देश में हर घंटे एक कारोबारी कर रहा है ख़ुदकुशी : एनसीआरबी

by Rahul Gautam 1 year ago Views 1210

Every hour a businessman commits suicide in 2019:
कम से कम दो साल से देश ज़बरदस्त मंदी की गिरफ़्त में है। उद्योग-धंधे चौपट हो रहे हैं, कारोबारी दिवालिया हो रहे हैं और आम आदमी क़र्ज़ के बोझ तले दबता जा रहा है। लंबे समय से जारी इस बदहाली के चलते देश में ख़ुदकुशी बढ़ती जा रही है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि जहां 2018 में 7990 करोबारियों ने ख़ुदकुशी की थी, वहीं साल 2019 में 9052 कारोबारियों ने अपनी जान ले ली.

इसका मतलब है कि बीते साल व्यापारियों की ख़ुदकुशी के मामले 13 फीसदी बढ़ गए और 2019 में हर रोज़ 24 कारोबारियों ने अपनी जान गवाईं। कारोबारियों की आत्महत्या के सबसे ज्यादा 14.2 % मामले सामने आये महाराष्ट्र से, फिर तमिलनाडु में 11.7%,कर्नाटक में 9.7%,पश्चिम बंगाल में 8.2% और मध्य प्रदेश में 7.8% कारोबारियों के आत्महत्या के मामले सामने आये।


इसके अलावा कंगाली और क़र्ज़ के चलते आत्महत्या करने वालो के आंकड़े में भी उछाल आया है। साल 2019 में कुल 1 लाख 39 हज़ार 123 लोगो ने देशभर में अपनी जान दी। इसमें लगभग 4.2 फीसदी लोगों यानि 5843 लोगों ने दिवालिया होने और क़र्ज़ के चलते अपनी जान देने का फैसला किया। इसकी तुलना अगर 2018 के आंकड़ों से करें तो मालूम पड़ता है कि तब दिवालिया होने और क़र्ज़ के चलते जान देने वाले लोग 3.7 फीसदी थे। उस साल 4977 लोगो ने दिवालिया होने और क़र्ज़ के चलते आत्महत्या कर ली थी।

बता दें कि 2018 से ही मंदी से जूझ रही करोड़ों की आबादी के लिए ज़िंदगी को वापस पटरी पर लाना आसान नहीं है. लॉकडाउन ने बाद लगभग बर्बादी की कगार पर पहुंच चुकी अर्थव्यवस्था में कारोबारियों का यक़ीन तेज़ी से उठता जा रहा है.

नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकॉनमिक रिसर्च का ताज़ा सर्वे बताता है कि वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के बीच बिज़नेस कॉनफिडेंस इंडेक्स साल 1991 के मुक़ाबले भी कम है.

साफ़ शब्दों में कहें तो जब देश दिवालिया होने की कगार पर था, उस वक़्त भी लोगों का विश्वास कारोबार-व्यापार में आज के मुकाबले ज्यादा था. कोरोना वायरस से उपजे लॉकडाउन और आर्थिक मंदी के बाद खतरा है की 2020 में व्यापारियों के ख़ुदकुशी के मामले और भी ज्यादा बढ़ सकते है।

ताज़ा वीडियो