किसानों के लिए जो 'सीएम मोदी' ने माँगा था, वही 'पीएम मोदी' से माँग रहे हैं किसान

by GoNews Desk 1 year ago Views 1920

Farmers are demanding from 'PM Modi' what the 'CM
कृषि क़ानून के ख़िलाफ किसानों का आंदोलन दसवें दिन भी जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्री क़ानून को ‘किसान हितैषी’ बताने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा क़ानून को लेकर किसानों को ‘भड़काया’ जा रहा है। किसानों को 'भ्रमित' किया जा रहा है। लेकिन दिलचस्प बात ये है कि कभी खुद मोदी जी ने भी वही माँगें की थी जिनकी वजह से आज किसान आंदोलन पर मज़बूर हैं।

किसानों का आंदोलन तेज़ होने के बीच यह जानकारी काफ़ी चर्चा में है कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहते मोदी जी का रुख बिलकुल उलट था। वे तब केंद्र की ओर से बनाये गये कंज़्युमर अफेयर्स वर्किंग ग्रुप के अध्यक्ष थे। तब उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें उन्होंने एमएसपी को लेकर कई सुझाव दिए थे।उन्होंने अपनी रिपोर्ट में मांग की थी, ‘सभी आवश्यक वस्तुओं के संदर्भ में सांविधानिक निकाय के ज़रिए किसानों का हित संरक्षित किया जाना चाहिए। साथ ही किसी भी किसान और व्यापारी के बीच लेन-देन एमएसपी से नीचे नहीं होना चाहिए।’


उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा था, ‘जिन फसलों पर एमएसपी है, उन फसलों की ख़रीद के लिए विश्वसनीय व्यवस्था बनायी जाये। एक विश्वसनीय संस्था होनी चाहिए जो यह सुनिश्चित करे कि एमएसपी के नीचे फसल की खरीद न हो।’

उन्होंने इसके लिए एक स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन और को-ऑपरेटिव संस्थायें बनाने का सुझाव भी दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर केन्द्रीय संस्था एफसीआई की पहुंच सीमित है तो स्टेट संस्थाओं का रोल बराबर किया जाना चाहिए।

नरेंद्र मोदी के नाम पर बनी आधिकारी वेबसाइट पर इसकी पूरी जानकारी मौजूद है। 'रिपोर्ट ऑफ वर्किंग ग्रुप कंज्यूमर अफेयर्स' शीर्षक रिपोर्ट में वर्किंग ग्रुप की तरफ से 20 सिफारिशें की गई थीं। इन सिफारिशों को किस तरह लागू करना है, इसके लिए 64 सूत्रीय एक्शन प्लान भी बताया गया। वहीं, इस रिपोर्ट में कई जगह एमएसपी का जिक्र किया गया था।

2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भी नरेंद्र मोदी ने इसे लेकर आवाज़ उठाय़ी थी। उन्होंने 6 अप्रैल 2014 को अपने एक ट्वीट में कहा था, ‘हमारे किसानों को सही दाम क्यों नहीं मिलना चाहिए ? किसान भीख नहीं नहीं मांग रहे हैं। उन्होंने इसके लिए कड़ मेहनत की है और उन्हें अच्छा दाम मिलना चाहिए।’

ऐसे में सवाल उठता है कि आज उनकी सरकार एमएसपी को वैधानिक दर्जा न देने पर क्यों अड़ी है? आख़िर किसान वही  तो माँग रहे हैं जो मोदी जी चाहते थे।

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