कोरोना से जूझ रहे मशहूर शायर राहत इंदौरी का दिल का दौरा पड़ने से 70 साल की उम्र में निधन

by Siddharth Chaturvedi 1 year ago Views 2389

famous-poet-rahat-indauri-who-is-battling-corona-d
मशहूर शायर राहत इंदौरी का मंगलवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। शायर राहत इंदौरी कोरोना संक्रमण से भी जूझ रहे थे। उन्होंने आज सुबह ही इसकी जानकारी सोशल मीडिया के ज़रिये दी थी। इसके इलाज के लिए उन्हें इंदौर के ऑरबिंदो अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक़ राहत इंदौरी हृदय रोग, किडनी रोग और मधुमेह सरीखी पुरानी बीमारियों से पहले से ही पीड़ित थे।

अस्पताल प्रशासन के मुताबिक़ राहत इंदौरी के दोनों फेफड़ों में निमोनिया था और उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। सांस में तकलीफ के चलते उन्हें आईसीयू में रखा गया था। अस्पताल प्रशासन ने कहा कि उन्हें ऑक्सीज़न भी लगाया गया था लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद वो नहीं बच पाए।


शायर राहत इंदौरी की एक मशहूर शायरी है कि, 'दो गज सही ये मेरी मिलकियत तो है, ऐ मौत तूने मुझे ज़मींदार कर दिया'

उनकी लिखी एक और शायरी जो अक्सर लोगों की ज़ुबां पर रहती है- 'मेरी ख्वाहिश है कि आंगन में न दीवार उठे, मेरे भाई मेरे हिस्से की ज़मीं तू रख ले'

मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शायर राहत इंदौरी के निधन पर दुख जताते हुए इसे प्रदेश और देश के लिए बड़ा झटका बताया है। मध्‍यप्रदेश के सीएम ने अपने शोक संदेश में लिखा, ‘अपनी शायरी से लाखों-करोड़ों दिलों पर राज करने वाले मशहूर शायर, हरदिल अज़ीज़ राहत इंदौरी का निधन मध्यप्रदेश और देश के लिए अपूरणीय क्षति है। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि उनकी आत्मा को शांति दें और उनके परिजनों और चाहने वालों को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति दें।’

देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी शायर राहत इंदौरी के निधन को साहित्‍य जगत का बड़ा नुकसान बताया है। उन्‍होंने ट्वीट किया, 'मक़बूल शायर राहत इंदौरी जी के गुज़र जाने की ख़बर से मुझे काफ़ी दुख हुआ है। उर्दू अदब की वे क़द्दावर शख़्सियत थे। अपनी यादगार शायरी से उन्होंने एक अमिट छाप लोगों के दिलों पर छोड़ी है। आज साहित्य जगत को बड़ा नुक़सान हुआ है। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके चाहने वालों के साथ हैं।’

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने राहत इंदौरी को श्रद्धांजलि देते हुए ट्विटर पर लिखा, ‘अब ना मैं हूँ ना बाक़ी हैं ज़माने मेरे, फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे…’ अलविदा, राहत इंदौरी साहब।’

राहत इंदौरी की सबसे ज़्यादा पसंद की जाने वाली शायरी है- 'सभी का खून है शामिल यहां की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है' 

ताज़ा वीडियो