नफ़रत फैलाने के आरोपों के बीच फेसबुक ने लिया रीब्रैंडिंग का सहारा, कंपनी का नाम बदलकर ‘मेटा’ किया

by GoNews Desk 1 month ago Views 2470

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दिग्गज सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक ने खुद को रीब्रांड करने की प्रक्रिया में अपना नाम बदलकर मेटा कर लिया है। अब 1 दिसंबर से फेसबुक कंपनी इसी नाम के साथ कारोबार करेगी। फेसबुक का खासतौर पर ध्यान मेटावर्स बनाने पर हैं। इसके जरिए कंपनी एक वर्चुअल दुनिया बनाने की कोशिश कर रही है। इतना ही नहीं फेसबुक काफी समय से वर्चुअल और augmented reality  पर निवेश भी कर रहा है। कंपनी के मुताबिक फेसबुक का नाम अब मेटा कर दिया गया है लेकिन इससे उपभोक्ताओं के फेसबुक अकाउंट पर कोई असर नहीं होगा।

बता दें कि फेसबुक का प्लेटफॉर्म की रिब्रांड करने का ऐलान ऐसे समय हुआ है जब कि कंपनी भ्रामक और भड़काऊ सूचना को नियंत्रित न कर पाने को लेकर विवादों में हैं। आलोचकों का कहना है कि इन विवादों को दबाने के लिए और कंपनी की खराब हुई छवि ठीक करने के लिए फेसबुक के मालिक और सीईओ मार्क जकरबर्ग ने यह कदम उठाया है।       

सोशल मीडिया दिग्गज फेसबुक ऑनलाइन सुरक्षा और भड़काऊ पोस्ट को बढ़ावा देने के मामले में सवालिया घेरे में है।बीते दिनों कंपनी के आंतरिक दस्तावेजों के आधार पर दावा किया गया था कि फेसबुक भारत में भ्रामक और भड़काऊ पोस्ट रोकने में नाकाम रहा है। अब एक बार फिर फेसबुक के इंटरनल डॉक्यूमेंट से सामने आया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘न्यूज फीड’ एल्गोरिदम को इस तरह तैयार किया गया कि ऐसे पोस्ट जिन पर ‘एंगर’ या ऐसे इमोजी से रिएक्ट किया गया हो, वह पोस्ट ज़्यादा तेजी से वायरल हो जाते हैं। इससे यूजर्स के बीच नकारात्मक पोस्ट को बढ़ावा मिलता है।

दस्तावेजों में कहा गया है कि फीड को इस तरह तैयार करने का मकसद कंटेंट को और आकर्षक बनाने और दर्शकों को ज़्यादा देर तक प्लेटफॉर्म पर रोक कर रखना था। गो न्यूज ने आपको येल युनिवर्सिटी की एक साइकोलॉजी स्टडी के आधार पर बताया था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोगों के बीच ‘गुस्सैल संस्कृति’ को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए हैं। शोधकर्ताओं ने यह भी दावा किया था कि फेसबुक समेत दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अपने यूजर्स को आक्रोश फैलाने वाली सामग्री पोस्ट करने के लिए बढ़ावा देते हैं। ऐसा करने से उन्हें अधिक लाइक्स और कमेंट प्राप्त होंगे।

उन्होंने कहा, “हमने पाया कि रोज रिएक्ट किए गए आउटरेज एक्सप्रेशन का पिछले दिन के आउटरेज एक्सप्रेशन से मिले सोशल फीडबैक से अहम और सकारात्मक संबंध था।”  फेसबुक के निजी दस्तावेजों के आधार पर सामने आई मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘एंगर जेनरेटिंग’ फॉर्मुले के तहत एल्गोरिदम ने उन पोस्ट को पांच गुना ज़्यादा वेटेज दी जिसमें साधारण ‘लाइक’ के मुकाबले गुस्से वाली प्रतिक्रिया दी गई थी। 

फेसबुक ने प्लेटफॉर्म पर लाइक के अलावा दूसरे इमोजी से प्रतिक्रिया का भी विकल्प दिया है ताकि पोस्ट पर एंगेजमेंट बढ़ाया जा सके। फेसबुक को लेकर हुए यह खुलासे Frances Haghen के लीक किए गए अंतराष्ट्रीय दस्तावेजों का हिस्सा है। Frances ने फेसबुक को एक गैर जिम्मेदार संगठऩ बताया है और कहा है कि कंपनी मुनाफे को बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और समाज में लोकतांत्रिक मूल्यों से ज़्यादा अहमियत देती है।

वैश्विक स्तर पर दस्तावेजों की लीक ने सोशल मीडिया दिग्गजों, खासकर फेसबुक पर अपने प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित की गई सामग्री के परिणामों की और ज़्यादा जिम्मेदारी लेने का दबाव बढ़ा दिया है। आलोचक अब इस बात पर बहस कर रहे हैं कि लोग इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सिर्फ अपनी राय व्यक्त नहीं करते बल्कि यह प्लेटफॉर्म काफी हद तक एल्गोरिदम और सेवाओं के  माध्यम से लोगो के देखने और कहने के नजरिए को सक्रिय रूप से प्रभावित करते हैं।

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