दुनियाभर की रेटिंग एजेंसियों में भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर मायूसी

by Rahul Gautam 1 year ago Views 1738

Disappointment about India's economy in rating age
संकट में फंसी अर्थव्यवस्था के लिए कोरोना महामारी ताबूत में कील साबित हुई है. जीडीपी ने निराशाजनक आंकड़े सामने आने के बाद तमाम अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने बारी-बारी से अपने अनुमानों में संशोधन करना शुरू कर दिया है. मसलन अमेरिका के गोल्डमैन सेक्स ने पहले अनुमान लगाया था कि साल 2020 में भारत की अर्थव्यवस्था 11.1 फीसदी सिकुड़ेगी लेकिन अब उसका मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था 14.8 फ़ीसदी तक सिकुड़ सकती है.

फिच रेटिंग्स ने पहले अनुमान लगाया था कि भारत की अर्थव्यवस्था 5 फीसदी सिकुड़ेगी लेकिन अब उसने इसमें बढ़ोतरी कर दी है और यह आंकड़ा बढ़कर 10.5 फीसदी पर पहुंच गया है. जापान की नोमुरा एजेंसी ने पहले कहा था कि भारतीय अर्थव्यवस्था को 6.1 फीसदी का झटका लगेगा लेकिन अब उसने भी कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था 10.8 फीसदी सिकुड़ेगी.


इसी तरह इंडिया रेटिंग्स ने भी पहले भारतीय अर्थव्यवस्था के 5.3 फीसदी सिकुड़ने का अनुमान लगाया था लेकिन अब उसका मानना है कि हालात ज्यादा ख़राब हैं और भारत की अर्थव्यवस्था 11.8 फीसदी सिकुड़ सकती है.

एसएचबीसी और मॉर्गन स्टैनले के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान 5 से 7.2 फीसदी के बीच हो सकता है. इन आंकड़ों का सीधा मतलब है कि ज्यादातर क्रेडिट एजेंसी अब मान रही हैं कि हालात सोच से ज्यादा ख़राब हैं और सुधरने में काफी समय लग सकता है.

बता दें कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था को इतना ज्यादा नुकसान हुआ है जबकि इसके मुकाबले 2008 की वैश्विक मंदी को भारत ने बहुत आसानी के साथ पार कर लिया था. आर्थिक मोर्चे पर मची इस तबाही की सबसे बड़ी वजह है 25 मार्च को अचानक घोषित हुआ लॉकडाउन जो कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लगाया गया था. यह लॉकडाउन 70 दिनों से ज्यादा चला और इस दौरान देश में आर्थिक गतिविधियों पर पूरी तरह ब्रेक लग गया. इस दौरान सिर्फ आवश्यक सेवाओं जैसे कि खाद्य पदार्थों और दवाओं की आपूर्ति की ही इजाज़त थी.

इसके बाद आए जीडीपी की पहली तिमाही के आंकड़ों ने अर्थव्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है. आंकड़े चाहे सरकारी हों या फिर इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्था के, सभी कह रहे हैं कि पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा भारत की अर्थव्यवस्था को ही लॉकडाउन से नुकसान उठाना पड़ा है.

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