भारत में ‘इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी’ : पाकिस्तान की ही तरह ‘ऑटोक्रेटिक’ हुआ देश- रिपोर्ट

by M. Nuruddin 1 year ago Views 3553

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की ‘लिबरल डेमोक्रेसी’ 0.34 दर्ज की गई है जो 2013 में 0.57 के मुक़ाबले सबसे निचली रैंकिंग है...

'Electoral Autocracy' in India: autocratic as Paki
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब भारत में ‘इलेक्टोरल डेमोक्रेसी’ से ‘इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी’ यानि ‘चुनावी निरंकुशता’ आ गई है। यह बात स्वीडन स्थित एक स्वतंत्र शोध संस्थान वी-डेम इंस्टीट्यूट की नई वार्षिक रिपोर्ट में सामने आई। नई रैंकिंग से यह पता चलता है कि भारत, पाकिस्तान की ही तरह ‘ऑटोक्रेटिक’ यानि ‘निरंकुश’ है। सेंसरशिप के मामले में भारत, पड़ोसी देश नेपाल और बांग्लादेश से भी बदतर हालात में है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘सामान्य तौर पर, भारत में मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने आलोचकों को चुप कराने के लिए देशद्रोह, मानहानि और काउंटर टेररिज़म का इस्तेमाल किया। उदाहरण के तौर पर, भाजपा के सत्ता संभालने के बाद 7,000 से ज़्यादा लोगों पर देशद्रोह के आरोप लगे, जिसमें ज़्यादातर लोग सत्ता पक्ष के आलोचक हैं।’


ग़ौरतलब है कि वी-डेम इंस्टीट्यूट की यह रिपोर्ट अमेरिकी थिंक-टैंक फ्रीडम हाउस की उस रिपोर्ट के बाद आई है जिसमें भारत को ‘स्वतंत्र’ से ‘आंशिक स्वतंत्र’ देशों की लिस्ट में शामिल कर दिया गया है। फ्रीडम हाउस की रिपोर्ट में यह बताया गया था कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अब ‘सत्तावाद’ की तरफ बढ़ रहा है।

2014 में स्थापित वी-डेम (वैरायटीज ऑफ डेमोक्रेसी) इंस्टीट्यूट एक स्वतंत्र शोध संस्थान है, जो गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय में स्थित है। संस्थान दुनियाभर के देशों में लोकतंत्र के हालात का आकलन कर हर साल एक रिपोर्ट प्रकाशित करती है। बुधवार को स्वीडन के उप विदेश मंत्री Robert Rydberg की मौजूदगी में संस्थान ने ‘Autocratization Turns Viral’ नाम से डेमोक्रेसी रिपोर्ट-2021 जारी की। रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘एक बड़ा बदलाव यह है कि 1.37 अरब की आबादी वाला दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र ‘इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी’ में बदल गया।’

वी-डेम इंस्टीट्यूट ने अपनी नई रिपोर्ट में बताया है कि, ‘(भारत) की सत्तारूढ़ सरकार पहले मीडिया और सिविल सोसायटी पर हमले करती है और विरोधियों का अपमान और ग़लत सूचनाएं फैलाकर समाज का ध्रुविकरण करती है।’ भारत की लगातार गिर रही रैंकिंग के ज़िक्र के साथ कहा गया है कि, ‘भारत पिछले दस सालों से उन ‘थर्ड वेव’ देशों में शामिल रहा जहां लोकतांत्रिक मूल्यों में क्रमिक गिरावट देखी गई। भारत उन देशों की लिस्ट में शामलि रहा है जहां लगातार मीडिया, एकेडमिशियन और सिविल सोसायटी की स्वतंत्रता पर हमले किए गए।’

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में ‘ऑटोक्रेटाइज़ेशन’ यानि ‘निरंकुशतावाद’ तब और तेज़ी से बढ़ा जब भारतीय जनता पार्टी ने अपने ‘हिंदू-राष्ट्रवादी एजेंडे’ का प्रचार किया। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की ‘लिबरल डेमोक्रेसी’ 0.34 दर्ज की गई है जो 2013 में 0.57 के मुक़ाबले सबसे निचली रैंकिंग है। यानि लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स 0-1 के स्केल पर 23 फीसदी पॉइंट की गिरावट। भारत के अलावा इस लिस्ट में हंगरी, तुर्की, सर्बिया, बेनिन और बोलविया जैसे देश शामिल हैं।

रिपोर्ट में पिछले दस सालों के हालात पर चर्चा की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक़ पिछले दस सालों में इलेक्टोरल ऑटोक्रेटिक देशों में रहने वालों की तादाद 48 फीसदी से 68 फीसदी पर पहुंच गई है। यानि दुनिया की करीब एक तिहाई आबादी इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी में रह रही है। ऐसे देश जहां अभिव्यक्ति की आज़ादी पर ख़तरा बढ़ रहा है, 2017 में 19 के मुक़ाबले इसकी संख्या 32 हो गई है। इनके अलावा दुनियाभर में निरंकुशतावाद तेज़ी से बढ़ रहा है और दुनिया की 34 फीसदी आबादी पर इसका ख़तरा है।

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