9/11 आतंकी हमले की पूरी कहानी, 'जब दहल उठा था अमेरिका'

by M. Nuruddin 1 year ago Views 3188

Full story of 9/11 terror attack, 'When America Sh
11 सितंबर 2001 का वो दिन जब अमेरिकी इतिहास में पहली बार कोई बड़ा आतंकी हमला हुआ। दुनिया की सबसे ऊंची इमारतों में शुमार वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में करीब 18 हजार कर्मचारी रोजमर्रा का काम निपटाने में जुटे थे। मगर आधे घंटे के भीतर दो विमान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से आकर टकराई और बिल्डिंग आग के गोले में तब्दील हो गई जिसमें हज़ारों लोग मारे गए। उस आतंकी हमले से अमेरिका को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ। बाज़ार ठप्प हो गए और हज़ारों लोगों की रोज़ी-रोटी चली गई।

11 सितंबर का वो दिन, किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि सुपरपॉवर अमेरिका को भी आतंकी चुनौती देने की कोई हिमाकत कर सकता है। मगर उस दिन 19 आतंकियों ने चार विमान हाइजैक किए और फिर सुनियोजित ढंग से अमेरिका को धमाकों से दहला दिया। बताया जाता है कि पहला विमान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के उत्तरी टॉवर से टकराया तब लोगों को लगा कि यह एक हादसा है लेकिन कुछ ही देर में दूसरे विमान ट्रेड सेंटर के दक्षिणी टॉवर से आ टकराई। तब लोगों को अहसास हुआ कि यह हादसा नहीं बल्कि बड़ा आतंकी हमला है। टॉवर में काम कर रहे लोगों में चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोग बदहवास होकर जान बचाने के लिए दौड़ पड़े।


हमले का सिलसिला यहीं नहीं थमा, ट्रेड सेंटर पर हमले के बाद 9 बजकर 47 मिनट पर वाशिंगटन स्थित रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन पर भी हमले की घटना समाने आई। विमान के टकराने से पेंटागन का भी एक हिस्सा ढह गया। चौथा विमान कुछ ही देर बाद पीटसबर्ग हवाई अड्डे के नज़दीक एक खेत में गिरने से क्रैश हो गया। अटकलें हैं कि यह विमान व्हाइट हाउस की तरफ जा रहा था। इस हमले में तीन हज़ार लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।

रिपोर्ट बताते हैं कि इस हमले में अमेरिकी सहित 90 देशों के लोग मारे गए। इस हमले की ज़िम्मेदारी आतंकी संगठन अलक़ाइदा ने ली। हालांकि बाद में मई 2011 की एक सैन्य कार्रवाई में अमेरिका ने अलक़ायदा के संस्थापक ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में मार गिराया था।

हालांकि सालों से चल रही जांच में अमेरिका ने सऊदी अरब पर अलक़ायदा को फंडिंग करने का आरोप लगाया। पिछले साल सितंबर 2019 में पीड़ित परिवार को दिए अपने जवाब में अमेरिकी रक्षा विभाग ने ट्रेड सेंटर पर हमले के लिए सऊदी अरब को ज़िम्मेदार ठहराया था। मामले में जांच कर रही एफबीआई या फेडरल ऑफ ब्यूरो इन्वेस्टिगेशन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि विमान हाइजैक करने वाले 19 लोगों में 15 सऊदी अरब के थे। हमले में जांच की एक आधिकारिक रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि विमान हाइजैक करने वालों को सऊदी अरब की तरफ से फंडिंग की गई।

साल 2002 में आई एक आधिकारिक रिपोर्ट में अमेरिका का आरोप था कि हमले में दो आरोपी सऊदी इंटेलिजेंस एजेंसी के एजेंट हैं और उन्होंने ही हमले की साज़िश रची। हालांकि कई जांच रिपोर्टों में अमेरिका के इस आरोप को ख़ारिज किया गया है लेकिन साल 2012 में एफबीआई ने अपनी एक रिपोर्ट फिर सऊदी अरब पर आरोप लगाया लेकिन इस बार हमले की ज़िम्मेदारी किसी तीसरे शख़्स पर थोपी गई जिसका नाम सार्वजनिक नहीं किया गया।

बता दें कि साल 11 सितंबर 2001 को हुए आतंकी हमले से अमेरिकी अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। इंस्टीट्यूट ऑफ द अनालिसिस ऑफ ग्लोबल सिक्योरिटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि हमले की वजह से अमेरिका को दो ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ। इनमें न्यू यॉर्क शहर को करीब 95 अरब डॉलर, एयर ट्रैफिक रेवेन्यू को दस अरब डॉलर, पेंटागन की बिल्डिंग को एक अरब डॉलर का नुकसान हुआ था।

हमले के 19 साल बाद भी इससे उपजी वैश्विक संकट बना हुआ है। अलक़ायदा के कमज़ोर होने के बाद आईएसआईएस ने आतंकवाद का परचम उठा लिया और पूरे यूरोप को अपने गुस्से का शिकार बनाया। न्यूज़ीलैंड जैसे शांत देश भी इसकी चपेट में आए। इसका हर्जाना दुनियाभर में मुस्लिम समुदायों को भरना पड़ रहा है क्योंकि चरमपंथी राजनेताओं ने मुसलमानों को निशाना बनाकर सत्ता हासिल करना शुरु कर दिया है।

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