मोदी सरकार में तेज़ी से सिकुड़ रही है आर्थिक आज़ादी: रिपोर्ट

by Rahul Gautam 1 year ago Views 1453

Economic freedom is shrinking rapidly in Modi gove
मैक्सिमम गवर्नेंस और मिनिमम गवर्नमेंट के नारे पर चुनकर आयी मोदी सरकार के राज में आर्थिक आज़ादी सिकुड़ती जा रही है। सेंटर फ़ॉर सिविल सोसाइटी के सहयोग से कनाडा की फ्रेज़र इंस्टीट्यूट की ओर से जारी सालाना रिपोर्ट में इसका दावा किया गया है. इसके मुताबिक 2019 में 79वें पायदान पर रहा भारत 2020 में 26 पायदान लुढ़ककर 105वें नंबर पर आ गया है.

द इकोनॉमिक फ़्रीडम ऑफ़ द वर्ल्ड 2020 नाम की रिपोर्ट कहती है कि भारत में आर्थिक आज़ादी को लंबे समय से रुके श्रम, बैंकिंग और कारोबार से जुड़े आर्थिक सुधारों और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में और छूट देकर बढ़ाया जा सकता है. जिन मानकों में गिरावट देखी गयी है, वो हैं सरकार का आकार (8.22 से 7.16 तक), कानूनी प्रणाली और संपत्ति का अधिकार (5.17 से 5.06 तक), अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार करने की आज़ादी (6.08 से 5.71) और ऋण, श्रम और व्यवसाय से जुड़े नियम  (6.63 से 6.53). इस रिपोर्ट में 10 के करीब का स्कोर अधिक आर्थिक स्वतंत्रता को दर्शाता है.


इस बीच अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने गुरुवार को कहा कि भारत में अर्थव्यवस्था में तेज़ी लाने की ज़रूरत है, विशेष रूप से कोरोनोवायरस महामारी के मद्देनज़र सरकार को चाहिए कि वो गरीब लोगों को राहत देने के लिए स्वास्थ्य, भोजन और रोज़गार पर ज्यादा पैसा खर्च करे. वाशिंगटन में एक वेबिनार को संबोधित करते हुए, आईएमएफ़ के संचार विभाग के निदेशक, गेरी राइस ने कहा कि वैश्विक वित्तीय संस्थान महामारी के इस काल में भारत के साथ खड़े हैं और ज़रूरत है भारत में बाज़ार और कारोबारियों में दोबारा विश्वास पैदा किया जाये.

दरअसल, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आये जीडीपी के आंकड़ों ने अर्थव्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है. आंकड़े चाहे सरकारी हों या फिर इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्था के, सभी कह रहे हैं कि पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा भारत की अर्थव्यवस्था को ही लॉकडाउन से नुकसान उठाना पड़ा है.

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