क्या ईएमआई की छूट से ग्राहकों को सच में फ़ायदा है ? समझें गणित 

by Rahul Gautam 2 months ago Views 1481
Do customers really benefit from EMI discounts? Un
रिज़र्व बैंक ने 27 मार्च को बैंक एवं हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों सहित सभी वित्तीय संस्थाओं को अपने लेनदारों को टर्म लोन की किश्त के भुगतान पर तीन माह की छूट देने का निर्देश दिया था। इस एलान से लॉकडाउन में बंद लोगों को उम्मीद है राहत की। लेकिन क्या मोरेटोरियम से ग्राहकों को सच में फ़ायदा है? या तीन महीने से इस छूट से आपकी जेब पर बाद में ज़्यादा भार पड़ेगा।  समझिये क्या है गणित आपकी ईएमआई का...

सबसे पहले आपको पता होना चाहिए की आरबीआई द्वारा घोषित मोरेटोरियम का मतलब केवल विलंब है, इसका मतलब वेव ऑफ कतई नहीं है। लेकिन ये विलंब भी इतना आसान नहीं है। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि आपको अभी होम लोन की 4 साल और ईएमआई देनी है और आप अगर मोरेटोरियम का लाभ उठाते हैं तो आपको बाद में बस 4 साल और 3 महीने और किश्त देनी है।  

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असल में अगर आप तीन महीने की छूट का फ़ायदा उठाते हैं और फ़र्ज़ कीजिये अप्रैल, मई और जून की ईएमआई नहीं देते हैं तो आपको ज़्यादा पैसे जेब से निकालने होंगे।क्योंकि मोरेटोरियम का फ़ायदा उठाने से इन तीन महीनों की ईएमआई आपके मूल क़र्ज़ में जुड़ जाएगी और आगे से आपको बढ़े हुए मूल पर ईएमआई चुकानी होगी।

अब इसे आंकड़ों के साथ समझिये। मान लीजिये किसी व्यक्ति की होम लोन की हर महीने किश्त जाती है 50,000 और मोरेटोरियम लेने के कारण उसने 1.5 लाख की किश्त बैंक को नहीं दी, तो ऐसी स्थिति में ये 1.5 लाख रुपए उसके मूल क़र्ज़ में जुड़ जाएंगे और फिर उसे बढ़े हुए मूल पर क़र्ज़ चुकाना होगा।

वीडियो देखिए

समझिये, मान लीजिये आपकी 50 हज़ार की 36 ईएमआई बची थी, इसमें 3 मोरेटोरियम वाली ईएमआई जुड़ गई तो आपको 39 नहीं 40 ईएमआई चुकानी पड़ेगी। अगर 50 हज़ार की 60 ईएमआई बची थी, इसमें 3 मोरेटोरियम वाली ईएमआई जुड़ गई, तो आपको 63 नहीं बल्कि 65 ईएमआई चुकानी पड़ेगी। अगर  50 हज़ार की 120 ईएमआई बची थी, इसमें 3 मोरेटोरियम वाली ईएमआई जुड़ गई, तो आपको 128 ईएमआई चुकानी पड़ेगी। जितनी ज़्यादा लोन की अवधि, उतना ही ज़्यादा ईएमआई चुकानी पड़ेगी।

हालांकि, इस छूट का मूल्यांकन करने हुए आपको ये ध्यान रखना होगा की 5 साल बाद या 10 साल बाद रुपए की कीमत कम ही होगी। इसलिए सोच समझकर ही इस छूट का फ़ायदा लें ताकि बाद में ईएमआई चुकाते हुए तक़लीफ ना हो।