ई-वेस्ट महिला, बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बना ख़तरा: WHO

by M. Nuruddin 1 year ago Views 1879

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दुनिया में साल दर साल इलेक्ट्रोनिक वेस्ट बढ़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ इसका बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक़ 1.29 करोड़ महिलाएं अनौपचारिक रूप से कचरे के क्षेत्र में काम करती हैं जिस वजह से संभावित वो इलेक्ट्रोनिक कचरे के संपर्क में आती हैं। इससे उन महिलाओं के ख़ुद के स्वास्थ्य पर ही नहीं बल्कि उनके अजन्में बच्चे के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि अवैध रूप से ई-वेस्ट को निम्न और मध्यम आय वाले देशों में भेज दिया जाता है जहां बच्चों, किशोरों सहित अनौपचारिक श्रमिक जिनमें महिलाएं भी शामिल होती हैं, उनमें से मूल्यवान धातुओं को छांट कर निकालते हैं। ऐसे में तरह तरह के एसिड और वेस्ट्स के संपर्क में आने से ख़ुद श्रमिक और उनके बच्चों पर भी बुरा असर पड़ता है। 


रिपोर्ट में बताया गया है कि करीब 1.8 करोड़ बच्चे और किशोर, जिनमें से कुछ की उम्र तो पांच साल से भी कम है, वे अनौपचारिक रूप से औद्योगिक क्षेत्र में बाल मज़दूरी कर रहे हैं। इसी में वेस्ट प्रोसेसिंग भी शामिल है। अक्सर बच्चों के माता-पिता और उनकी देखभाल करने वाले उन्हें इलेक्ट्रॉनिक कचरे की रीसाइक्लिंग के काम में लगा देते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी रिपोर्ट में यह बताया है कि अन्य बच्चे जो इस इलेक्ट्रॉनिक कचरे के आसपास रहते हैं, स्कूल जाने के दौरान इनके संपर्क में आते हैं या इस तरह की रिसाइकलिंग सेंटर के आसपास रहने की वजह से खेल-कूद के दौरान इसके संपर्क में आते हैं। उनमें कचरे की ढेर में मौजूद ख़तरनाक कैमेकिल्स, सीसा और पारा के संपर्क में आने से उनके बौद्धिक क्षमता को नुकसान पहुंच सकता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि एक गर्भवती  महिला के इस कचरे के संपर्क में आने से न सिर्फ उनके बल्कि उनके अजन्मे बच्चे के स्वास्थ्य और विकास पर भी खतरा होता है। इस वजह से बच्चे का समय से पहले जन्म, मृत्यु, और उसके विकास पर असर पड़ सकता है। साथ ही यह उसके मानसिक विकास, बौद्धिक क्षमता और बोलने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है। 

साथ ही इससे बच्चों की सांस लेने की क्षमता और फेफड़ों के कार्यप्रणाली पर भी असर पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ यह बच्चों के डीएनए को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे थायरॉयड सम्बन्धी बीमारी और बाद में उनमें कैंसर और दिल की बीमारी के खतरे को बढ़ा सकता है।

इंवायरोमेंट पर काम करने वाली एक वेबसाइट ने ई-वेस्ट स्टैटिस्टिक्स पार्टनरशिप के हवाले से बताया है कि साल 2019 में वैश्विक स्तर पर करीब 5.36 मीट्रिक टन ई-वेस्ट उत्पन्न हुआ था, जो पिछले पांच सालों में करीब 21 फीसदी बढ़ा है। अगर अनुमान लगाया जाए तो वेस्ट का कुल वज़न 350 क्रूज़ जहाजों के वज़न के बराबर था। यानि अगर इसे एक लाइन में बिछा दिया जाता तो यह करीब 125 किलोमीटर में फैला होता। 

जिस हिसाब से मोबाइल, लैपटोप, गेमिंग जैसे इलेक्ट्रोनिक गेजेट्स में लोगों की रूचि बढ़ रही है उस हिसाब से आने वाले सालों में ई-वेस्ट में और भी ज़्यादा बढ़ोत्तरी का अनुमान है।

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