EU: जम्मू-कश्मीर के हालात को शांतिपूर्ण बताने वाले सांसदों ने किया नागरिकता क़ानून का समर्थन

by M. Nuruddin 2 years ago Views 1868

EU: ECR in support of citizenship law, this group
यूरोपीय यूनियन से भारत को एक बार फिर तगड़ा झटका लगा है। यूरोपीय यूनियन की संसद में संशोधित नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ छह प्रस्ताव पेश किये गए हैं। जिनमें पांच प्रस्ताव क़ानून के ख़िलाफ और एक नागरिकता संशोधन क़ानून के समर्थन में पेश किया गया है. जिन सांसदों ने समर्थन में प्रस्ताव पेश किया है, उनमें से कई सांसद एनजीओ की मदद से अक्टूबर में जम्मू-कश्मीर के हालात का जायज़ा लेने के लिए भी भेजे गए डेलिगेशन का हिस्सा थे।

26 जनवरी को यूरोपीय यूनियन की संसद के 559 सांसदों के अलग-अलग समूहों ने विवादित नागरिकता क़ानून के विरोध में पांच प्रस्ताव पेश किये हैं। वहीं 66 सांसदों के एक ग्रुप ने इस क़ानून के समर्थन में प्रस्ताव पेश किया है. हालांकि सांसदों के इस समूंह ने भी सड़क पर उतरे लोगों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई और उसके बाद हुई हिंसा को ग़लत बताया है और उसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है। 


जिन सांसदों ने इस क़ानून के समर्थन में प्रस्ताव पेश किया है, उनमें से कई सांसद जम्मू-कश्मीर के दौरे पर भी भेजे गए थे। दौरे के बाद इन सांसदों ने जम्मू-कश्मीर का हालात शांतिपूर्ण बताया था लेकिन कुछ सांसदों ने सवाल भी खड़े किए थे. हालांकि इस दौरे के चलते इन सांसदों को तीखी आलोचना झेलनी पड़ी थी. यूरोपीय यूनियन की संसद ने भी बयान जारी कर कहा था कि भारत दौरे पर गए 27 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व, यूरोपीय यूनियन की संसद नहीं करती है। साथ ही कहा गया था कि प्रतिनिधिमंडल प्राइवेट संस्था के बुलावे पर कश्मीर गया था.

यूरोपीय यूनियन की संसद के जिन 559 सदस्यों ने क़ानून के विरोध में प्रस्ताव पेश किये हैं, उनमें यूरोपीय यूनियन संसद के सबसे बड़े समूह यूरोपीय पीपुल्स पार्टी के 182 सदस्य शामिल हैं। वहीं प्रोग्रेसिव अलायंस ऑफ सोशलिस्ट्स और डेमोक्रेट के 154 सदस्य, रीन्यू ग्रुप के 108 सदस्य और छोटे समूहों में ग्रीन्स/यूरोपीय फ्री अलायंस के 74, यूरोपीय लेफ्ट-नोर्डिक ग्रीन लेफ्ट के 41 सदस्य शामिल हैं. जिन 66 सदस्यों ने क़ानून के समर्थन में प्रस्ताव पेश किया है, वे ईसीआर यानि यूरोपीय कंज़र्वेरटिव एंड रिफॉर्मिस्ट समूह से ताल्लुक़ रखते हैं।

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यूरोपीय यूनियन की संसद इन प्रस्तावों  पर 29 जनवरी को बहस करेगी और 30 जनवरी को वोटिंग होगी। अब देखना ये है कि यूरोपीय यूनियन के इस कार्रवाई का क्या असर होता है।

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