महामारी में कम सड़क दुर्घटनाएं लेकिन मौतों की दर ज़्यादा- Report

by M. Nuruddin 9 months ago Views 1162

कोविड लॉकडाउन के बावजूद, दुर्घटनाओं में औसतन हर दिन 328 लोगों की जान गई...

Road accidents kill four lakh in three years, avg
साल 2020 के दौरान कोरोना महामारी में रोड एक्सिडेंट की संख्या घट गई है। संसद सत्र के दौरान मिनिस्ट्री ऑफ रोड, ट्रांसपोर्ट एंड हाइवे ने बताया था कि महामारी के दौरान भारत में कुल 3,66,138 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई। इस दौरान 131,714 लोगों की मौत हो गई, जिसमें पिछले साल के मुक़ाबले 12.5 फीसदी की कमी देखी गई है। 

हालांकि अगर डेटा का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि प्रति 100 दुर्घटनाओं में मौतों की संख्या बढ़ी है। महामारी के दौरान प्रति 100 दुर्घटनाओं में 36.1 मौतें दर्ज की गई गई है। मसलन महामारी से पहले साल 2019 में सड़क दुर्घटनाओं में 151,113 लोगों की मौत हुई थी और इस दौरान प्रति 100 दुर्घटनाओं में 33.7 मौतें दर्ज की गई। 


इससे पहले 2018, 2017 और 2016 में यह दर क्रमश: 32.4, 31.8 और 31.4 दर्ज किए गए थे। विश्लेषण से पता चलता है कि प्रति 100 दुर्घटनाओं में मौतों की दर लगातार बढ़ रही है।

दूसरी तरफ गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले एनसीआरबी ने अपनी नई रिपोर्ट में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के आंकड़े और भी कम दिए हैं। एनसीआरबी के मुताबिक़ लॉकडाउन के दौरान देशभर में सड़क दुर्घटनाओं में मौतों के 1.2 लाख मामले दर्ज किए गए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़, कोविड लॉकडाउन के बावजूद, दुर्घटनाओं में औसतन हर दिन 328 लोगों की जान गई।

सड़क दुर्घटनाओं में मौतें- NCRB

नेश्नल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने 2020 के लिए जारी अपनी वार्षिक 'क्राइम इंडिया' रिपोर्ट में खुलासा किया कि सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित लापरवाही की वजह से होने वाली मौतों में तीन साल में 3.92 लाख लोगों की जान गई है। आंकड़ों से पता चलता है कि 2019 में यह आंकड़ा 1.36 लाख और 2018 में 1.35 लाख था।

“हिट एंड रन”

केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले एनसीआरबी की रिपोर्ट से पता चलता है कि 2018 से देश में "हिट एंड रन" के 1.35 लाख मामले दर्ज किए गए हैं। अकेले 2020 में, "हिट एंड रन" के 41,196 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2019 में 47,504 और 2018 में यह आंकड़ा 47,028 रहा था।

आंकड़ों के मुताबिक़, पिछले एक साल में देश भर में हर दिन औसतन "हिट एंड रन" के 112 मामले सामने आए। सार्वजनिक रास्ते पर तेज गति से या लापरवाही से वाहन चलाने से “घायल” लगने के मामले 2020 में 1.30 लाख दर्ज किए गए थे।

रेल दुर्घटनाओं में मौतें

एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि कोविड और लॉकडाउन के दौरान रेल एक्सिडेंट की वजह से 52 लोग मारे गए। डेटा विश्लेषण के मुताबिक़ 2019 में रेल एक्सिडेंट में मौतों के 55 और 2018 में 35 मामले दर्ज किए गए थे। इनके अलावा मेडिकल लापरवाही की वजह से 133 लोग मारे गए। इससे पहले 2019 में यह मामले 201 और 2018 में 218 दर्ज किए गए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक़, 2020 में "नागरिक निकायों की लापरवाही की वजह से” मौतों के 51 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2019 में 147 और 2018 में 40 मामले दर्ज किए गए थे। एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि अन्य लापरवाही की वजह से भी मौतें हुई है। जैसे किसी ज़रूरतमंद की मदद ने करने की वजह से 2020 में 6,367 लोगों की मौत हो गई। इससे पहले 2019 में यह आंकड़ा 7,912 और 2018 में 8,687 रहा था।

एनसीआरबी ने रिपोर्ट में बताया कि देश में 25 मार्च, 2020 से 31 मई, 2020 तक कोविड-19 महामारी की वजह से पूर्ण लॉकडाउन रहा, जिस दौरान सार्वजनिक स्थान पर आवाजाही "बहुत सीमित" थी। इस दौरान सरकारी अधिकारी द्वारा जारी आदेश का पालन नहीं करने की वजह से आईपीसी की धारा 188 के तहत बेतहाशा मामले दर्ज किए गए। इस दौरान स्टेट लोकल एक्ट के तहत लाखों मामले दर्ज किए गए।

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