित्त मंत्रालय ने अर्थव्यवस्था के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया था लेकिन इस पैकेज का इस्तेमाल कहां हुआ, इसका कुछ पता नहीं चला।

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