तेल की कीमतें 'पश्चिम में 50 फीसदी, भारत में 5 फीसदी बढ़ी' - पेट्रोलियम मंत्री का बयान कितना सही ?

by M. Nuruddin 2 months ago Views 14697

ब्रिटेन की जीडीपी प्रति व्यक्ति 41,059 डॉलर है जो भारत की तुलना में 21 गुना ज़्यादा है, अमेरिका की जीडीपी प्रति व्यक्ति भी भारत की तुलना में 33 गुना ज़्यादा 63,593 डॉलर है...

Factcheck: Oil prices 'increased by 50 percent in
केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दावा किया है कि अप्रैल 2021 से मार्च 2022 के बीच पश्चिम की तुलना में भारत में ईंधन की कीमतों में कम इज़ाफा हुआ है। मंत्री का दावा है कि इस दरमियान भारत में ईंधन की कीमत पांच फीसदी बढ़ी है तो पश्चिमी देशों में 50 फीसदी की बढ़ोत्तरी देखी गई है।

मंत्री के दावे ग़लत तो नहीं हैं लेकिन तेल की कीमतों में पांच फीसदी की बढ़ोत्तरी भी भारतीय को बुरी तरह प्रभावित करती है। आइए जानते हैं - कैसे ?


ग़ौरतलब है कि रूस यूक्रेन युद्ध की वजह से देश और दुनिया में ईंधन सप्लाई बाधित हुई है और ऐसे में इसकी कीमतें दुनियाभर में बढ़ी है।

पश्चिमी और यूरोपीय देशों ने रूस की कई तेल कंपनियों सहित राष्ट्रपति पुतिन और उद्योगपतियों को प्रतिबंधित किया है। इसके बाद पश्चिम के कुछ देशों ने रूस से तेल खरीद पर रोक लगा दी है। ऐसे में उन देशों में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी।

हालांकि भारत के संदर्भ में - केन्द्र सरकार ने रूस से 20-25 डॉलर सस्ती कीमतों पर 30 लाख बैरल तेल की खरीद की। इनके अलावा पिछले दिनों भारत दौरे पर आए रूसी विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने भारत सरकार को कम से कम 35 डॉलर के डिस्काउंट पर तेल मुहैया कराने की पेशकश की।

प्रतिबंधों के बीच रूस ने भारी डिस्काउंट पर कम से कम 15 मिलियन बैरल मुहैया कराने का ऑफर दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ यह डिस्काउंट युद्ध शुरु होने से पहले की कीमतों पर लागू होंगे, जिससे भारत को और सस्ते दामों पर तेल मिल सकता है। युद्ध के बाद से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 97 डॉलर से 107 डॉलर हो गई है।

इस बीच अगर देखा जाए तो सस्ती खरीद के बावजूद भारतीय को ईंधन पर ज़्यादा कीमतें चुकानी पड़ रही है। मसलन 16 दिनों में पेट्रोल-डीज़ल 10 रूपये महंगा हुआ है। Gonewsindia ने आपको पहले भी कई मोर्चों पर बताया है कि वैश्विक स्तर पर कम कीमतों के बावजूद भारतीय उच्च कीमतों पर ईंधन खरीदने को मज़बूर हैं।

पश्चिम से तुलना करना कितना सही ?

मंत्री के दावे के मुताबिक़ पश्चिम के कुछ देशों में ईंधन की कीमतें भारत की तुलना में ज़्यादा ज़रूर है लेकिन उनकी तुलना में भारतीय की कमाई बेहद कम है। ब्रिटेन में पेट्रोल की कीमत 161.46 रूपये प्रति लीटर है और डीज़ल 175.44 रूपये प्रति लीटर पर है लेकिन ब्रिटेन की जीडीपी प्रति व्यक्ति 41,059 डॉलर है जो भारत की तुलना में 21 गुना ज़्यादा है।

जबकि अमेरिका में पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें भारत की तुलना में कम हैं। साथ ही अमेरिका की जीडीपी प्रति व्यक्ति भी भारत की तुलना में 33 गुना ज़्यादा 63,593 डॉलर है।

भारतीय की - एक तो कमाई कम हो रही है और साथ ही महंगाई भी जान ले रही है। मसलन देश में पेट्रोल 112 रूपये प्रति लीटर और डीज़ल करीब 100 रूपये प्रति लीटर है।

आपको यह भी बता दें कि भारतीय की जीडीपी प्रति व्यक्ति पश्चिम की तुलना में बेहद कम मात्र 1,927 डॉलर है, जिससे महंगाई का भारतीय पर बहुत बुरा असर पड़ता है।

भारत का रूस से तेल आयात !

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पिछले सप्ताह राज्यसभा में बताया था कि मात्रा के लिहाज से, भारत ने वित्त वर्ष 2022 के पहले दस महीने में रूस से लगभग 4.19 लाख टन कच्चा तेल खरीदा, जो इसके कुल आयात 175.9 मिलियन टन का सिर्फ 0.2 फीसदी था।

इनके अलावा वित्त वर्ष 2019-20 में भारत ने कुल आयात का 1.3 फीसदी या 2.93 मिलियन टन और वित्त वर्ष 2020-21 में कुल आयात का 6.3 लाख टन या 0.3 फीसदी आयात किया था। पेट्रोलियम मंत्री ने राज्यसभा में बताया था कि भारत में प्रति दिन पांच मिलियन बैरल की खपत है और इसका 60 फीसदी आयात खाड़ी देशों से किया जाता है।

रूस से तेल आयात करना परिवहन लागत की वजह से भारत के लिए महंगा सौदा है और अपनी कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 85 फीसदी आयात के माध्यम से पूरी करता है।


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