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GoNews Special - अगले मुख्य न्यायधीश नियुक्त किए गए जस्टिस एनवी रमन्ना

by GoNews Desk 1 month ago Views 1994

जजों पर झूठे आरोप लगा कर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है: जस्टिस रमन्ना

GoNews Special: Justice NV Ramanna appointed as th
‘जस्टिस नाथुलापति वेकट रमन्ना’ सुप्रीम कोर्ट के अगले मुख्य न्यायधीश नियुक्त किए गए हैं। सोमवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उनके नाम की मज़ूरी दी। जस्टिस रमन्ना अगले सीजेआई के तौर पर 24 अप्रैल को शपथ लेंगे। वो 26 अगस्त 2022 तक मुख्य न्यायधीश के पद पर बने रहेंगे। अब जबकि वो देश के अगले सीजेआई बनाए गए हैं, तो हमारे लिए यह जानना बेहद ज़रूरी है कि, जस्टिस रमन्ना कौन हैं ?

जस्टिस रमन्ना: अगले सीजेआई !


27 अगस्त 1957 को अविभाजित आंध्र प्रदेश के कृष्णा ज़िले में जन्में जस्टिस रमन्ना 2 फरवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट में जज के तौर पर नियुक्त हुए। वो सुप्रीम कोर्ट से 26 अगस्त 2022 को रिटायर होंगे। वक़ालत का काम उन्होंने 10 फरवरी 1983 में शुरू किया। जिस दौरान चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री थे उस दौरान जस्टिस रमन्ना आंध्र प्रदेश सरकार के एडिशनल एडवोकेट जनरल हुआ करते थे।

किसान परिवार में जन्में एनवी. रमन्ना विज्ञान और क़ानून विषय में ग्रेजुएट हैं। इसके बाद उन्होंने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट, केंद्रीय प्रशासनिक ट्राइब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट में क़ानून की प्रैक्टिस शुरू की। राज्य सरकारों की एजेंसियों के लिए वो पैनल काउंसेल के तौर पर भी काम करते थे। 27 जून 2000 में वो आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में स्थायी जज के तौर पर नियुक्त किए गए।

इसके बाद साल 2013 में 13 मार्च से 20 मई तक वो आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ़ जस्टिस रहे। 2 सितंबर 2013 को उनका प्रमोशन हुआ और वो दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस बनाए गए। इसके बाद 17 फरवरी 2014 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जजों की लिस्ट में जस्टिस एसए बोबड़े के बाद जस्टिस रमन्ना दूसरे नंबर पर हैं।

कई अहम् फैसले

जस्टिस रमन्ना सुप्रीम कोर्ट के उस बेंच में शामिल थे, जिसने जम्मू और कश्मीर में इंटरनेट के निलंबन पर तत्काल समीक्षा करने का फैसला सुनाया था। वो उस ऐतिहासिक बेंच में भी शामिल रहे, जिसने देश के मुख्य न्यायाधीश के दफ्तर को राइट टू इंफॉर्मेशन ऐक्ट (आरटीआई) के दायरे में लाया।

देश में उच्च न्यायपालिका के सदस्यों की बहाली की प्रक्रिया के मुताबिक़, 'सुप्रीम कोर्ट का चीफ जस्टिस सबसे वरिष्ठ जज को बनाया जाना चाहिए जो इस पद पर नियुक्त होने के लिए फिट हो।' जस्टिस रमन्ना नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन भी हैं।

एक दिलचस्प क़िस्सा

बात साल 1981 की है जब जस्टिस रमन्ना नागार्जुन यूनिवर्सिटी में छात्र हुआ करते थे। यूनिवर्सिटी के पास कोई बस स्टॉप नहीं थी। इसी को लेकर यूनिवर्सिटी के छात्रों ने विरोध-प्रदर्शन किया जिसमें जस्टिस रमन्ना भी शामिल थे। कहा जाता है कि उस दौरान विरोध कर रहे छात्रों ने कुछ बसों में तोड़फोड़ भी की थी, जिनपर मुक़दमे दर्ज किए गए थे।

बाद में वो सुप्रीम कोर्ट के जज बने तब दो वकीलों ने उनके ख़िलाफ़ कोर्ट में एक याचिका दायर की जिसमें जस्टिस रमन्ना को सुप्रीम कोर्ट के जज के पद से हटाने की मांग की गई थी। वकीलों का आरोप था कि जस्टिस रमन्ना ने ये बात छिपाई कि बस में तोड़फोड़ के मामले में उनके ख़िलाफ़ आपराधिक मामला बना था। हालांकि इस याचिका को कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया और दोनों वकीलों पर जुर्माना भी लगा दिया।

विवादों में रहे रमन्ना

पिछले साल 2020 में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने जस्टिस रमन्ना पर आंध्र प्रदेश सरकार के प्रशासनिक कामकाज में दख़ल देने का आरोप लगाया था। उनपर आरोप था कि वो हाईकोर्ट की बैठकों को प्रभावित करते हैं। उनपर आरोप लगाए गए कि राज्य के मुख्यमंत्री रहे चंद्रबाबू नायडू के कार्यकाल में जस्टिस रमन्ना ने राज्य की अदालतों में न्यायिक नियुक्तियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐसा टीडीपी नेताओं के पक्ष में फैसले के लिए किया गया था जो कई भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे थे।

दरअसल जगनमोहन रेड्डी के इन आरोपों का स्रोत सुप्रीम कोर्ट में जज रहे जस्टिस चेलमेश्वर की एक चिट्ठी को माना जाता है। मार्च 2017 में में जस्टिस चेलमेश्वर ने एक चिट्ठी में जस्टिस रमन्ना और चंद्रबाबू नायडू के बीच करीबी रिश्ते का ज़िक्र किया था। उन्होंने कहा था कि ‘ये न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच ग़ैर-ज़रूरी नज़दीकी का सबसे बड़ा उदाहरण है। अपनी चिट्ठी में उन्होंने लिखा था कि अविभाजित आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति के बारे में एनवी रमन्ना की रिपोर्ट और पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की टिप्पणी में समानताएं थीं।

जस्टिस रमन्ना ने इन आरोपों पर क्या कहा ?

अंग्रेज़ी अख़बार इकोनॉमिक्स टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में जस्टिस एन.वी. रमन्ना ने इस मुद्दे पर बात की थी। अपने इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि, ‘देश के चीफ़ जस्टिस ने छह वकीलों पर मेरी राय मांगी थी जो मैंने किया। इससे आगे मेरे पास कहने के लिए कुछ नहीं है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों ने क्या राय दी है इसके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है।’

एक बार पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान जस्टिस एनवी रमन्ना ने कहा, ‘जजों पर झूठे आरोप लगा कर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। चूंकि आरोपों पर सफ़ाई देने का कोई रास्ता नहीं है इसलिए उन्हें आसानी से निशाना बनाया जा रहा है। ये ग़लत धारणा है कि रिटायर्ड जज शानो शौकत वाली ज़िंदगी जीते हैं।’

उन्होंने कहा था, 'मेरे अपने अनुभव से, मैं कह सकता हूं कि जजों की जिंदगी गुलाबों की सेज नहीं है। लोग जो सोचते हैं, सच्चाई उससे बहुत ही अलग होती है। मुझे लगता है कि मौजूदा समय में जज बनने के लिए दूसरे पेशे से कहीं ज्यादा त्याग की जरूरत पड़ती है और देश के भविष्य के लिए ऐसा करना पड़ता है, क्योंकि यह मज़बूती स्वतंत्र जजों पर ही निर्भर है।'

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