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हर 12 मिनट पर देश में एक दलित पर होता है अत्याचार, यूपी अव्वल

by GoNews Desk 2 months ago Views 1139

Every 12 minutes a Dalit is tortured in the countr
पूरे देश में अनुसूचित जातियों के खिलाफ जितना अत्याचार होता है, उसका एक चौथाई हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश में दर्ज़ होते है। ऐसे कहना है एनसीआरबी यानी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की साल 2019 की रिपोर्ट का। साथ ही रिपर्ट यह भी बताती है की वे मामले जिनमे पीड़ित दलित परिवारों से आते है, वे 94 % लंबित है जो कि राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है।

रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 में दलितों के खिलाफ हिंसा के 45,852 मामले दर्ज किए गए  यानी हर 12 मिनट में देश में कही न कही कोई दलित हिंसा का शिकार हुआ। सबसे चिंताजनक बात है कि दलितों के खिलाफ हिंसा में साल 2018 के मुकाबले 2019 में 7.3% की बढ़ोतरी दर्ज़ हुई। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा यानी 11 हज़ार 829 मामले सामने आए, इसके बाद राजस्थान में 6 हज़ार 794 और बिहार में 6 हज़ार 544 मामले सामने आये। इस लिस्ट में शामिल दो अन्य राज्यों, मध्य प्रदेश में 5300 और महाराष्ट्र में 2150 मामले सामने आये।


इन शीर्ष पांच राज्यों में अनुसूचित जातियों के खिलाफ अत्याचार के 71% मामले सामने आये। हालांकि, जानकार कहते है कि इन राज्यों में ज्यादा मामले रिपोर्ट होते है क्यूंकि दलित थोड़ी बेहतर स्थिति में हैं अन्यथा देश के और राज्यों जैसे गुजरात, पश्चिम बंगाल आदि में तो दलित इस स्तिथि में ही नहीं है की थाने जाकर रिपोर्ट दर्ज़ करा सके।

2019 में दलित हिंसा से जुड़े 2 लाख 4191 मामले ट्रायल के लिए कोर्ट में आये लेकिन केवल 6% या 12 हज़ार 498 मुकदमे ही पूरे हुए। इसमें से केवल 32% मामलों में दोषी को सजा सुनाई गई। एक भ्रांति फैलायी जाती है कि ज्यादातर दलित अत्यचार के मामले झूठे होते हैं जबकि रिपोर्ट के मुताबिक दलित के खिलाफ अपराधों के 10% से भी कम केस झूठे पाय गये।

NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, 2019 में, हर दिन 10 दलित महिलाओं को बलात्कार का दंश झेलना पड़ा । आंकड़ों से पता चलता है भारत में बलात्कार के मामलों में दोषसिद्धि दर या कन्विक्शन रेट केवल 27.8 प्रतिशत है, लेकिन अगर पीड़ित दलित है, तो यह दर 2 प्रतिशत से भी कम है। कुल मिलाकर कहें तो भारत में वैसे ही इन्साफ पाना मुश्किल है, और दलितों के लिए तो यह और भी मुश्किल है।

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