मध्य प्रदेश: 'पैसा नहीं, पर्यावरण' हीरे के लिए 2.15 लाख पेड़ काटे जाने का विरोध

by GoNews Desk 1 year ago Views 1820

For Diomonds, 2.15 lakh trees will be cut and remo
पैसा नहीं, पर्यावरण। मध्य प्रदेश में इसी तरह के एक मुहिम की शुरुआत हुई है। राज्य के छतरपुर ज़िले में हीरा खनन के लिए दो लाख 15 हज़ार पेड़ काटने का विरोध हो रहा है। स्थानीय लोगों और ख़ासतौर पर युवा अलग-अलग सोशल मीडिया माध्यमों के ज़रिये मुहिम छेड़कर बिरला समूह के इस प्रोजेक्ट को रोके जाने की अपील कर रहे हैं। 

इसके लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को चिट्ठी भी लिखी गई है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी एक पीआईएल दाखिल की गई है, जिसपर ख़बर लिखे जाने तक सुनवाई नहीं हुई है। 


दरअसल, राज्य के छतरपुर ज़िले में 20 साल पहले एक सर्वेक्षण किया गया था जिसमें 3.42 करोड़ कैरेट हीरा मिलने का अनुमान जताया गया था। हाल ही में आदित्य बिरला समूह को इसके लिए 382 हेक्टेयर क्षेत्र पचास साल की लीज पर दिया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत 62.64 हेक्टेयर ज़मीन में खनन किया जाना है।

बाकी तकरीबन 200 हेक्टेयर क्षेत्र का खनन के दौरान इस्तेमाल किया जाना है। इस पर कंपनी तकरीबन 2500 करोड़ रुपए खर्च करेगी। वन विभाग के मुताबिक इतने क्षेत्र में 215,875 पेड़ लगे हैं। चालीस हजार पेड़ कीमती सागौन के हैं, जिसकी एक पेड़ की कीमत 20 हज़ार या उससे ज़्यादा होती है। इन सभी पेड़ों को काटा जाना है।

बकस्वाहा क्षेत्र में जहां पर सबसे अधिक हीरा होने का दावा है, वहां पर घना जंगल है। यहां नाले के दोनों ओर सागौन, अर्जुन, शीशम, जामुन, बेल, पीपल, तेंदू, बहेरा समेत अन्य औषधीय और जीवन उपयोगी पेड़ लगे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में अर्जुन के करीब 10-12 हज़ार पेड़ हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ यहां 382.131 हेक्टेयर जमीन में घना जंगल है। इस जंगल में कई विलुप्त प्रजाति के जानवर भी मिलते हैं जिनका जीवन जंगल काटे जाने से ख़तरे में पड़ जाएगा।

ग़ौरतलब है कि मई 2017 में पेश की गई जियोलॉजी एंड माइनिंग मध्य प्रदेश और रियोटिंटो कंपनी की रिपोर्ट में बताया गया था कि यहां के जंगल में तेंदुआ, बाज (वल्चर), भालू, बारहसिंगा, हिरण, मोर पाए जाते हैं लेकिन नई रिपोर्ट में इस दावे को ख़ारिज कर दी गई है और इलाके में संरक्षित वन्यप्राणी का बसेरा नहीं होने का दावा किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक़ वन विभाग अधिकारियों का कहना है कि हीरा खदान में जंगल काटने के बदले 382 हेक्टेयर राजस्व भूमि को वन भूमि में परिवर्तित किया जा रहा है, इस भूमि पर ही जंगल विकसित किया जाएगा, इसका पूरा खर्च खनन करने वाली कंपनी ही उठाएगी। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

इनके अलावा स्थानीय विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी का कहना है कि इस प्रोजेक्ट में एक पेड़ काटने के बदले 15 पेड़ लगाए जाएंगे, सरकार को रॉयल्टी मिले इसके लिए यह ज़रूरी हैं।

हालांकि विरोध करने वाले लोग और युवा इसे नाकाफी बता रहे हैं, उनका कहना है कि हाल ही में रायसेन ज़िले में दो पेड़ काटने के बदले एक युवक पर एक करोड़ रुपए से ज़्यादा का जुर्माना लगाया गया। जब वन विभाग इन पेड़ों को इतना मूल्यवान मान रहे हैं तो यहां लाखों पेड़ काटने की अनुमति कैसे दे सकते हैं ?

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