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किसानों को प्रदर्शन का हक़ लेकिन मक़सद बातचीत हो, दूसरों के नागरिक अधिकार बाधित न करें - सुप्रीम कोर्ट

by M. Nuruddin 4 months ago Views 1086

सीजेआई ने यह भी कहा कि अहिंसक प्रदर्शन जारी रह सकता है और साथ ही सीजेआई ने केन्द्र सरकार से कहा कि ‘आप हिंसा नहीं भड़कायेंगे।’

Farmers should have the right to protest but the p
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसानों के विरोध प्रदर्शन के अधिकार है लेकिन अनंतकाल तक धरना-प्रदर्शन नहीं चल सकता। विरोध का उद्देश्य बातचीत होना चाहिे ताकि कोई हल निकल सकते। चीफ़ जस्टिस एस.ए.बोबडे ने 1997 में बोट क्लब के पास हुए किसान आंदोलन का ज़िक्र किया जिसका कुछ रिज़ल्ट नहीं निकला था और यूनियनों में दरार पैदा होने से आंदोलन नाकायाब साबित हुआ था।

दिल्ली बार्डर पर चल रहे धरना-प्रदर्शन से लोगों को हो रही परेशानियों के ज़िक्र के साथ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएँ दायर हुई हैं जहाँ आज लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई। कोर्ट ने किसान संगठनों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि तब तक कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता जबतक किसान संगठनों की बात न सुन ली जाये। कोर्ट ने मामले की सुनवाई तक क़ानून लागू नहीं किए जाने को लेकर केन्द्र से भरोसा मांगा जबकि अटॉर्नी जनरल ने इसे मुश्किल बताया।


सीजेआई एसए बोबड़े ने कहा, ‘आपको (किसानों) विरोध करने का आधिकार है जिसपर हम हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं। आप अपना विरोध जारी रखिये लेकिन इसका उद्देश्य बातचीत होना चाहिए। आप सालों-साल तक धरना प्रदर्शन नहीं कर सकते।

सुप्रीम कोर्ट में भारतीय किसान यूनियन

कोर्ट में भारतीय किसान यूनियन (भानु) के वकील ने कहा कि तालाबंदी के दौरान, सिर्फ किसानों ने ही देश में भुखमरी रोकने में मदद की न कि मल्टिनेशनल कंपनियों ने। भानु गुट के वकील ने कहा कि हम ‘कृषि प्रधान’ देश में रह रहे हैं न कि ‘मल्टीनेशनल प्रधान’ देश में। इसपर सीजेआई ने कहा, ‘शिकायत यह है कि अगर आप रोड को ब्लॉक करेंगे तो दिल्ली के लोग भूखे रह जाएंगे।’ सीजेआई ने कहा, ‘हम किसानों की दुर्दशा जानते हैं। हम भारतीय हैं। हम किसानों के हमदर्द हैं।’

वैसे जिस भानु गुट ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है वह किसानों की संयुक्त संघर्ष समिति में शामिल नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार

कोर्ट में पंजाब सरकार की तरफ से वकील पी. चिदंबरम पेश हुए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की कमिटी बनाने की पेशकश पर सहमति जताई और कहा कि पंजाब सरकार को इस पर आपत्ति नहीं है कि लोगों का एक समूंह किसानों और केन्द्र में बातचीत करवाए। उन्होंने पुलिस पर किसानों को रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसान दिल्ली आना चहते हैं लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक रखा है। बैरिकेड्स और कंटेनरों की तस्वीरें देखी जा सकती हैं।

सुनवाई के दौरान सीजेआई एसए बोबडे ने ‘मॉब’ शब्द का इस्तेमाल किया जिसपर चिदंबरम ने आपत्ति जताई और कहा कि वो ‘मॉब’ नहीं है बल्कि किसानों का एक समूंह है। पुलिस ने किसानों को रोका हुआ है और पुलिस रोड ब्लॉक कर, इसका आरोप किसानों पर नहीं लगा सकती। उन्होंने कोर्ट में दोहराया कि वो संसद सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं जहां इस पर चर्चा हो सके।

सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील हरीश साल्वे

आंदोलन के ख़िलाफ़ याचिका दायर करने वालों के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि आंदोलन की वजह से दिल्ली में खाने-पीने के सामान की कीमतें बढ़ रही है। सभी फल और सब्ज़ी पड़ोसी राज्यों से आते हैं। ऐसे में दिल्लीवासियों को परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि विरोध करना एक मौलिक अधिकार है लेकिन उसे अन्य मौलिक अधिकारों से बैलेंस करना होगा। इसपर सीजेआई ने कहा कि यह स्पष्ट है कि क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध एक मौलिक अधिकार ज़रूर है लेकिन यह अन्य मौलिक अधिकारों को प्रभावित नहीं कर सकता।

हरीश साल्वे ने कोर्ट से किसान यूनियनों को केन्द्र के साथ को-ऑपरेट करने के लिए एक आदेश जारी करने की मांग की। इसपर सीजेआई ने कहा कि ऐसा एक स्वतंत्र कमेटी द्वारा किया जा सकता है जिसमें पी. साइनाथ जैसे लोग शामिल होते। सीजेआई ने यह भी कहा कि अहिंसक प्रदर्शन जारी रह सकता है और साथ ही सीजेआई ने केन्द्र सरकार से कहा कि ‘आप हिंसा नहीं भड़कायेंगे।’

सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल

कोर्ट में केन्द्र सरकार की तरफ से पेश अटॉर्नी जनरल के.के.वेणुगोपाल ने कहा कि 22 दिनों के बंद से भारी नुकसान हो रहा है। ऐसा तो सिर्फ जंग के समय होता है कि सीमाएँ बंद कर दी जाती हैं और सप्लाई रोक दी जाती है। लेकिन टिकरी और सिंघु बॉर्डर पूरी तरह बंद कर दिया गया है। हरियाणा सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एक कमिटी का गठन किया जाए जो किसान और केन्द्र से आगे की बात करे।

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