दुनिया में हर छठे व्यक्ति को हाई बल्ड प्रेशर की परेशानी, ग़रीब देशों को ज़्यादा खतरा

by GoNews Desk 1 month ago Views 1583

hypertension rate

नियाभर में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे लोगों की संख्या 30 सालों में दोगुनी हो गई है। ब्रिटिश जनरल दिल लैंसेट में Non-Communicable Disease Risk Factor Collaboration की छपी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों की संख्या 1990 के मुक़ाबले 2019 में 127.8 करोड़ हो गई है। इनमें 62.6 करोड़ महिलाएं और 65.2 करोड़ पुरूष शामिल हैं। 

शोध के मुताबिक़ 41 फीसदी महिलाएं और 51 फीसदी पुरूष अपनी इस समस्या से अंजान थे और ऐसे में हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित करीब 50 फीसदी मरीज़ों ने 2019 तक अपना इलाज नहीं कराया था। जबकि 53 फीसदी महिलाओं और 62 फीसदी पुरूषों ने बिमारी का इलाज नहीं कराया था। रिपोर्ट में बताया गया है कि हर चार में एक से भी कम महिलाएं और पांच में एक पुरुष इस बीमारी का इलाज करा रहे हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल होने वाली 85 लाख मौतों का सीधा संबंध हाईपरटेंशन से होता है और स्ट्रोक, दिल की बीमारी और किडनी की बीमारी इस समस्या की मुख्य वजह है। रिपोर्ट के मुताबिक लो बल्ड प्रेशर से स्ट्रोक को 35-40 फीसदी, दिल के दौरे को 20-25 फीसदी, और हर्ट फेलियर को लगभग 50 फीसदी तक कम किया जा सकता है।

भारत की बात करें तो यहां भी हाईपरटेंशन की बिमारी में पिछले 30 सालों में बढ़ोतरी हुई है। 1990 में 28 फीसदी महिलाएं और 29 फीसदी पुरूष इस बिमारी से पीड़ित थे जबकि 2019 में ये आंकड़ा बढ़कर क्रमश: 32 फीसदी और 38 फीसदी हो गया है।

ताइवान, दक्षिण कोरिया, जापान, स्विट्ज़रलैंड, स्पेन और ब्रिटेन में हाईपरटेंशन रेट्स महिलाओं में सबसे कम जबकि इरिट्रिया, बांग्लादेश, इथियोपिया और सोलोमन द्वीप समूह में पुरूषों में सबसे कम है। वहां यह क्रमष: 24 फीसदी और 25 फीसदी से भी कम है।

वैसे तो दुनियाभर में बड़े स्तर पर लोग बिमारी से पीड़ित हैं लेकिन कम और मध्य आय वाले देशों में ये बिमारी ज़्यादा फैली है और वहां इसकी नियंत्रण और इलाज दर भी कम है। नेपाल, इंडोनेशिया और सब-सहारा अफ्रीका और ओशिनिया के कई देशों में महिलाओं में इलाज दर 25 जबकि पुरूषों में 20 फीसदी से भी कम थी।

पूर्वी यूरोप, मध्य और पूर्वी एशिया, और मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में इलाज दर तो अधिक थी जबकि बिमारी नियत्रंण दर कम देखी गई। स्टडी में शामिल लेखकों ने निम्न और मध्यम आय वाले देशों जैसे कोस्टा रिका, चिली, तुर्की, कजाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका में सबसे बहतर ट्रेसिंग, उपचार और नियंत्रण किए जाने की बात कही है।

लैंसेट जनरल में छपी ये रिपोर्ट चिंता पैदा कर सकती है क्योंकि विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना संक्रमण ने सरकारों का ध्यान हाईपरटेंशन की वास्तविकता से हटा दिया है। फोर्ब्स ने शेफ़ीएल विश्वविद्यालय में कार्डियोलॉजी के प्रोफेसर रॉबर्ट स्टोरी के हवाले से लिखा कि पिछले 18 महीनों में हृदय रोग की महामारी पर कम ध्यान दिया गया है।

इस रिपोर्ट के जारी होने के साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वयस्कों में उच्च रक्तचाप का औषधीय उपचार से जुड़ी गाइडलाइन जारी की है। इसमें WHO ने उच्च रक्तचाप और सिस्टोलिक रक्तचाप 140 mmHg (मिलि मीटर ऑफ मर्क्युरी) या 90 mmHg के डायस्टोलिक रक्तचाप के पुष्टि निदान वाले व्यक्तियों के लिए औषधीय एंटी-हाइपरटेंसिव उपचार शुरू करने की सिफारिश की है।

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