खाद के दाम बढ़े, "किसानों पर सालाना 20 हज़ार करोड़ का अतिरिक्त बोझ"

by GoNews Desk 6 months ago Views 1703

"सरकार किसानों को अपना दुश्मन मानती है और उन्हें ग़ुलाम बनाना चाहती है..."

Fertilizer prices rise, "additional burden of 20 t
"केन्द्र सरकार के फैसले से किसानों पर सालाना अतिरिक्त 20 हजार करोड़ रुपये का बोझ डाला गया है।" कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला का ये बयान तब आया है जब खाद कंपनियों ने खाद की कीमतें बढ़ा दी है। खेती में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाले डायअमोनियम फॉस्फेट या डीएपी का 50 किलोग्राम को जो बैग 1200 रूपये में मिल रहा था उसके दाम बढ़ाकर अब 1900 रूपये कर दिए गए हैं।

इनके अलावा एन-पी-के या नाइट्रोजन-फॉस्फोरस-पोटैशियम का जो रेशियो खेती में इस्तेमाल होता है उसकी कीमतों में भी ज़बरदस्त बढ़ोत्तरी कर दी गई है। पहले 1175 रुपए में मिलने वाला नाइट्रोजन का बैग अब 1775 रुपए में मिलेगा, फॉस्फोरस का बैग जो पहले 1185 रुपए में मिलता था वो अब 1800 रुपए में मिलेगा, पोटाश का बैग जो पहले 925 रुपए का था अब 1350 रुपए का मिलेगा।


देश की फर्टीलाइज़र कंपनी इफ्फको ने 7 अप्रैल को एक नोटिफिकेशन जारी कर बढ़े हुए दाम की जानकारी  दी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इसके प्रवक्ता ने कहा था कि ग़ैर-यूरिया खाद के दाम पहले से डी-कंट्रोल हैं यानी इनके दाम बाजार भाव के हिसाब से तय होते हैं। प्रवक्ता ने कहा कि दामों में इन बढ़ोत्तरी का किसी राजनीतिक दल या सरकार से लेना देना नहीं है।

बताया जाता है कि खाद के दामों में की गई यह बढ़ोत्तरी हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद के दामों में आई तेजी के कारण हुई है। अक्टूबर में डीएपी के दाम 400 डॉलर प्रति टन थे जो बढ़कर 540 डॉलर प्रति टन हो गए हैं। कहा जा रहा है कि इसी तरह अमोनिया और सल्फर के दामों में भी बढ़ोत्तरी हुई है।

इतना ही नहीं देश के किसान डीज़ल की बढ़ी हुई कीमतों से भी परेशान हैं। इसका सीधा असर खेती की लागत पर पड़ा है। किसान कहते हैं कि पहले की तुलना में खेती डेढ़ गुना महंगी हो गई है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो खेती छोड़नी पड़ेगी। पिछले साल केन्द्र ने एक्साइज़ ड्यूटी बढ़ा दी थी जिससे डीज़ल के दाम प्रति लीटर के हिसाब से 19 रूपये से ज़्यादा बढ़ गए थे।
जानकार बताते हैं कि खेती पर लागत बढ़ने का सीधा असर बाज़ार में आने वाले अनाज, फल और सब्ज़ियों पर पड़ेगा। इसका मतलब है कि किसान के साथ-साथ आम लोगों की जेब पर इसका असर पड़ना तय है।

खाद की कीमतें बढ़ाने को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस किया। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि इससे किसानों पर 20 हज़ार करोड़ रूपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। उन्होंने सरकार पर किसानों से बदला लेने और उन्हें 'गुलाम' बनाने का आरोप लगाया।

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