Hijab Ban के ख़िलाफ़ प्रदर्शन; भगवाधारी छात्र-छात्राओं का परेड, जय श्री राम के नारे !

by M. Nuruddin 4 months ago Views 1506

Demonstration against Hijab Ban; Saffron-clad stud
कर्नाटक के महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) कॉलेज के बाहर हिन्दू-मुस्लिम छात्र-छात्राओं के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी गई है। मंगलवार को भारी संख्या में दोनों समुदाय के छात्र-छात्राओं को कॉलेज के बाहर विरोध-प्रदर्शन करते देखा गया। एक तरफ जहां मुस्लिम छात्राओं ने “We Want Justice” के नारे लगाए तो वहीं दूसरी तरफ “जय श्री राम” और “भारत माता की जय” के नारे लगाए गए।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक तरफ मुस्लिम छात्राएं “Hijab Is Our Right” की तख़्तियों के साथ प्रदर्शन कर रही हैं तो वहीं दूसरी तरफ भगवा टोपी और भगवा गमछे लगाकर नारेबाज़ी की जा रही है।


वीडियो में देखा जा सकता है कि सैकड़ों की संख्या में भगवाधारी युवा प्रदर्शन कर रहीं छात्राओं के पीछे आकर इकट्ठा हो रहे हैं जहां कोई सुरक्षा बल तैनात नहीं है। उन्हें हवा में अपनी भगवा टोपी लहराते भी देखा जा सकता है।

एक अन्य वीडियो में देखा जा सकता है कि जब एक मुस्लिम छात्रा कैंपस में प्रवेश करती हैं तो दर्जनों की संख्या में भगवाधारी युवा उनका पीछा कर रहे हैं। (Video)

इससे पहले हिन्दू छात्र और छात्राओं को भगवा गमछे और दुपट्टे के साथ कर्नाटक की सड़कों पर परेड करते भी देखा गया। 

दरअसल, कर्नाटक सरकार ने राज्य में स्कूल-कॉलेज में प्रवेश के लिए हिजाब को आधिकारिक तौर पर बैन कर दिया है। कर्नाटक सरकार का कहना है कि "समानता, अखंडता और सार्वजनिक क़ानून और व्यवस्था को बिगाड़ने वाले कपड़े नहीं पहना जाना चाहिए।” राज्य सरकार के इस फैसले के बाद अब मुस्लिम छात्राएं हिजाब पहनकर स्कूल या कॉलेज में प्रवेश नहीं कर सकेंगी।

कर्नाटक डिपार्टमेंट ऑफ प्राइमरी एंड सेकेंड्री एजुकेशन के अंडर सेक्रेटरी पद्मिनी एसएन ने यह निर्देश कर्नाटक शिक्षा अधिनियम के 133(2) के तहत जारी किया है जो राज्य सरकार को उनके मुताबिक़ शैक्षणिक या ट्यूटोरियल संस्थानों को किसी भी मुद्दे पर एक निर्देश जारी करने का आधिकार देता है।

राज्य सरकार को अधिकार है कि वे किसी भी निहित प्रावधान को प्रभावी करने के लिए इस अधिनियम का इस्तेमाल कर सकती है।

राज्य सरकार के इस निर्देश के बाद स्कूल-कॉलेज में छात्र-छात्राएं कॉलेज डेवलपमेंट कमेटी या प्री-यूनिर्सिटी कॉलेज की अपीलीय कमेटी द्वारा निर्धारित किए गए यूनिफॉर्म पहनकर ही कक्षा में प्रवेश कर सकेंगे।

राज्य सरकार के इस निर्देश से वो स्कूल-कॉलेज-यूनिवर्सिटी जहां ड्रेस कोड पहले से निर्धारित नहीं है, उसके लिए कहा गया है कि "समानता, अखंडता और सार्वजनिक क़ानून और व्यवस्था को बिगाड़ने वाले कपड़े नहीं पहना जाना चाहिए।”

निर्देश में 2017 के एक मामले का हवाला दिया गया है जिसमें सुप्रीम कोर्ट जिसमें कोर्ट ने कहा था कि व्यक्तिगत हित से बढ़कर सार्वजनिक हित होता है। निर्देश में यह भी कहा गया है कि शैक्षणिक संस्थानों के अंदर हिजाब पहनने पर प्रतिबंध भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी के मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं करता है।

ग़ौरतलब है कि राज्य सरकार ने यह निर्देश राज्य के पीयू कॉलेज और अन्य कॉलेज में हिजाब के साथ प्रवेश को प्रतिबंधित करने के फैसले के बाद आया है। जहां कॉलेज अधिकारी कथित रूप से भारतीय जनता पार्टी के विधायक के निर्देश का पालन कर रहे थे। (Govt. Order)

मुस्लिम छात्रा द्वारा कर्नाटक हाई कोर्ट में 31 जनवरी को एक रिट याचिका दायर की गई थी, जिसमें यह आदेश जारी करने की मांग की गई कि हिजाब (सिर पर दुपट्टा) पहनना भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 के तहत एक मौलिक अधिकार है और यह इस्लाम की एक अनिवार्य प्रथा है।

सोशल मीडिया यूज़र राज्य सरकार पर भेदभाव का आरोप लगा रहे हैं। कहा जा रहा है कि कथित सुनियोजित तरीके से हिन्दू छात्र-छात्राएं भगवा गमछे-दुपट्टे के साथ कक्षा में प्रवेश के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं।

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