भारतीय जेलों में बंद 'विदेशी' बढ़े, पहले नंबर पर बांग्लादेश और दूसरे पर नाइजीरिया के क़ैदी

by Siddharth Chaturvedi 10 months ago Views 2787

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड (एनसीआरबी) ब्यूरो के 2019 के आँकड़ों के अनुसार देश की जेलों में 5,608 विदेशी कैदी हैं। इनमें से आधे से ज़्यादा विचाराधीन हैं।

Foreigners in Indian jails increased, Bangladesh a
भारतीय जेलों में बंद विदेशी नागरिकों की तादाद बीते दो सालों में बढ़ गयी है। अलग-अलग अपराधों में गिरफ्तार किए गए ये क़ैदी कई देशों के हैं। सरकारी आँकड़ों के मुताबिक भारतीय जेलो में बंद सबसे ज़्यादा विदेशी क़ैदी बांग्लादेश से हैं। हालाँकि पाँच सालों के आँकड़े विदेशी क़ैदियों की तादाद में कमी का इशारा करते हैं।


नेशनल क्राइम रिकॉर्ड (एनसीआरबी) ब्यूरो के 2019 के आँकड़ों के अनुसार देश की जेलों में 5,608 विदेशी कैदी हैं। इनमें से आधे से ज़्यादा विचाराधीन हैं। सबसे ज्यादा कैदी बांग्लादेश के हैं। इसके बाद नेपाल और म्यांमार का नंबर आता है। एनसीआरबी के अनुसार 2019 के अंत में 832 महिलाओं सहित कुल 5,608 विदेशी कैदी भारतीय जेलों में बंद थे। इनमें से 2,171 (38.71%) दोषी करार दिया जा चुके थे, 2,979 (53.12%) विचाराधीन थे और 40 (0.71%) हिरासत में थे।

सबसे ज़्यादा विदेशी क़ैदी पश्चिम बंगाल की जेलों में हैं जहाँ कुल 2316 क़ैदी बंद हैं। उसके बाद नाम आता है महाराष्ट्र का जहाँ 517 क़ैदी बंद हैं। और तीसरे नम्बर पर है उत्तर प्रदेश जहाँ 505 क़ैदी बंद हैं। भारत की जेलों में सबसे ज्यादा विदेशी कैदी (3770) बांग्लादेश से हैं, उनमें से अधिकांश बंगाल की जेलों में हैं। भाषा और भोजन के मामले में ऐसे कैदियों को कम परेशानियां होंगी, लेकिन गैर दक्षिण एशियाई जैसे- अफ्रीका और यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के कैदियों को भारतीय भोजन और भाषाई अवरोध से दिक्कतें होती हैं। गोवा की जेल में बंद जापानी कैदी हों या बिहार की जेल में बंद चीनी या फिर दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद नाइजीरियाई कैदी, सभी के लिए भारत का आहार एक मुख्य मुद्दा है।

इस रिपोर्ट के अनुसार दोषी क़रार दिये गये कुल 2,171 विदेशी क़ैदियों में 1,867 पुरुष और 304 महिलाएं हैं। अगर राज्यों की बात करें तो पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा 1379 दोषी क़रार दिये गये क़ैदी जेल में हैं। कुल 2,171 दोषी साबित विदेशी क़ैदियों में से 1,470 बांग्लदेशी हैं, 228 नेपाली, 155 म्यांमार से हैं और 125 नाइजीरिया से हैं।

विचाराधीन विदेशी क़ैदियों की कुल संख्या 2,979 है और इनमें भी सबसे ज़्यादा मामले पश्चिम बंगाल (576) में है, उसके बाद महाराष्ट्र (466) और फिर आता है दिल्ली (384)। कुल 2,979 विचाराधीन क़ैदीयों में से 1043 बांग्लदेशी हैं, 686 नाइजीरिया से हैं, 517 नेपाली और 146 म्यांमार से हैं।

वैसे बीते पाँच सालों के आँकड़ों पर नज़र डालें तो देश की जेलों में विदेशी कैदियों की संख्या घटी नज़र आती है। वर्ष 2014 में कुल विदेशी क़ैदियों की संख्या 6733 थी जो घटकर साल 2015 में 6620 पर आ गई। वहीं 2016 में यह संख्या और गिरकर 6370 पर आ गई पर सबसे ज़्यादा अंतर साल 2017 में आया जब यह आँकड़ा 4917 पर पहुँच गया। आँकड़ों के मुताबिक पिछले दो सालों से यह आँकड़ा वापस ऊपर चढ़ना शुरू हो गया है। 2018 (5168) और 2019 (5608) में यह बढ़ोतरी दिखती है, पर वर्ष 2014-2019 के दौरान विदेशी क़ैदियों की संख्या में 16.7 फीसदी की कमी आई है।

अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया समेत तमाम देश भारत सरकार से शिकायत करते रहे हैं कि भारतीय जेलों में बंद उनके देश के नागरिकों को तमाम तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन देशों ने अपने दूतावासों के माध्यम से सरकार को कैदियों को सहूलियतें पहुंचाने के बारे में तमाम सुझाव भी दिए।

ताज़ा वीडियो