भारत में संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका, विशेषज्ञों ने क्या कहा?

by GoNews Desk 1 year ago Views 3444

third wave

भारत में कोरोना की दूसरी लहर का प्रभाव कम हो गया है लेकिन अब देश में संक्रमण की तीसरी लहर की दस्तक की बात कही जा रही है। समाचार एजेंसी ऱॉयटर्स के कराए गए मेडिकल एक्सपर्ट के सर्वे में भारत में तीसरी लहर के अक्टूबर तक आने की संभावना जताई गई है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ये लहर पिछली लहर की तुलना में ज़्यादा नियंत्रित होगी और इससे ज़्यादा तैयारियों के साथ निपटा जा सकेगा। सर्वे में भाग लेने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी अभी एक साल और लोगों को परेशान करेगी। 

जून 3-17 के बीच किए गए स्नैप सर्वे में दुनिया भर के 40 स्वास्थ्य विशेषज्ञों, डॉक्टर, वैज्ञानिकों, महामारी विशेषज्ञों और वॉयरोलॉजिस्ट ने भाग लिया। सर्वे में भाग लेने वाले 24 में से 21 एक्सपर्ट ने भारत में अक्टूबर में तीसरी लहर की संभावना जताई है जबकि दो का कहना है कि थर्ड वेव अगस्त या 12 सिंतबर तक दस्तक दे सकती है जबकि अन्यों ने इसके नवंबर से फरवरी के बीच आने का अनुमान लगाया है हालांकि 34 में से 24 विशेषज्ञों ने तीसरी लहर के ज़्यादा बहतर तरीके से नियंत्रित होने पर सहमति जताई है।

उनका कहना है कि आने वाली लहर से पिछली लहर के मुकाबले बहतर तरीके से निपटा जा सकेगा। भारत में महामारी की सेकेंड वेव के दौरान ऑक्सीजन, कोरोना रोधी टीकों और आईसीयू बेड की भार कमी देखी गई थी हालांकि आने वाली लहर में मेडिकल उपकरणों की कमी होने की संभावना कम है। 

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान प्रमुख डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा, "इसे और अधिक नियंत्रित किया जा सकेगा, अधिक टीकाकरण शुरू किए जाने और दूसरी लहर से कुछ हद तक प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्राप्त होने से मामले बहुत कम होंगे।" सर्वे में भाग लेने वाले अन्य वैज्ञानिकों ने भी कहा कि उच्च स्तर पर किया गया टीकाकरण नए मामलों में कुछ कमी ला सकता है।

बता दें कि भारत में अभी तक सिर्फ 5 फीसदी आबादी का ही टीकाकरण किया गया है जबकि इसकी 95 करोड़ जनता टीकाकरण के योग्य है। वहीं स्वास्थ्य विशषज्ञों का मानना है कि राज्यों में लॉकडाउन में दी गई ढील के चलते इस साल टीकाकरण में तेज़ी आने की संभावना है। 

सर्वे में भाग लेने वाले विशेषज्ञों के लगभग दो-तिहाई हिस्से ने माना है कि तीसरी लहर के प्रति बच्चें अधिक संवेदनशील होंगे।  40 में से 26 एक्सपर्ट का मानना है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है। इसके पीछे की वजह टीकाकरण को बताया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि मौजूदा समय में बच्चों के लिए कोई भी वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में उनके पास संक्रमण से कोई सुरक्षा कवच मौजूद नही है हालांकि कुछ ऐसे भी शोध हैं जिनमें बच्चों के व्यस्कों से अधिक प्रभावित होंने की बात को नकारा गया है।

हाल ही में एम्स और विश्व स्वास्थ्य संगठन के किए गए शोध में कहा गया है कि इसके प्रमाण नहीं है कि संभावित तीसरी लहर बच्चों को अलग तरीके से प्रभावित करेगी क्योंकि बच्चों में भी व्यस्कों के समान स्तर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मौजूद है। इसके अलावा कुल मिलाकर बड़ी संख्या में लोगों ने संक्रमण के खिलाफ सुरक्षा प्राप्त कर ली है। 


रॉयटर्स के सर्वे में भाग लेने वाले  11 एक्सपर्ट्स ने कहा कि संक्रमण कम से कम एक साल के लिए लोगों  को प्रभावित करना जारी रखेगा जबकि 15 वैज्ञानिकों ने संक्रमण के 2 साल से कम और 13 ने महामारी के 2 साल से अधिक मौजूद रहने की संभावना जताई है। वहीं 2 विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण कभी भी खत्म नहीं होगा।

सर्वे में भाग लेने वाले 38 वैज्ञानिकों में से 25 ने कहा कि कोरोना संक्रमण के भविष्य में विकसित वेरिएंट्स पहले विकसित की जा चुकी कोविड रोधी वैक्सीन की प्रभावकारिता को खत्म नहीं करेंगे। 

कुछ प्रोजेक्शंस बताती हैं कि संभावित तीसरी लहर महाराष्ट्र को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। महाराष्ट्र सरकार की कोविड19 के खिलाफ बनाई टास्क फोर्स का कहना है कि राज्य गंभीर रूप से थर्ड वेव की चपेट में आ सकता है।

इसका कारण हाल ही में पाया गया कोरोना का डेल्टा प्लस वेरिएंट होगा जिसके चलते महाराष्ट्र में सक्रिय मामलों की संख्या 8 लाख तक हो सकती हैं। संभावित तीसरी लहर पर सरकार का कहना है कि तीसरी लहर का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या कोरोना और इसके नए वेरिएंट को लोगों को संक्रमित करने का कितना मौका मिल रहा है।

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