दिल्ली को आग में झोकने में सोशल मीडिया की ख़तरनाक भूमिका

by Rahul Gautam 3 months ago Views 1193
Dangerous role of social media in setting Delhi on
दिल्ली को आग में झोकने में सोशल मीडिया की ख़तरनाक भूमिका सामने आई है. दिल्ली पुलिस ने शुरुआती तफ्तीश के बाद दावा किया है कि उसे संदिग्धों के मोबाइल फोन से ऐसे व्हाट्सप्प ग्रुप मिले हैं जिनका इस्तेमाल हिंसा भड़काने में किया गया. हालांकि दंगों में सोशल मीडिया और वॉट्सएप की ऐसी भूमिका पहले भी उजागर हो चुकी है. 2013 का मुज़्ज़फ़पुर दंगा भी पाकिस्तान के एक फेक वीडियो से शुरू हुआ था.


राजधानी में तीन दिन तक चली सांप्रदायिक हिंसा में सोशल मीडिया और मोबाइल एप्लीकेशन की भूमिका उजागर हुई है. उत्तर पूर्वी दिल्ली की पुलिस ने गिरफ्तार लोगों और संदिग्धों के मोबाइल फोन ज़ब्त किए हैं. दिल्ली पुलिस का दावा है कि फेसबुक, ट्वीटर और मोबाइल एप्लीकेशन व्हाट्सप्प पर भड़काऊ वीडियो डालकर हिंसक भीड़ को जमा किया गया और फिर लूटपाट और आगज़नी का खुला खेल शुरू हुआ.

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हिंसा भड़काने के लिए कई दंगाइयों ने सेल्फी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड किया था. ऐसा ही एक वीडियो हिंसाग्रस्त भजनपुरा इलाक़े से अपलोड किया था जिसे बाद में स्थानीय लोगों ने पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया. मौजपुर से एक शख्स दंगा करने जाफराबाद पहुंचा था जिसे स्थानीय लोगों ने पकड़ लिया. इसके बाद उस शख़्स के घरवालों को फोन करके इत्तेला दी गई. 

इस सांप्रदायिक हिंसा में मरने वालो का आंकड़ा 34 के पार जा चुका है। दिल्ली पुलिस अब तक 48 FIR दर्ज़ कर 106 संदिग्धों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस के मुताबिक दंगा भड़काने में फेसबुक, व्हाट्सप्प और ट्विटर का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया गया जिससे हिंसा ज़बरदस्त तरीके से फैली। जांच में लगी टीमें कम से कम 50 व्हाट्सप्प ग्रुप की जांच कर रही हैं. कई सारे वॉट्सएप ग्रुप में बीजेपी नेता कपिल मिश्रा का वो बयान भी है जिसमे उन्होंने पुलिस को जाफराबाद में नागरिकता कानून के खिलाफ धरना दे रहे लोगो को हटाने की धमकी दी थी. कपिल मिश्रा का बयान फेसबुक, व्हाट्सप्प और ट्विटर पर खूब शेयर किया गया था जिसके बाद ही पूरे इलाक़े में हिंसा शुरू हो गई थी.