GoFlashback: अयोध्या का आख़री अध्याय

by M. Nuruddin 2 years ago Views 3963

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने खुद कहा, राम का जन्म कहां हुआ! नहीं पता

बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई चल रही है। 18 अक्टूबर की तारीख सीजेआई ने तय कर दी है। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों पर कोर्ट की शीर्ष कुर्सी पर बैठे सीजेआई रंजन गोगोई फैसला सुनाएंगे या नहीं ये आने वाला वक्त बताएगा। चलिये इस मामले की कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर नज़र डालते हैं।


साल 1992 में हुई बाबरी मस्जिद विध्वंश पर 2010 में इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था जिसमें कोर्ट ने, विवादित ज़मीन का तीन हिस्सों बंटवारा किया था। कोर्ट ने एक हिस्सा मुसलमानों को, एक हिस्सा निर्मोही अखाड़े को और एक हिस्सा राम लला के दावेदारों को दिया था। हालांकि इस फैसले पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत समेत उस वक्त के तत्कालीन गुजरात के सीएम रहे नरेन्द्र मोदी ने भी स्वागत किया था लेकिन मुस्लिम पक्ष इस फैसले से नाराज़ थे उन्होंने कोर्ट में अपना मालिकाना हक जताने के लिए अपील कर दी, जिसके बाद इस फैसले पर रोक लगा दी गई।
बाबरी मस्जिद विवाद की शुरूआत साल 1949 से होती है। उस दौरान हिंदू संगठनों ने कहा कि वहां कथित रूप से श्री राम की मूर्ती पाई गई है। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवारहलाल नेहरू ने देश का माहौल खराब होने की डर से विवादित ज़मीन पर ताला लगवा दिया। हिन्दू महासभा और दिगम्बर अखाड़ा ने 1950 में पहली याचिका फैज़ाबाद हाई कोर्ट में दायर की जिसके बाद ही आयोध्या, कांग्रेस समेत अन्य राजनीतिक दलों का राजनीतिक केन्द्र बन गया।

साल 1980 में गठित भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को लपक लिया और देश भर में रथ यात्रा की शुरुआत कर, मंदिर वहीं बनाएंगे जैसी आवाज़ें बुलंद करने लगे। 1984 के लोकसभा चुनाव में केवल दो सीटें हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी 1989 के आम चुनाव में 84 सीटें जीत कर एक मजबूत राजनीतिक दल के रूप में उभरी।

फरवरी 1987 को इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर के मुताबिक अटल बिहारी वाजपेयी ने बॉम्बे में एक सभा को संबोधित करते हुए मुस्लिम समुदाय से अपील की थी, कि वे बाबरी मस्जिद के विवादित ढांचे को हिंदू समुदाय के हाथों में सौंप दें, इस प्रकार बाबरी मस्जिद का ढांचा जैसा है, वैसा ही छोड़ दिया जाएगा और उस स्थान का हिंदू समुदाय के लोग पूजा करने में इस्तेमाल करेंगे।

राम का जन्म आखिर कहां हुआ?

The Babri Masjid: A Matter Of National Honour के लेखक A.G Noorani लिखते हैं कि, 1989 में अटल बिहारी वाजपेयी खुद ये स्वीकारते हुए नज़र आते हैं कि हज़ारों साल पहले भगवान राम का जन्म किस स्थान पर हुआ था इसका पता लगा पाना मुश्किल है लेकिन भगवान राम भारतीय इतिहास का हिस्सा हैं और विक्रमादित्या के समय से राम मंदिर मौजूद है, जिसका साल-दर-साल पुनर्निर्माण होता आया है। इतिहासकारों का भी मानना है कि राम का जन्म कब और किस स्थान पर हुआ इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है।

बाबारी मस्जिद का निर्माण 1528 में मीर बक़ी द्वारा करवाया गया था जो मुग़ल शासक बाबर के सिपाहसलाहकार थे। श्री राम की जीवनी लिखने वाले लेखक महर्षि वाल्मिकी ने अपनी रामायण में कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं किया कि राम का जन्म कब और किस स्थान पर हुआ था। राम भक्त गोस्वामी तुलसीदास, जिन्होंने रामायण की रचना की। उन्होंने अपनी किताब रामायण में इस बात का कहीं भी जिक्र नही किया कि बाबर ने राम की मंदिर को तुड़वाकर मस्जिद का निर्माण करवा दिया। साफ है कि हमारे नेता राम मंदिर की आड़ में अपनी राजनीति सेकने में लगे हैं और अंधभक्त लोग उनको समर्थन देने में।

आम चुनाव 1991

साल 1991 में लोकसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने आयोध्या को ही अपना एक मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया और मंदिर के मुद्दे को हवा दी जिस कारण सुलग रही आग जल उठी। इस मामले को उठाने का फायदा बीजेपी को कितना मिला ये साफ तौर पर ज़ाहिर होता है कि 1991 के आम चुनाव में बीजेपी ने 117 सीटों पर कब्ज़ा जमा लिया। लौह पुरूष माने जाने वाले लालकृष्ण आडवाणी ने खुद ये कहा कि, यदि वे राम मंदिर का मुद्दा नहीं उछालते तो दो सीटों पर रही भाजपा 117 सीटों की हक़दार कभी नहीं हो पाती।

फिर इस कड़ी की अंतिम घड़ी आ गई। 6 दिसंबर 1992, एक ऐसा दिन जब कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया। उस दिन अयोध्या ‘जय श्री राम’ के नारों से गूंज रहा था और सैकड़ों साल पुरानी मस्जिद पर चोट करती ठक-ठक की आवाजें हर तरफ सुनाई दे रही थीं। अगला दिन आते-आते वो आवाज़ें खामोशियों में तब्दील हो गई और देश में आने वाले तूफानों का संकेत देने लगी। आज तक उस तुफान से देश उभर नहीं पाया है। उस समय उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी।

विश्व हिंदू परिषद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया अपनी किताब सैफरोन रिफ्लेक्शन में लिखते हैं कि भाजपा ने राम मंदिर को लॉलिपॉप की तरह हिन्दुओं के सामने ये कहकर हिलाया है कि मंदिर आज बनेगा, मंदिर कल बनेगा लेकिन मंदिर अब तक नहीं बना, भाजपा ने हिन्दुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है। प्रवीण तोगड़िया मानते हैं कि भाजपा शुरू से ही राम मंदिर के मुद्दे को अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया है।

इन सब के बीच एक बात पर ध्यान देना काफी आवश्यक है कि देश में आर्थिक मंदी है, नौकरी की कमी है, शिक्षा व्यवस्था ठीक नहीं है, पीने का स्वच्छ पानी नहीं है, मुद्दे ये होने चाहिये या मंदिर-मस्जिद, सर्जिकल स्ट्राइक या देशभक्ति? भारत के लोगों में ये जानकारी बढ़ाना ज़रूरी है कि धार्मिक ध्रुविकरण के मुद्दे राजनीति चमकाने में मदद करते हैं, लोगों की किस्मत चमकाने में नहीं।

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