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भारत में पहले चरण के कोरोना टीकाकरण पर क़रीब पौने दो अरब डॉलर ख़र्च का अनुमान

by GoNews Desk 4 months ago Views 1287

रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत ने अभी तक वैक्सीन कार्यक्रम के लिए लागत का कोई अनुमान नहीं दिया है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि लोगों की सुरक्षा के लिए हर संभव संसाधन उपलब्ध कराया जाएगा।

First Phase Vaccination Costs $ 1.8 Billion in Ind
ग्लोबल एलायंस फॉर वैक्सीन एंड इम्यूनाइजेश ( GAVI ) के अनुमान के मुताबिक़ भारत को पहले चरण के टीकाकरण के लिए 1.4 से 1.8 अरब डॉलर तक ख़र्च करना पड़ सकता है। हालांकि इसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्कीम के तहत मिलने वाली मदद शामिल नहीं है। कोरोना वायरस संक्रमण के मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है। यहां संक्रमण के मामले एक करोड़ के करीब पहुंच चुका है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने अगले छह महीने में 30 करोड़ लोगों के टीकाकरण की योजना बनाई है। देश में एस्ट्राज़ेनेका, रूस के स्पुतनिक, ज़ायडस कैडिला और स्वदेशी कंपनी भारत बायोटेक वैक्सीन बना रही है।


रिपोर्ट के मुताबिक़ देश की एक बड़ी आबादी के टीकाकरण में फंडिंग एक बड़ी चुनौती है। जीएवीआई रिपोर्ट में बताया गया है कि टीकाकरण के पहले चरण में भारत को 60 करोड़ डोज़ की ज़रूरत पड़ेगी। इनमें सिर्फ स्वास्थ्य कर्मचारी और जिन्हें कोविड से ज़्यादा ख़तरा है उनका ही टीकाकरण मुमकिन है।

रिपोर्ट के मुताबिक़ अगर भारत को विश्व स्वास्थ्य संगठन की COVAX स्कीम के तहत 19 से 25 करोड़ डोज़ मिलती है तो सरकार को 1.4 अरब डॉलर अतिरिक्त ख़र्च करना होगा। वहीं ग्लोबल अलायंस के तहत अगर भारत को वैक्सीन के 9.5-12.5 करोड़ डोज़ मिलती है तो सरकार को 1.8 अरब डॉलर अतिरिक्त ख़र्च करना होगा। भारत का 2020-21 का स्वास्थ्य बजट देखें तो यह महज़ दस अरब डॉलर है।

COVAX स्कीम, विश्व स्वास्थ्य संगठन और जीएवीआई की अगुवाई में बना एक वैक्सीन वितरण योजना है। इसके तहत गरीब और मध्यम आय वाले देशों को डायग्नोस्टिक टेस्ट, दवाई और वैक्सीन मुहैया कराना है। इस स्कीम के लिए अपैल महीने में बनाई गई एक्सेस कोविड-19 टूल्स (एसीटी) के माध्यम से फंडिंग होती है।

रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत ने अभी तक वैक्सीन कार्यक्रम के लिए लागत का कोई अनुमान नहीं दिया है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि लोगों की सुरक्षा के लिए हर संभव संसाधन उपलब्ध कराया जाएगा। जीएवीआई कई देशों की सरकार, दवा कंपनियां, चैरिटी और अंतरराष्ट्रीय संगठनों का एक गठबंधन है। रिपोर्ट के मुताबिक़ जीएवीआई भारत सरकार से फंडिंग को लेकर बातचीत में थी लेकिन फिलहाल सरकार ने इसपर कोई जवाब नहीं दिया है।

जीएवीआई ने अपनी रिपोर्ट में भारत की ख़राब आर्थिक स्थिति का हवाला दिया है और फिलहाल वैक्सीन की 19-25 करोड़ डोज़ लेने की सलाह दी है। जीएवीआई ने भारत को इसके लिए 1.3 अरब डॉलर की डोनर-फंडेड योजना का सुझाव दिया है जिसको जीएवीआई वैक्सीन अलायंस बोर्ड अपनी मंज़ूरी देगा।

भारत का लक्ष्य है कि फरवरी महीने तक एक करोड़ फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मचारियों का टीकाकरण किया जाए। उसके अगले महीने में दो करोड़ इसेंशियल कर्मचारी और फिर अगस्त 2021 तक दो करोड़ 27 करोड़ आम लोगों के टीकाकरण की योजना है। इनमें ज़्यातर 50 वर्ष से ज़्यादा उम्र के लोग और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे मरीज़ शामिल होंगे।

जीएवीआई रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को इनफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी तीन करोड़ से आठ करोड़ रूपये तक ख़र्च करने की ज़रूरत है। इनमें वैक्सीन की ट्रांसपोर्टेशन और उसके स्टोर करने की व्यवस्था बनाई जानी है।

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