Cryptocurrency के लिए पेश होंगे विधेयक लेकिन सरकार का रुख अब भी साफ नहीं !

by GoNews Desk 1 week ago Views 1522

crypto ban in india

दुनियाभर के कई देशों ने क्रिप्टोकरेंसी को लीगल कर दिया है। हालांकि भारत ने क्रिप्टो को लेकर अभी तक अपना रुख साफ नहीं किया है। यही वजह है कि कैबिनेट मीटिंग के बाद केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर से इस सिलसिले में पूछे जाने पर कोई जवाब नहीं मिला।

जबकि केन्द्र सरकार ने मंगलवार को ऐलान किया था कि देश में क्रिप्टोकरेंसी के रेगुलेशन के लिए आगामी संसद के शीत सत्र में Cryptocurrency and Regulation of Official Digital Currency Bill, 2021 को पेश किया जाएगा। 

क्रिप्टो को रेगुलेट करने के लिए विधेयक !

इस मामले में एक आधिकारिक नोटिफिकेशन के मुताबिक़ विधेयक में आरबीआई के ज़रिए क्रिप्टो को लेकर एक फ्रेमवर्क तैयार करने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही इस विधेयक में निजी क्रिप्टोकरेंसी को बैन करने के प्रावधान भी जोड़े गए हैं।

इसी साल जून महीने में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा था कि रिज़र्व बैंक क्रिप्टोकरेंसी यूजर्स के बैंकिंग एक्सेस पर रोक नहीं लगा सकता है क्योंकि उसके पास ऐसा करने के लिए कोई विधायी ढांचा नहीं है। माना जा रहा है कि इस बाधा को दूर करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है।

दुनिया में भारत सबसे ज़्यादा क्रिप्टो यूज़र्स वाला देश !

ग़ौरतलब है कि क्रिप्टो लीगल नहीं होने के बावजूद भारत दुनिया में सबसे ज़्यादा क्रिप्टो यूज़र्स वाला देश है। एक रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत उन टॉप पांच देशों में शामिल है जहां तेज़ी से क्रिप्टो को अपनाया जा रहा है। उधर 15 नवंबर को पार्लियामेंट स्टैंडिग कमेटी के सदस्यों ने क्रिप्टोकरेंसी के शेयरधारकों के साथ हुई मीटिंग में कहा कि ‘क्रिप्टो को बैन नहीं किया जा सकता है।’

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ कई शेयरधारक और इंडस्ट्री एसोसिएशन इस डिजिटल करेंसी पर कुछ नियम चाहते हैं लेकिन वह यह तय नहीं कर पाए हैं कि क्रिप्टोकरेंसी की निगरानी किसके हाथ में दी जाए। खुद सरकार भी इसे लेकर जवाब नहीं दे पाई है।

मसलन केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर से क्रिप्टो के ज़रिए टेरर फाइनेंसिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के ख़तरे को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा- क्रिप्टो से युवा बर्बाद हो जाएंगे !

केन्द्र, ख़ासकर देश के प्रधानमंत्री ने अपनी टिप्पणियों में क्रिप्टो को एक ख़तरे की तरह पेश किया है। पीएम ने सिडनी के एक थिंक टैंक को दिए संबोधन में कहा था कि क्रिप्टोकरेंसी फायदेमंद है लेकिन ग़लत हाथों में पड़ने से यह युवाओं को बर्बाद कर सकती है। किसी भी स्पष्टता के अभाव के बीच भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर कई अनुमान लगाए जा रहे हैं।

चीन का क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध

पड़ोसी देbitcoiश चीन ने सितंबर में क्रिप्टो को अवैध घोषित कर दिया था। ऐसे में कयास लग रहे हैं कि क्या भारत भी चीन की तरह डिजिटल करेंसी पर पूरी तरह क्रैकडाउन करेगा या फिर चीन में बैन होने के बाद वो क्रिप्टो में अपना फायदा तलाशेगा। उधर सरकार के बिल के ऐलान के बाद भी कई संभावनांए जताई जा रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ सरकार डार्क वेब पर चलने वाले ZCash और Monero जैसी क्रिप्टोकरेंसी नकेल कस सकती है लेकिन बिटकॉइन और इथेरियम जैसे बड़े और चर्चित डिजिटल करेंसीज़ को इन नियमों से बाहर रखा जा सकता है। 

कई रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि सरकार विधेयक के ज़रिए फेसबुक की ई-करेंसी ‘Diem’ को नियंत्रित करना चाहती है। क्रिप्टोकरेंसी के नियमन या रेगुलेशन के समर्थकों का कहना है कि छोटे शहरों में इसका इस्तेमाल आंतकवाद और दूसरी अवैध गतिविधियों में हो सकता है जबकि क्रिप्टो रेगुलेशन के विरोधियों का कहना है कि करेंसी को लेकर सरकार की अस्पष्टता से निवेशकों को बड़ा नुकसान हो सकता है।

इसका एक नमूना यह है कि भारत में क्रिप्टोकरेंसी के बैन होने की खबर आते ही बिटकॉइन और टीथर जैसी डिजिटल करेंसी की वेल्यू काफी नीचे गिर गई। इस बात को लेकर भी बहस हो रही है कि बैन लगाने के बाद क्रिप्टो भारतीय बाज़ार से गायब नहीं होगी बल्कि दूसरे अवैध व्यापारों की तरह यह ब्लैक मार्केट में शिफ्ट हो जाएगी और डिजिटल करेंसी से पैदा होने वाली संभावित नौकरियों को भी नुकसान होगा।

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