विस्फोटक वाली कार और हिरेन हत्याकांड: महा विकास अघाड़ी सरकार के दरवाज़े तक पहुंची जांच की आंच

by M. Nuruddin 1 year ago Views 2970

एटीएस का दावा है कि उन्होंने हिरेन मनसुख की हत्या की जांच पूरी कर ली है। इस मामले में दो आरोपी एटीएस की हिरासत में हैं...

Explosive loaded car and Hiren massacre: Investiga
मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के करीब मिले विस्फोटक मामले की जांच अब महा विकास अघाड़ी सरकार के दरवाज़े तक पहुंच गई है। मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ ही एमवीए सरकार ने मुंबई पुलिस कमिश्नर रहे परमबीर सिंह का तबादला कर दिया।

बाद में परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक चिट्ठी लिखी जिसमें उन्होंने राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख के ख़िलाफ़ कई आरोप लगाए। मामला इतना बढ़ गया कि विधानसभा में मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने तक की मांग कर दी।


शिवसेना का संपादकीय

शिवसेना ने अपने मुख़पत्र सामना में कई तीख़ी बातें कही है। शिवसेना ने कहा कि राज्य में पूर्ण बहुत के साथ महागठबंधन की सरकार चल रही है, यह एक मंत्री या विधायक की वजह से नहीं गिरेगी। शिवसेना ने यह भी कहा कि यह मुद्दा अब पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए ‘प्रतिष्ठा का विषय’ बन गया है।

शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में पार्टी ने कहा कि अगर बीजेपी एमवीए सरकार के प्राप्त बहुमत को कमज़ोर करने की कोशिश करती है तो ‘उबाल आ जाएगा’। एमवीए में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस शामिल है।

पिछले हफ्ते मुंबई के पुलिस कमिश्नर रहे परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चिट्ठी लिखी थी जिसमें उन्होंने कई दावे किए थे। इसके बाद महाराष्ट्र की राजनीति में मानो तूफान आ गया।

परमबीर सिंह का दावा है कि, ‘अनिल देशमुख ने पुलिस अधिकारियों को मुंबई में बार और होटलों से 50-60 करोड़ रूपये समेत हर महीने 100 करोड़ रूपये की उगाही करने को कहा था।’ उन्हें हाल ही में मुकेश अंबानी के घर के नज़दीक विस्फोटकों से भरी एसयूवी की बरामदगी और उसकी एनआईए जांच के बीच पुलिस कमिश्नर के पद से हटा दिया गया।

इसको लेकर अनिल देशमुख ने सफाई पेश की और कहा कि परमबीर सिंह का तबादला सीनियर पुलिस ने उनके गंभीर ग़लतियों की वजह से की है। गृह मंत्री ने अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों का भी खंडन किया था। शिवसेना ने अपने संपादकीय में कहा है, ‘भाजपा द्वारा उत्पन्न की जा रही हुंकार और रोना एक साज़िश का हिस्सा लगता है। यह चिट्ठी पिछले हफ्ते देवेंद्र फडणवीस की दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद आया।’

संपादकीय में कहा गया है, 'क़ानून व्यवस्था की स्थिति ठीक नहीं है और यह सही है कि महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाना भाजपा का लक्ष्य है। इसके लिए नए प्यादे बनाए जा रहे हैं। स्पष्ट है कि परमबीर सिंह का इस्तेमाल उस तरीके से किया जा रहा है।’

शिवसेना ने आगे कहा, ‘एमवीए के पास आज भी पूर्ण बहुमत है, अगर आप (बीजेपी) बहुमत को कमज़ोर करने की कोशिश करेंगे तो आग भड़क उठेगी। यह एक चेतावनी नहीं है, बल्कि एक सच्चाई है। विपक्ष (बीजेपी) को यह नहीं भूलना चाहिए कि सरकारें एक मंत्री-विधायक की वजह से न बनती है और ना ही गिरती है।’

शरद पवार के दावे

सचिन वाझे को लेकर एनसीपी चीफ शरद पवार ने दावा किया कि, ‘वो 16 साल से सस्पेंडेड थे और एक साल पहले परबीर सिंह ने ही उनको दोबारा भर्ती किया। इस बारे में ना ही मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और ना ही गृह मंत्री अनिल देशमुख को ही जानकारी थी। इसलिए न तो गृह मंत्री और ना ही मुख्यमंत्री इसके लिए रिस्पॉन्सिबल हैं।’

उन्होंने कहा, ‘गृह मंत्री अनिल देशमुख के ख़िलाफ़ जो भी आरोप लगे हैं वो गंभीर हैं। मुख्यमंत्री के पास पूरा अधिकार है कि वो इस मामले की जांच कराएं।’

कैसे शुरु हुआ विवाद ?

महाराष्ट्र की राजनीति में आई इस भूचाल की शुरुआत 25 फरवरी को हुई जब साउथ मुंबई स्थित मुकेश अंबानी के घर के बाहर एक कार से विस्फोटक बरामद हुए। शुरुआती जांच में पुलिस ने बताया था कि विस्फोटक से लदी कार 18 फरवरी को चोरी की गई थी। इस मामले की जांच महाराष्ट्र एटीएस कर रहा है। इस मामले में नया मोड़ तब आया जब 5 मार्च को कार के मालिक मनसुख हिरेन का शव बरामद हुआ।

हिरेन गाड़ियों के कलपुर्ज़ों की बिक्री करते हैं। मामले की जांच मुंबई एटीएस के हाथों में थी। एटीएस का दावा है कि उन्होंने हिरेन मनसुख की हत्या की जांच पूरी कर ली है। इस मामले में दो आरोपी एटीएस की हिरासत में हैं। एटीएस ने दावा किया है कि इस मामले में मुख्य आरोपी सचिन वाझे ही हैं।

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