इज़रायल और फलस्तीन के बीच आख़िर विवाद क्या है, हिंसा में किसकी होगी जीत ?

by M. Nuruddin 1 year ago Views 1654

Explain: Israeli-Palestinian Conflict
इज़रायल और फलस्तीन के बीच पिछले एक हफ्ते से जारी हिंसा में ख़बर लिखे जाने तक करीब 200 फलस्तीनियों की मौत हो गई है जिसमें करीब 60 बच्चे और 34  महिलाएं शामिल हैं। इनमें अकेले रविवार को 42 मौतें हुई है। हालांकि इज़रायल लगातार दावा कर रहा है कि वो सिर्फ उन ठिकानों को निशाना बना रहा है जहां हमास के 'चरमपंथी' छिपे हैं लेकिन आंकड़े हकीकत बयां कर रहे हैं।

इस हिंसा को लेकर युनाइटेड नेशन ने बैठक कर हिंसा को रोके जाने की अपील की है। रविवार को युनाइटेड नेशन द्वारा बुलाई गई बैठक में इसके चीफ एंटोनियो गुटेरेस ने कहा, 'हिंसा का ये नया दौर सिर्फ मृत्यु, विनाश और निराशा बढ़ाएगा। लड़ाई बंद होनी चाहिए, इसे तुरंत रोकना चाहिए।' युनाइटेड नेशन ने कहा, 'अगर जल्द ही संघर्ष विराम नहीं किया गया, तो हिंसा बढ़ती जाएगी और हालात नियंत्रण से बाहर हो जाएंगे। उन्होंने मौजूदा हालात को "पूरी तरह से भयावह" बताया।


अब सवाल है कि आख़िर इज़रायल और फलस्तीन में ये टकराव क्यों हो रहा है। इसपर युनाइटेड नेशन के मीटिंग करने की असल वजह क्या है? हम इस रिपोर्ट में पूरी बात विस्तार से जानेंगे।

बात साल 1947 की है जब युनाइटेड नेशन ने एक यहूदी देश इज़रायल बनाने का प्रस्ताव पेश किया। यानि एक पूर्ण देश फलस्तीन के बंटवारे का प्रस्ताव। यह 181वां रिज़ॉल्यूशन था जिसे पार्टिशन प्लान के तौर पर भी जाना जाता है। यह एक पूर्ण देश फलस्तीन का 1947 का मैप है जो समय-समय पर बदलता रहा है और तभी से इज़रायल इसे पूरी तरह ख़त्म करने की मंशा से आगे बढ़ रहा है। (use map-1) 14 मई 1948 को युनाइटेड नेशन ने फलस्तीन को विभाजित कर दिया और एक यहूदी देश इज़रायल अस्तित्व में आया। इसके अस्तित्व में आते ही इलाक़े में इज़रायली और अरब बीच युद्ध छिड़ गया।

युद्ध इज़रायल की जीत के साथ 1949 में ख़त्म हुआ और तबतक 750,000 फलस्तीनियों को अपने घर से बेघर होना पड़ा और युद्ध का मैदान बना फलस्तीन तीन भागों में बंट गया। इनमें एक इज़रायल राज्य, दूसरा जॉर्डन नदी का इलाका वेस्ट बैंक और तीसरा बना ग़ज़ा पट्टी, जहां क़ब्ज़ाने की मंशा के साथ इज़रायल बमबारी कर रहा है। इन इलाक़ों में युद्ध और हिंसा की एक लंबी सीरीज है।

मिस्र जो अब एजिप्ट के नाम से जाना जाता है, के स्वेज़ कनाल जो अभी एक महत्वपूर्व व्यापार रूट है के राष्ट्रीयकरण किए जाने के बाद साल 1956 में अरब और इज़रायल (अरब vs इज़रायल) के बीच दूसरा युद्ध शुरु हो गया।

इस फैसले से नाराज़ इज़रायल ने एजिप्ट पर हमला किया। तब इज़रायल का साथ देने वालों में फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देश शामिल रहे। इस युद्ध को ख़त्म करने के लिए तब यूएसएसआर और अमेरिका ने मध्यस्थता की और फिर युद्ध ख़त्म हुआ।

इसके बाद जून 1967 में यहां तीसरा युद्ध छिड़ गया। छह दिनों तक चले इस युद्ध में एक बार फिर इज़रायल की जीत हुई। इसबार एजिप्ट, सीरिया और जोर्डन ने साथ मिलकर इज़रायल का मुक़ाबला किया।

तब इज़रायल ने एजिप्ट से सिनाई प्रायद्वीप और ग़ज़ा पट्टी, जॉर्डन से वेस्ट बैंक और ईस्ट यरूशलम और सीरिया से गोलान हाइट्स का पूरा इलाक़ा क़ब्ज़ा लिया। इसे वापस लेने के लिए एजिप्ट और सीरिया ने इज़रायल पर हमला तो किया लेकिन युद्ध किसी नतीज़े तक नहीं पहुंच सका।

इसके बाद 1973, 1978, 1987, 1991 और 1993 तक ग़ज़ा, वेस्ट बैंक और इज़रायल के भीतर सालों तक लगातार विरोध और संघर्ष जारी रही, इस दौरान कई लोग मारे गए, कई घायल हुए और कई को बेघर होना पड़ा।

इस दौरान युनाइटेड नेशन की ही मध्यस्थता से साल 1993 में पहली बार औस्लो पीस समझौते पर सहमति बनी।

इसके बाद फलस्तीनी ऑथोरिटी को वेस्ट बैंक और ग़ज़ा पर शासन करने की इजाज़त दे दी गई। लेकिन इसबार भी यरूशलम और वेस्ट बैंक में इज़रायली सेटलमेंट की बात अनसुलझी रही और इसको लेकर कोई फैसला नहीं हो सका। यही वो इलाक़ा है जिसे लेकर मौजूदा समय में हिंसा हो रही है और लोग मारे जा रहे हैं।

1993-94 के बाद से भी यहां इज़रायल लगातार अपना आक्रमणकारी रवैया अपनाता रहा है जिसमें हज़ारों की संख्या में लोगों की जानें गई है। दूसरी तरफ ग़ज़ा स्थित चरमपंथी संगठन हमास के हमले में कई इज़रायली सैनिक भी मारे गए हैं।

ग़ज़ा को नियंत्रण करने वाले चरमपंथी संगठन हमास द्वारा साल 2002 में एक सुसाइड अटैक में 30 इज़रायली सैनिक मारे गए थे। इसके बाद फिर इज़रायल ने हमला बोल दिया और वेस्ट बैंक के काफी हिस्से को 'अवैध तरीके' से अपने क़ब्ज़े में ले लिया, जहां इज़रायल के कई सैन्य ठिकाने हैं।

इसके बाद इज़रायली सेना और हमास के बीच रॉकेट और मिसाइल हमले शुरु हुए। साल 2008 में हमास की तरफ इज़रायल पर दागे गए रॉकेट के बाद भी इज़रायल ने इसी तरह हमले शुरु किए थे जिसमें 1100 से ज़्यादा फलस्तीनी मारे गए थे और 13 इज़रायली सैनिकों की मौत हुई थी।

इस तरह साल 2014 में एक-दूसरे पर हुए रॉकेट और मिसाइल हमले में 2000 से ज़्यादा फलस्तीनी मारे गए और करीब 75 इज़रायली सैनिकों की जानें गई।

अब अगर मौजूदा विवाद की बात करें तो 12 अप्रैल को दमिश्क गेट प्लाज़ा पर इज़रायल ने बैरिकेडिंग कर दिया जहां रमज़ान के महीने में फलस्तीन के लोग इबादत के लिए इकट्ठा होते हैं। फलस्तीनियों ने इसका विरोध किया और रमज़ान के पवित्र महीने के दौरान 16 अप्रैल को इज़रायली सेना ने मुसलमानों के तीसरे पवित्र स्थान अल-अक़्सा मस्जिद के भीतर घुसकर फलस्तीनियों पर हमले कर दिए।

इज़रायली सेना की तरफ से शुरु यह हिंसा ग़ज़ा और वेस्ट बैंक तक पहुंच गया। बाद में ग़ज़ा ने इज़राय पर रॉकेट दागे जिसके बाद इज़रायल ने हमले शुर कर दिए। इसकी वजह से हज़ारों की संख्या में फलस्तीनियों को बेघर होना पड़ा है जो लगातार जारी है।

कहा जाता है कि शुरु से ही इज़रायल यह उक़सावे वाली चाल चलता रहा है और फलस्तीनियों की ज़मीने हथियाता रहा है। इज़रायली सेना और ग़ज़ा के बीच जारी मौजूदा खूनि हिंसा अगर जल्द नहीं थमता है तो फलस्तीन के शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ना तय है।

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