Ease of Living Index 2020: बेंगलुरु, शिमला रहने के लिए बढ़िया शहर, टॉप 10 में भी शामिल नहीं दिल्ली

by Siddharth Chaturvedi 1 year ago Views 6501

Ease of Living Index 2020: Bengaluru, Shimla a gre
Ease of Living Index 2020 - केंद्र सरकार ने देश के रहने लायक शहरों की सूची जारी की है। रहने के लिहाज़ से बेंगलुरु और शिमला शीर्ष पायदान पर पहुंच गए हैं तो श्रीनगर और मुजफ्फरपुर सबसे निचले पायदान पर हैं। हालांकि यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि देश की राजधानी नई दिल्ली टॉप 10 में भी नहीं है, उसे 13वां स्थान मिला है।

10 लाख से ज़्यादा आबादी वाले रहने लायक शहरों की श्रेणी में 49 शहरों का आकलन किया गया है। इस सूची में बरेली, धनबाद और श्रीनगर आखिरी पायदान वाले शहरों में शामिल हैं। वहीं शीर्ष 10 में बेंगलुरु, पुणे, अहमदाबाद, चेन्नई समेत और भी शहर शामिल हैं।


10 लाख से कम आबादी वाले रहने लायक शहरों की श्रेणी में 62 शहरों का आकलन किया गया है। इसमें मुजफ्फरपुर को सबसे आखिरी स्थान मिला। तो वहीं टॉप 10 की बात करें तो इस लिस्ट में शिमला के साथ भुबनेश्वर, सिल्वासा और गुरुग्राम भी शामिल है।

वैसे केंद्र सरकार ने इस रिपोर्ट में नगरपालिका प्रदर्शन सूचकांक भी जारी किया है। इस लिस्ट में 10 लाख से ज़्यादा आबादी वाले नगर निगम की लिस्ट में इंदौर टॉप पर है तो वहीं गुवाहाटी आख़री स्थान पर है। और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद ने 10 लाख से कम आबादी की श्रेणी में ‘नगरपालिका प्रदर्शन सूचकांक' में पहला स्थान हासिल किया है, जबकि तिरुपति और गांधीनगर को दूसरा व तीसरा स्थान मिला है। वहीं शिल्लोंग इस लिस्ट में आख़री स्थान पर है।

यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि रहने के लिहाज़ से देश के 111 शहरों के शीर्ष दस में उत्तर प्रदेश का एक भी शहर शामिल नहीं है। हालांकि, दस लाख से ज़्यादा आबादी वाले शहरों की शीर्ष 50 की रैकिंग में लखनऊ (26), वाराणसी (27), मेरठ (36) और बरेली (47) को रहने लायक माना गया है।

आपको बता दें कि 'ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स-2020' केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जारी की थी। शहरों का यह आकलन पिछले साल लॉकडाउन से पहले किया गया था। वैसे यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि एक तरफ़ बंगाल की ज़मीन चुनावी वादों से गरमाई हुई है पर वहीं आंकड़े मिलने में आई मुश्किलों के चलते सूची में बंगाल के शहरों को शामिल नहीं किया गया है।

साथ ही आपको यह भी बता दें कि शहरों का इंडेक्स बनाने में सर्विसेज, फाइनेंस, पॉलिसी, टेक्नोलॉजी और गवर्नेस को मूल आधार बनाया गया है। साथ ही शहरों में सुविधाओं के आकलन में वहां के नागरिकों के विचार को भी शामिल किया गया है।

इस रिपोर्ट में एक चिंता बढ़ा देने वाली बात भी सामने आई है और वो यह है कि बढ़ते शहरीकरण से देश के शहरों का ढांचा चरमराने लगा है। अगले एक दशक में देश में शहरी आबादी मौजूदा 31 फीसद से बढ़कर 50 फीसद तक होने का अनुमान है। इसलिए हमारी सरकारों को शहरीकरण की तेज़ रफ्तार के बुनियादी ढांचे को और मज़बूत करने पर ज़ोर देना होगा।

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