शिक्षा मंत्री स्कूल-कॉलेज खोलने के हक़ में, आख़िरी फैसला गृह मंत्रालय पर छोड़ा

by M. Nuruddin 1 year ago Views 3189

Education minister in favor of opening school coll
देश में कोरोना का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। ऐसे में सबके मन में सवाल है कि ऐसी स्थिति में स्कूल-कॉलेज खोले जाएं या नहीं। इसी को लेकर सोमवार को शिक्षा के लिए बनी संसदीय समिति की बैठक हुई। शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए ‘शून्य सत्र’ नहीं होंगे। माना जा रहा है कि शिक्षा मंत्रालय, कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थानों में साल के आख़िरी तक परीक्षा आयोजित करने की तैयारी में है।

इनके अलावा बच्चों के स्कूल खोलने को लेकर भी चर्चा की गई। मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि ऑनलाइन क्लास को सीमित रखा गया है। यह सिर्फ कक्षा तीन से आठवीं तक के बच्चों के लिए है। जबकि चर्चा में मौजूद सदस्यों ने ग़रीब परिवार के बच्चों को लेकर सवाल खड़े किए जिनके पास न तो इंटरनेट की सुविधा है और न ही स्मार्टफोन की।


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पैनल की अध्यक्षता कर रहे भाजपा सांसद विनय शहस्त्रबुद्धे ने कम्युनिटी रेडियो और ट्रांज़िस्टर की मदद से क्लासेज़ चलाने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि 'रेडियो' स्मार्टफोन, लैपटॉप और कंप्युटर की तुलना में सस्ता है और यह सभी आर्थिक रूप से कमज़ोर छात्र-छात्राओं को दिए जा सकते हैं। चर्चा में भाजपा सांसद ने छात्रों के लिए सभी विषयों का एक ‘बड़ा प्रश्न बैंक’ बनाने का सुझाव दिया है, जिसके आधार पर इस सत्र के लिए जब भी परीक्षा होगी तो उससे प्रश्न पूछे जा सकें।

सूत्रों के मुताबिक सत्र के आख़िरी तक परीक्षा आोयजित किए जाएंगे। इस सिलसिले में स्कूल शिक्षा सचिव, उच्च शिक्षा सचिव, यूजीसी के अध्यक्ष और शिक्षा मंत्रालय के अन्य अधिकारियों ने पैनल को विस्तार से जानकारी दी है।

ध्यान रहे, स्कूल-कॉलेज खोलने को लेकर शिक्षा मंत्रालय पहले ही साफ कर चुका है कि अंतिम फैसला गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस पर निर्भर करेगा। शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल का कहना है, ‘अनलॉक-3 की गाइडलाइंस के तहत गृह मंत्रालय ने स्कूल, कॉलेज और सभी कोचिंग इंस्टीट्यूट को 31 अगस्त तक बंद रखे गए हैं। आगे गृह मंत्रालय की जो भी गाइडलाइंस आएगी, हम उसके मुताबिक फैसला लेंगे।’ हालांकि इससे पहले शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ने अपने एक इंटरव्यू में सितंबर महीने से स्कूल-कॉलेज खोलने की बात कही थी।

इनके अलावा शिक्षा मंत्रालय ने राज्य सराकरों और अभिभावकों की राय भी ली। अभिभावकों का मानना है कि कोरोना संक्रमण के क़ाबू में आने तक स्कूल नहीं खोले जाएं। इस मामले में अभिभावकों के राष्ट्रीय संगठन ऑल इंडिया पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल का कहना है कि जबतक कोरोना वायरस संक्रमण पर पूरी तरह क़ाबू नहीं पा लिया जाता, तबतक स्कूल-कॉलेज नहीं खोले जाने चाहिए। अभिभावकों का भी मानना है कि इस साल 2020 के स्कूल सत्र को 'शून्य सत्र' घोषित कर दिया जाए।

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